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संपादकीय: सुविधा की भर्ती

अब प्रशासनिक पदों को छोड़ कर सभी विभागों की भर्ती प्रक्रिया एक ही केंद्रीकृत एजंसी कर सकेगी। इस तरह बैंकिंग, रेलवे भर्ती बोर्ड और कर्मचारी चयन आयोग एक में समाहित हो जाएंगे। जाहिर है, इससे न सिर्फ युवाओं की परेशानी कम होगी, बल्कि विभिन्न विभागों का खर्च भी बचेगा।

विभिन्न् पदों पर भर्ती के लिए कई तरह की एजेंसियों की जगह अब राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी काम करेगी।

सरकारी नौकरियों के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर युवाओं को साल भर परेशान होते देखा जाता है। अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग विभाग अपनी जरूरत के हिसाब से रिक्तयां विज्ञापित और फिर उनके लिए चयन प्रक्रिया शुरू करते देखे जाते हैं। ऐसे में युवाओं को हर विभाग और हर रिक्ति के लिए अलग-अलग आवेदन करने और फिर उनकी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भागदौड़ करनी पड़ती है। इस तरह उनका समय और पैसा दोनों काफी बर्बाद होता है।

इसके मद्देनजर केंद्र सरकार ने सभी गैर-तकनीकी पदों के लिए आयोजित होने वाली भर्ती प्रक्रिया को आसान बनाने के मकसद से राष्ट्रीय भर्ती एजंसी गठित करने का फैसला किया है। अभी तक रेलवे, बैंकिंग जैसे विभिन्न सरकारी विभागों की भर्तियों के लिए करीब बीस आयोग काम करते हैं। अब उन्हें राष्ट्रीय भर्ती एजंसी में समाहित कर दिया जाएगा। अगले तीन सालों में यह एजंसी पूरी तरह काम करने लगेगी। इसके तहत सभी जिलों में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे, ताकि युवाओं को इधर-उधर न भटकना पड़े। जाहिर है, इस एजंसी के गठन से युवाओं को नौकरियों के लिए आवेदन करने से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने तक में काफी सहूलियत होगी।

केंद्रीय और राज्य स्तर की प्रशासनिक सेवाओं के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन संघ लोकसेवा आयोग और राज्यों के आयोग करते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों से नीचे के पदों, जैसे सचिवालयों आदि के कर्मियों की भर्तियां कर्मचारी चयन आयोग करता है। पर रेलवे, बैंकिंग आदि क्षेत्रों में भर्ती के अपने बोर्ड हैं।

अब प्रशासनिक पदों को छोड़ कर सभी विभागों की भर्ती प्रक्रिया एक ही केंद्रीकृत एजंसी कर सकेगी। इस तरह बैंकिंग, रेलवे भर्ती बोर्ड और कर्मचारी चयन आयोग एक में समाहित हो जाएंगे। जाहिर है, इससे न सिर्फ युवाओं की परेशानी कम होगी, बल्कि विभिन्न विभागों का खर्च भी बचेगा। लोकसेवा आयोग और राज्यों के आयोगों की प्रतियोगी परीक्षाओं का समय लगभग तय है।

इसी तरह कर्मचारी चयन आयोग की रिक्तियों और परीक्षाओं का समय भी निश्चित है, इसलिए युवा उनके लिए पहले से तैयार रहते हैं। फिर उनमें अनेक पदों के लिए एक ही आवेदन करना पड़ता है, एक ही बार शुल्क जमा करना होता है, इसलिए अलग-अलग फीस भरने और बार-बार परीक्षा की तैयारी करने की झंझट नहीं रहती।

जिन विभागों की भर्तियों के लिए अलग से प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित होती हैं, उनका समय भी तय नहीं होता और वे अपने तरीके से पर्चे तैयार करते हैं, इस तरह अलग-अलग विभागों के अलग-अलग परीक्षा प्रारूप हैं। स्वाभाविक ही, इस तरह युवाओं को हर परीक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयारी करनी पड़ती है। लिहाजा, उन पर साल प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए पढ़ाई करने का दबाव और तनाव बना रहता है।

पहले इंजीनियरिंग, मेडिकल आदि विभिन्न पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए भी इसी तरह युवाओं को अलग-अलग आवेदन करने और भाग-दौड़ कर परीक्षाएं देनी पड़ती थीं। उन्हें केंद्रीकृत किया गया और फिर उनके लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजंसी का गठन किया गया। इससे उन परीक्षाओं में विद्यार्थियों को काफी सहूलियत हो गई।

उसी तरह नई गठित राष्ट्रीय भर्ती एजंसी भी काम करेगी और युवाओं, अभिभावकों, विभिन्न विभागों सभी के लिए सहूलियत हो जाएगी। अभी तक केंद्रीकृत व्यवस्था न होने की वजह से युवाओं, खासकर लड़कियों के साथ उनके अभिभावकों को भी विभिन्न परीक्षा केंद्रों के चक्कर काटने पड़ते थे। विकलांग लड़कियों के लिए अलग तरह की परेशानियां उठानी पड़ती थीं। अब उन सारी झंझटों से मुक्ति का रास्ता खुलेगा।

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