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रोजगार की राह

नई उद्यमिता और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने के मकसद से शुरू किया गया स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम नरेंद्र मोदी सरकार का एक और महत्त्वाकांक्षी कदम है।

Author नई दिल्ली | January 18, 2016 2:16 AM
स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम नरेंद्र मोदी सरकार का एक और महत्त्वाकांक्षी कदम है।

नई उद्यमिता और छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देने के मकसद से शुरू किया गया स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम नरेंद्र मोदी सरकार का एक और महत्त्वाकांक्षी कदम है। इसे मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अगले चरण के रूप में देखा जा सकता है। स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि दक्ष युवा रोजगार की तलाश में भटकने के बजाय रोजगार देने वाले बनें, यही इस कार्यक्रम का मकसद है। इस कार्यक्रम के तहत युवाओं को कई तरह की सहूलियतें दी गई हैं। नए उद्यम शुरू करने के लिए उन्हें न तो लाइसेंस संबंधी पेचीदगियों से जूझना पड़ेगा और न शुरू के तीन साल तक करों का बोझ महसूस करना पड़ेगा। इसके लिए वे जो धन जुटाएंगे, उस पर भी करों में छूट प्राप्त हो सकेगी। इसके अलावा इस कार्यक्रम को बढ़ावा देने के लिए दस हजार करोड़ रुपए का कोष स्थापित किया जाएगा, ताकि युवाओं को मदद पहुंचाने में आसानी हो। नवोन्मेषी उद्यमों में पेटेंट कराने के लिए आवेदन पर अस्सी प्रतिशत तक की छूट प्राप्त होगी। फिर शुरू में पांच लाख स्कूलों को इस कार्यक्रम के तहत जोड़ कर अभिनव प्रयोग करने वाले विद्यार्थियों को प्रत्साहित करने का प्रयास होगा। इस कार्यक्रम से निस्संदेह नए रोजगार के सृजन और तकनीकी रूप से दक्ष उन युवाओं को स्वावलंबी बनाने में मदद मिलेगी, जो अपने दम पर कुछ नया करना चाहते हैं।

नए उद्यम शुरू करने के लिए कर्ज और लाइसेंस आदि हासिल करने में युवाओं को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। फिर उसमें जोखिम भी कई तरह के होते हैं, इसलिए वे इस दिशा में आगे कदम बढ़ाने से हिचकते हैं। सरकार ने सार्वजनिक खरीद में स्टार्टअप उद्यमियों के उत्पाद खरीदने को प्रथमिकता देकर वह जोखिम काफी हद तक कम कर दिया है।
छोटे कारोबार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए कोई व्यावहारिक नीति न होने का ही नतीजा है कि ज्यादातर कुशल और तकनीकी रूप से दक्ष युवा बेहतर अवसर की तलाश में विदेशों का रुख करते हैं। प्रतिभा पलायन रोकना एक चुनौती बनी हुई है। ऐसे में सरकार ने बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और पंजीकरण के लिए व्यावहारिक कानूनी प्रावधान कर युवा प्रतिभा को संबल दिया है। देश में अनेक ऐसे युवा हैं, जिन्होंने अपनी नवोन्मेषी प्रतिभा के बल पर अनेक समस्याओं के आसान समाधान तलाशे हैं, पर उनके अनुसंधान, उपकरणों आदि को न तो व्यावसायिक जगह मिल पाती है और न वे खुद आर्थिक रूप से इतने सक्षम होते हैं कि बाजार की प्रतिस्पर्द्धा में उतरने का जोखिम उठा सकें।

अनेक युवाओं ने ऐसी समस्याओं के समाधान को ध्यान में रख कर घरेलू प्रयास से अत्यंत उपयोगी उपकरण बना रखे हैं, जिनकी तरफ बड़े उद्यामियों का ध्यान प्राय: नहीं जा पाता। स्टार्टअप इंडिया कार्यक्रम से ऐसे युवाओं को न सिर्फ अपने पैरों पर खड़े होने और अपने अनुसंधान को व्यावसायिक रूप दे पाने में मदद मिलेगी, बल्कि दूसरे युवा भी उनसे प्रेरणा प्राप्त कर सकेंगे। प्रतिभा पलायन में भी कुछ कमी आने की उम्मीद बनेगी। कारोबारी दृष्टि से भारत एक बड़ा बाजार है, यहां छोटे उद्यमियों के लिए काफी संभावनाएं हैं। लघु उद्योगों में ही सबसे अधिक रोजगार की गुंजाइश भी रहती है। मगर अब तक सरकारें चूंकि बड़े उद्यमियों को अधिक प्रोत्साहित करती रही हैं, छोटे और मंझोले उद्योग लगातार कमजोर होते गए हैं। अगर स्टार्टअप इंडिया के क्रियान्वन पर गंभीरता से ध्यान दिया गया तो रोजगार की दिशा में बेहतरी की उम्मीद है।

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