राष्ट्रीय पात्रता-सह-प्रवेश परीक्षा (नीट यूजी-2026) की शुचिता बनाए रखने के लिए सरकार की ओर से जिस तरह के उपायों पर जोर दिया जा रहा है, अब उन्हीं पर सवाल उठने लगे हैं। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) की सिफारिश पर केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मंगलवार को संवाद ऐप ‘टेलीग्राम’ पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया।
एनटीए का कहना है कि यह निर्णय इस ऐप की उस तकनीकी सुविधा को ध्यान में रखकर किया गया है, जिसका इस्तेमाल राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के संबंध में प्रश्नपत्र लीक के फर्जी साक्ष्य गढ़ने के लिए किया जाता है। मगर क्या सरकार के इस कदम से यह पूरी तरह सुनिश्चित हो पाएगा कि प्रश्नपत्र लीक नहीं होगा? तकनीक के इस दौर में क्या कोई इसी तरह के दूसरे ऐप का इस्तेमाल नहीं कर सकता? जाहिर है कि ऐसे सतही उपाय इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकते हैं।
सरकार ने ‘टेलीग्राम’ पर नीट यूजी की पुनः परीक्षा होने तक इसलिए रोक लगा दी, क्योंकि इसका इस्तेमाल प्रश्नपत्र लीक के फर्जी साक्ष्य गढ़ने के लिए किया जा रहा है। मगर इसकी मूल जड़ तो वहां है, जहां से प्रश्नपत्र लीक होता है। विचित्र बात है कि प्रश्नपत्रों की छपाई से लेकर उसके परिवहन तक की व्यवस्था को पुख्ता करने का दावा किया जा रहा है, लेकिन परीक्षा संचालन से जुड़े लोगों की जवाबदेही पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
यह बात सही है कि किसी संवाद ऐप पर भ्रामक जानकारियां फैलाने से परीक्षार्थियों के मनोबल पर असर पड़ सकता है, लेकिन क्या इस तरह के ऐप पर प्रतिबंध लगा देने से समस्या का स्थायी समाधान निकल पाएगा? ऐसे तो सोशल मीडिया से जुड़े कई मंच हैं, जिन्हें इस तरह की अफवाह फैलाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि ‘टेलीग्राम’ पर पाबंदी से लाखों ऐसे नागरिक भी प्रभावित होंगे, जो इसका इस्तेमाल वैध तरीके से निजी, शैक्षणिक और पेशेवर जानकारी से जुड़े कामों के लिए करते हैं। ऐसे में जरूरी है कि सरकार परीक्षा में गड़बड़ी को रोकने के लिए स्थायी समाधान खोजने की दिशा में कदम उठाए।
