किसी भी परीक्षा के दौरान अगर प्रश्नपत्र लीक होता है या अन्य कोई गड़बड़ी होती है, तो इसका मतलब यही है कि उसके संचालन से जुड़ा तंत्र परीक्षा की शुचिता को सुनिश्चित कराने में नाकाम रहा। हाल ही में प्रश्नपत्र लीक होने के बाद नीट-यूजी परीक्षा को जिस तरह रद्द किया गया, उससे साफ है कि पहले हुई ऐसी कई घटनाओं के बावजूद आयोजन में हर हाल में शुचिता तय करने को लेकर राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए ने जरूरी सबक नहीं सीखा। नतीजतन, नीट की परीक्षा के प्रश्नपत्र फिर अवैध रूप से बाहर हुए और ऊंची कीमतों पर बेचे गए।
विडंबना यह है कि इस भ्रष्ट लेन-देन और इसके जरिए परीक्षा में कामयाब होने की कोशिश करने वाले कुछ लोगों की करतूतों का खमियाजा करीब बाईस लाख उन विद्यार्थियों को उठाना पड़ा, जिन्होंने ईमानदारी से अपनी मेहनत के बूते परीक्षा दी थी। ऐसे विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की पीड़ा प्रश्नपत्र लीक करने और उसका फायदा उठाने वाले गिरोहों की हरकत के खुलासे से उपजे शोर में दब कर रह गई।
विचित्र है कि इस घटना की परतें खुलने के बाद शीर्ष स्तर पर इसकी जिम्मेदारी तय करने तथा संचालन के तंत्र में पाई गई खामी को पूरी तरह दुरुस्त करने या इस मसले पर अधिकतम सख्ती बरतने के बजाय सुरक्षित तरीके से परीक्षा कराने के लिए अब सेना का सहारा लेने की खबर आई है। यानी एक तरह से यह स्वीकार कर लिया गया है कि सरकार का मौजूदा तंत्र इस परीक्षा का स्वच्छ तरीके से संचालन कर पाने में सक्षम नहीं है और इसीलिए सेना के सहारे नीट-यूजी परीक्षा की शुचिता सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी।
किसी राष्ट्रीय स्तरीय परीक्षा के लिए पहली बार सेना का होगा इस्तेमाल
गौरतलब है कि नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने से जुड़े मामले में पूरी प्रक्रिया की समीक्षा के लिए हुई बैठक में प्रश्नपत्र तैयार करने और उनकी छपाई से लेकर परिवहन, सुरक्षा और परीक्षा केंद्र तक उनकी पहुंच सुनिश्चित करने के सभी पहलुओं पर विचार किया गया। इसके बाद अब 21 जून को दोबारा होने वाली नीट परीक्षा में प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचाने के लिए वायुसेना की मदद लेने पर सहमति बनी। अगर यह प्रस्ताव अमल में आता है, तो किसी राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा के आयोजन और संचालन में सेना के औपचारिक रूप से शामिल होने का यह पहला मौका होगा।
सवाल है कि इससे पहले नीट या अन्य परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों का उदाहरण सामने होने के बावजूद यह स्थिति आखिर क्यों पैदा हुई कि सरकार को परीक्षा के स्वच्छ संचालन के लिए अपने तंत्र और पुलिस पर भरोसा नहीं रहा। हालांकि खबरों के मुताबिक सेना की भूमिका केवल लॉजिस्टिक समन्वय, आपातकालीन स्थितियां पैदा होने या मौसम में तेज उतार-चढ़ाव के बीच सुरक्षित परिवहन तक सीमित रहने की बात कही गई है और परीक्षा की निगरानी सेना से नहीं कराई जाएगी। मगर यह देखने की बात होगी कि सेना की मदद का दायरा क्या होता है।
आमतौर पर किसी प्राकृतिक आपदा से हुई तबाही और अन्य आपात स्थितियों में युद्ध स्तर पर बचाव कार्य आदि के लिए जरूरत पड़ने पर सरकार सेना या सशस्त्र बलों को तैनात करती रही है। यह एक अफसोसनाक स्थिति है कि आज के दौर में परीक्षाओं के संचालन के मामले में पहले के मुकाबले बेहतर संसाधनों, हर स्तर पर निगरानी की तकनीकी सुविधा और व्यापक डिजिटल तंत्र के बावजूद प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं हो रही हैं और इसे रोकने के लिए सरकार के सामने सेना की मदद लेने की नौबत है।
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सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG प्रश्नपत्र लीक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि देश के युवाओं का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। सर्वोच्च अदालत ने कहा, ”हमें अपने युवाओं को निराश नहीं करना चाहिए।” सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च अदालत से कहा कि प्रधानमंत्री खुद नीट एग्जाम को मॉनीटर कर रहे हैं। अदालत ने केंद्र सरकार को मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह तक के लिए स्थगित कर दी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां पर करें क्लिक
