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संपादकीयः नवाज की नियति

पाकिस्तान की जवाबदेही अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जो सजा सुनाई है उसका वहां की राजनीति पर गहरा असर पड़ेगा।

Author July 9, 2018 2:49 AM
जवाबदेही अदालत ने पनामा पेपर्स कांड से जुड़े एक मामले में नवाज शरीफ को दस साल की सजा सुनाई है, उन पर तिहत्तर करोड़ का जुर्माना भी लगा है।

पाकिस्तान की जवाबदेही अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में जो सजा सुनाई है उसका वहां की राजनीति पर गहरा असर पड़ेगा। जवाबदेही अदालत ने पनामा पेपर्स कांड से जुड़े एक मामले में नवाज शरीफ को दस साल की सजा सुनाई है, उन पर तिहत्तर करोड़ का जुर्माना भी लगा है। यह मामला लंदन के एवनफील्ड संपत्ति खरीद का है। पनामा पेपर्स कांड का खुलासा अप्रैल 2016 में हुआ था, और इसी के साथ देश से बाहर अवैध रूप से संपत्ति जुटाने के शरीफ और उनके परिवार पर लगे आरोपों के दस्तावेज सामने आए थे। शरीफ पर सबसे बड़ी गाज तब गिरी जब कोई साल भर पहले वहां की सर्वोच्च अदालत ने उन्हें पद पर रहने और चुनाव लड़ने के अयोग्य ठहरा दिया। इस फैसले के चलते शरीफ को प्रधानमंत्री पद छोड़ना पड़ा। फिर, इस साल के शुरू में अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि उन पर लगी पाबंदी ताजिंदगी है, यानी अब वे कभी भी चुनाव नहीं लड़ सकते। शायद इसी फैसले के मद्देनजर उन्होंने अपनी बेटी मरियम को अपना सियासी वारिस बनाया। पर जवाबदेही अदालत ने मरियम को भी सात साल की सजा सुनाई है। मरियम के पति (सेवानिवृत्त कैप्टन) सफदर को भी जांच में सहयोग न करने पर एक साल की सजा हुई है। शरीफ के दो बेटों को अदालत ने भगोड़ा घोषित कर दिया है।

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इस फैसले के बाद मरियम भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगी। यह फैसला ऐसे वक्त आया है जब पाकिस्तान में कुछ ही दिन बाद आम चुनाव होने हैं और विभिन्न पार्टियों का प्रचार अभियान चरम पर है। नवाज शरीफ कई बार मुसीबत से उबरे हैं, चाहे वह सेना द्वारा उनका तख्ता पलट हो, या जेल की सजा और निर्वासन। वे न सिर्फ उन संकटों से बाहर आ गए बल्कि चुनाव भी जीता और तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। लेकिन ऐसा लगता है कि अब वह उस तरह वापसी शायद नहीं कर पाएंगे। यों पाकिस्तान के शहरी मध्यवर्ग और उदारवादी समूहों में शरीफ के प्रति सहानुभूति का भाव है, क्योंकि उन्होंने सेना के दबदबे के खिलाफ आवाज उठाने की हिम्मत दिखाई, और वे भारत से बातचीत की मुखर वकालत करते रहे हैं। ये लोग पूछते हैं कि पाकिस्तान के बहुत सारे नेता भ्रष्ट हैं, अकेले शरीफ को ही क्यों सजा हुई? ऐसे लोग मानते हैं कि शरीफ को फौज से टकराव मोल लेने का खमियाजा भुगतना पड़ रहा है।

जो हो, शरीफ और उनके परिवार को हुई सजा से पाकिस्तान मुसलिम लीग (नवाज) को गहरा धक्का लगा है और बहुतेरे राजनीतिक विश्लेषकों का अनुमान है कि अब आम चुनाव में पीएमएल का जीत पाना असंभव नहीं तो बहुत मुश्किल जरूर हो गया है। इसका कुछ अंदाजा इस तथ्य से भी लगाया जा सकता है कि अदालत का फैसला आने के बाद पीएमएल के कुछ बहुत मजबूत उम्मीदवारों ने, जिनकी जीत तय मानी जा रही थी, पार्टी का चुनाव चिह्न लौटा दिया और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ने का एलान किया। आम अनुमान यह है कि पिछले हफ्ते आए इस फैसले का सबसे ज्यादा राजनीतिक फायदा इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ को मिलेगा। अब पीएमएल (नवाज) की कमान शरीफ के छोटे भाई शाहबाज शरीफ के हाथ में है। लेकिन पार्टी की संभावनाएं कम से कम आसन्न चुनाव में तो जरूर अनिश्चित हो गई हैं।

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