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बेतुका विवाद

अगर आम आदमी पार्टी का मकसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घेरना ही है तो वे सूखे और पाठ्यपुस्तकों से हो रहे खिलवाड़ जैसे ज्यादा गंभीर मुद्दे उठा सकते थे।
Author नई दिल्ली | May 11, 2016 02:19 am
सोमवार (9 मई) को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के पीएम मोदी की डिग्री सार्वजनिक की थी।

हमारी राजनीति की सबसे बड़ी खामी शायद यही है कि इसमें दिनोंदिन गंभीर मसलों का लोप होता जा रहा है। इसी का दूसरा पहलू यह है कि जब-तब गैर-जरूरी मुद्दों को तूल दिया जाता है। इसका ताजा उदाहरण प्रधानमंत्री की डिग्री को लेकर खड़ा किया गया विवाद है। इसका शुरुआती छोर कहीं भी रहा हो, पर इसे हवा दी आम आदमी पार्टी और इसके संयोजक अरविंद केजरीवाल ने। उन्होंने खुलेआम प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यता पर सवाल उठाए, कहा कि उनकी डिग्री के बारे में स्थिति साफ की जानी चाहिए। इसके लिए उन्होंने सूचना आयोग का भी दरवाजा खटखटाया। आयोग ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया यानी कहा कि प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यता के बारे में जानकारी मुहैया कराई जाए। आरोप या मांग को बार-बार दोहराए जाने से पैदा हुए शक का निवारण जरूरी था। कुछ दिन पहले गुजरात विश्वविद्यालय ने एक बयान जारी कर बताया कि प्रधानमंत्री यानी नरेंद्र दामोदरदास मोदी ने उसके यहां से राजनीति शास्त्र में एमए किया था। यह बयान आते ही केजरीवाल ने कहा था कि स्थिति स्पष्ट कर दी गई है, लिहाजा अब विवाद को यहीं समाप्त मान लिया जाना चाहिए।

मगर फिर आम आदमी पार्टी के नेताओं ने प्रधानमंत्री की बीए की डिग्री को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए, कहा कि मोदी ने एमए किया था तो बीए भी कहीं से किया होगा, उसके प्रमाणपत्र कहां हैं! आखिरकार भाजपा की तरफ से पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने मोर्चा संभाला और संवाददाता सम्मेलन बुला कर प्रधानमंत्री की एमए तथा बीए की डिग्रियां व अंकपत्र दिखाए। सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों के मुताबिक मोदी ने बीए दिल्ली विश्वविद्यालय से किया था। पर इतने से आप नेताओं को संतोष नहीं है। बाद में नाम में कुछ बदलाव हो जाने या अंकपत्र और डिग्री में वर्ष का फर्क बता कर वे अब भी इस चर्चा को गरमाए रखना चाहते हैं। अगर उनका मकसद प्रधानमंत्री को घेरना ही है तो वे सूखे और पाठ्यपुस्तकों से हो रहे खिलवाड़ जैसे ज्यादा गंभीर मुद्दे उठा सकते थे।

यह अफसोस की बात है कि राजनीति की दिशा बदलने के घोषित उद्देश्य के साथ वजूद में आई पार्टी जन-सरोकार वाले मसलों को लेकर माहौल गरमाने के बजाय निजी हमलों में कहीं ज्यादा मुब्तिला है। केजरीवाल और नीतीश कुमार अमूमन एक दूसरे के बारे में अच्छी राय रखते हैं। पर नीतीश कुमार ने भी प्रधानमंत्री की डिग्री को लेकर उठाए गए सवाल को ‘नॉन-इश्यू’ करार दिया है। अलबत्ता उन्होंने केजरीवाल को माफी मांगने के लिए कहने के भाजपा के बयान का मखौल उड़ाते हुए कहा कि भाजपा को पहले मोदी के ‘डीएनए’ वाले बयान के लिए बिहार के लोगों से माफी मांगनी चाहिए। यह दिलचस्प है कि इस मामले को सबसे ज्यादा गंभीरता से खुद भाजपा ने लिया और उसके दो वरिष्ठ नेताओं ने मोदी का बचाव करने के लिए संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर डाला। यह प्रधानमंत्री के बचाव में बेकार की कवायद थी। इस तरह दिल्ली विश्वविद्यालय के स्पष्टीकरण के बाद जो विवाद अपने आप शांत हो जाता, अब भी कायम है। सार्वजनिक जीवन में डिग्री मायने नहीं रखती। दरअसल, राजनीति में जो बात सबसे अधिक मूल्य रखती है वह है विश्वसनीयता तथा जनता पर प्रभाव। इसलिए प्रधानमंत्री की डिग्री को लेकर रोज-रोज क्यों चर्चा होती रहे?

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  1. J
    Jasbir Chawla
    May 13, 2016 at 7:26 am
    केजरीवाल या आप पार्टी द्वारा प्रधानमंत्री श्री मोदीजी की डिग्री पर सवाल देश के अहम मसलों के मुताबिक़ छोटा हो सकता है पर डिग्री पर विवाद अन्य आरटीआई एक्टिविस्ट द्वारा पूछे गये प्रश्नों से उठे हैं जिन्हें केजरीवाल ने पूरी शिद्दत से उठाया है.डिग्री विवाद से स्वयं मोदीजी और प्रधानमंत्री पद की साख दाँव पर लगी है.मोदीजी ने शपथपत्र देकर अपनें को एमए बतलाया है.अभी तक जो भी आधे-अधूरे वेज विवि द्वारा दिये गले हैं उनसे शंकाओं का समाधान नहीं होता.मोदीजी स्वयं स्थिति स्पष्ट करें.राजा संशय से परे हो.
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    1. A
      Arvind
      May 12, 2016 at 8:05 am
      बिलकुल ी कहा, राजनीती में जो मूल्य रखती है वो है विश्वसनीयता और जनता पर प्रभाव. केजरीवाल अपनी विश्वसनीयता और प्रभाव, दोनों खोता जा रहा है अपनी ऊल जलूल हरकतों से. जितना राजनीती का स्तर आप के केजरी और इसके मंत्री लोगो ने गिराया है , वो सबके सामने है.
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      1. J
        jai prakash
        May 11, 2016 at 11:32 am
        केजरीवाल ने डेल्ही की जनता से इतने बादे कर दिए थे अब उनकी बजह से इसको जुठ बोलकर जनता को गुमराह करता रहता हे
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        1. कैलाश
          May 11, 2016 at 4:27 am
          सुना हे कि केजरीवाल जी इस बात की भी जाच करवा रहे हे, कि लंका जाने के लिए जो रामसेतु का निर्माण करने वाले नल और नील के पास इंजीनियर कि डिग्री थी या नहीं
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          1. M
            mithanlal
            May 11, 2016 at 6:28 am
            केजरीवालजी अब मोदी के बर्थ सर्टिफिकेट एवं स्कूल की मार्कशीट की जाँच की मांग करेंगे
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            1. Rajendra Baid
              May 14, 2016 at 4:26 pm
              केजरीवाल जी आप ब्यक्तिगत राजनीती छोड़ कर दलगत राजनीती कीजिये / आप एक पढ़े लिखें ब्यक्ति की तरह बयहर करें / देश में बहुत सरे मुद्दे गलत हो रहे है / आपने जनता से सुशासन का वादा किया था , लेकिन आप एक घटिया किस्म के अनपढ़ राजनीतिज्ञ की तरह ब्यहार कर रहे है / प्रधान मंत्री की डिग्री में नहीं उनके काम में खामिया निकाल कर उन्हें जनता के सामने खड़ा करे / ताकि आपकी वह वही हो और जनता आपको सुशासन का तरफदार समझे / झगड़ालू औरतो की तरह का बयहर आपको शोभा नहीं देता है /
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