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संपादकीय: नेपाल का दावा

कालापानी को लेकर पिछले साल नवंबर में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भारत को धमकाते हुए यहां तक कह दिया था कि नेपाल उसे अपनी एक भी इंच जमीन पर कब्जा नहीं करने देगा।

Author Published on: June 2, 2020 12:45 AM
china-nepal, international newsचीन की साजिश में फंसकर नेपाल भारत विरोधी कार्यों में जुटा है।

पड़ोसी देश नेपाल ने इन दिनों भारत के खिलाफ जिस तरह से उग्र मोर्चा खोल रखा है, वह हैरान करने वाला है। ज्यादा तकलीफदेह बात इसलिए है कि भारत और नेपाल के संबंध सदियों से रहे हैं और दोनों देश बड़े-छोटे भाई की तरह रहते आए हैं। लेकिन हाल के घटनाक्रम बता रहे हैं कि भाइयों का यह रिश्ता आने वाले वक्त में शायद ही बना रह पाए। नेपाल ने भी उसी तरह के विवाद खड़े करने शुरू कर दिए हैं, जैसे चीन और पाकिस्तान करते रहे हैं। चीन के सीमा विवाद की देखादेखी दुनिया के इस एकमात्र पूर्व हिंदू राष्ट्र ने भी अब उन कुछ इलाकों को लेकर दावे करने शुरू कर दिए हैं जो भारत के क्षेत्र में हैं।

मामला अब इतना ज्यादा बढ़ चुका है कि नेपाल ने देश का नया राजनीतिक और प्रशासनिक नक्शा मंजूरी के लिए संसद में पेश कर दिया है। इस नए नक्शे में कालापानी, लिंपियाधुरा और लिपुलेख को नेपाल ने अपना हिस्सा बताया है। जाहिर है, भारत के सामने मुश्किलें कम नहीं हैं। भारत इस मामले में विरोध जताने से ज्यादा कुछ नहीं कर पाया है। हकीकत यह है कि हम समय रहते स्थिति को भांप नहीं पाए और कूटनीतिक माध्यमों से नेपाल को ऐसा करने से रोक पाने में असफल रहे।

सवाल है कि आखिर नेपाल इतना छटपटा क्यों रहा है। आज जिन इलाकों पर दावा करते हुए वह उन्हें विवादित क्षेत्र बनाने की कोशिशें कर रहा है, उनके बारे में पहले कभी किसी भी स्तर पर किसी भी नेपाली शासक ने कोई बात नहीं की थी। भारत के साथ चीन और पाकिस्तान के विवादों के बारे में तो सब सुनते आए हैं, लेकिन नेपाल के साथ भी इस तरह के विवाद हो सकते हैं, यह किसी ने सोचा भी नहीं होगा। अगर इतिहास की गहराइयों में जाएं, तो पाएंगे कि इनमें से कोई भी इलाका ऐसा नहीं है जो इस वक्त आधिकारिक रूप से नेपाल के कब्जे में आता हो।

कालापानी को लेकर पिछले साल नवंबर में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने भारत को धमकाते हुए यहां तक कह दिया था कि नेपाल उसे अपनी एक भी इंच जमीन पर कब्जा नहीं करने देगा। कालापानी को लेकर नेपाल इसलिए भड़का है क्योंकि पिछले साल भारत ने इकतीस अक्तूबर को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को नया केंद्र शासित प्रदेश बनाने के साथ ही देश का नया नक्शा जारी किया था, जिसमें कालापानी को भारतीय क्षेत्र में दिखाया गया है। पैंतीस वर्ग किलोमीटर का यह त्रिकोणीय इलाका उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में आता है, जिसकी सीमाएं चीन और नेपाल से सटी हैं। यह इलाका पिछले दो सौ साल से भी ज्यादा समय से भारत के अधिकार क्षेत्र में है और यहां भारत-तिब्बत सीमा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल की चौकियां हैं।

जाहिर है, नेपाल अकेला यह सब नहीं कर सकता। यह कोई छिपी बात नहीं रह गई है कि उसके पीछे महाशक्ति चीन है। भारत को घेरने के लिए चीन अब खुल कर नेपाल का इस्तेमाल कर रहा है। नेपाल की सत्ता पूरी तरह से चीन के प्रभाव में है। चीन ने नेपाल में कई विकास परियोजनाएं शुरू कर तेजी से अपने पैर पसारने शुरू कर दिए हैं।

नेपाल की तरह ही श्रीलंका, बांग्लादेश और मालद्वीव जैसे देशों पर चीन का गहरा प्रभाव है। चीन सार्क में फूट डलवा कर भारत पर शिकंजा कसना चाहता है। ऐसे में भारत को प्रभावशाली कूटनीति से ही नेपाल और चीन को काबू करना होगा।

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