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संपादकीयः नशे का जाल

अच्छी बात है कि नारकोटिक्स विभाग फिल्मी दुनिया में मादक पदार्थों के तार तलाशने में जुटा है, पर इस मामले में तब तक उसकी कामयाबी नहीं मानी जाएगी, जब तक कि वह असली खिलाड़ियों पर चंगुल कसना न शुरू करे।

अच्छी बात है कि नारकोटिक्स विभाग फिल्मी दुनिया में मादक पदार्थों के तार तलाशने में जुटा है।

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की रहस्यमय मौत के मामले में शुरू हुई छानबीन फिल्मी दुनिया में फैले नशे के जाल तक पहुंची तो कई चौंकाने वाले खुलासे आने शुरू हो गए। पहले सुशांत की मित्र रिया चक्रवर्ती और उसके भाई समेत करीब दस लोगों को नशे के कारोबार में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। अब अलग-अलग बयानों और फोन संदेशों के जरिए हुई बातचीत के आधार पर नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने कुछ और फिल्म अभिनेत्रियों को तलब किया है। यह तो पहले से कहा-सुना जाता था कि फिल्मी दुनिया के बहुत सारे सितारे और तारिकाएं नशे की लत का शिकार हैं, पर अब एनसीबी की जांच में उनसे जुड़े तथ्य भी सामने आने लगे हैं। प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के कारोबार को रोकना सरकारों के लिए बड़ी चुनौती है। इसके चलते बहुत सारे युवाओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है, तो अनेक युवा असमय मौत के शिकार हो जाते हैं। नामचीन फिल्मी सितारों और तारिकाओं का इस जाल में फंसे होना गंभीर चिंता का विषय है। अब नारकोटिक्स ब्यूरो जिस गंभीरता से इस नशे के संजाल को जानने-समझने का प्रयास कर रहा है उससे उम्मीद बनी है कि इस कारोबार को नेस्त-नाबूद करने में कुछ मदद मिलेगी।

कुछ जगहों पर प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के कारोबार के तथ्य लगभग उजागर हैं। पंजाब में जब इस कारोबार ने व्यापक स्तर पर अपनी पहुंच बना ली और बड़े पैमाने पर युवा इसकी गिरफ्त में आने लगे, तो राज्य सरकार ने इसके कारोबार को रोकने का गंभीरता से प्रयास शुरू किया। मगर इस मामले में वहां अब तक पूरी तरह कामयाबी नहीं मिल पाई है। इसी तरह हिमाचल प्रदेश के कुछ इलाकों में ऐसे पदार्थों के उत्पादन और बिक्री के तथ्य उजागर हैं। वहां का प्रशासन इस पर कड़ी नजर रखता है, पर इस कारोबार को पूरी तरह रोक पाने में कामयाबी नहीं मिल पाई है। दिल्ली के आसपास के इलाकों में रेव पार्टियों के खुलासे भी समय-समय पर होते रहते हैं, जिन पर छापे मार कर पुलिस मादक पदार्थों और उनका सेवन और बिक्री करने वालों पर नकेल कसने का प्रयास करती रही है। मुंबई की फिल्मी दुनिया में भी मादक पदार्थों का चलन लगभग जाना-पहचाना तथ्य है। मगर हैरानी की बात है कि इस संजाल को तोड़ पाना अब तक संभव नहीं हो पाया है। मादक पदार्थों की तस्करी, खरीद-बिक्री पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी नारकोटिक्स ब्यूरो पर है, जो इस मामले में अब तक विफल ही साबित हुआ है।

अच्छी बात है कि नारकोटिक्स विभाग फिल्मी दुनिया में मादक पदार्थों के तार तलाशने में जुटा है, पर इस मामले में तब तक उसकी कामयाबी नहीं मानी जाएगी, जब तक कि वह असली खिलाड़ियों पर चंगुल कसना न शुरू करे। अक्सर देखा गया है कि मादक पदार्थों के मामले में छोटी मछलियों को पकड़ कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान ली जाती है। जबकि मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री का तंत्र बहुत जटिल है और इसका कारोबार बहुत संगठित रूप से चलाया जाता है। इसके तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हैं और कई प्रभावशाली लोग भी इसमें शामिल माने जाते हैं। इसलिए कई बार नारकोटिक्स विभाग के लिए असल खिलाड़ियों पर हाथ डालना मुश्किल होता है। मुंबई फिल्मी दुनिया के जिन लोगों को तलब किया गया है, उन पर आरोप है कि वे मादक पदार्थों का सेवन करते हैं। मगर असल समस्या उन लोगों को पकड़ने की है, जो इस कारोबार का संचालन करते हैं। जब तक उन्हें नहीं पकड़ा जाता, इस समस्या की जड़ पर प्रहार नहीं हो पाएगा।

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