देश में नशीले पदार्थों का बढ़ता काला कारोबार एक गंभीर समस्या बन गया है। शहरों से लेकर गांवों तक इसका जाल तेजी से फैल रहा है। विदेश से भी बड़े पैमाने पर जमीन और समुद्र के रास्ते नशीले पदार्थों की तस्करी का सिलसिला बदस्तूर जारी है। हाल ही में तटरक्षक बल और गुजरात आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने संयुक्त अभियान में मुंद्रा तट पर एक जहाज से करीब 1,150 करोड़ रुपए का नशीला पदार्थ जब्त किया है। सवाल है कि गुजरात नशीले पदार्थ का पारगमन केंद्र क्यों बनता जा रहा है?
राज्य में पिछले कुछ वर्षों से सुरक्षा बल इस तरह की गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रहे हैं। इसके बावजूद अगर समुद्री मार्ग से नशीले पदार्थों की तस्करी पर लगाम नहीं लग पा रही है, तो इसकी क्या वजह हो सकती है। सुरक्षा एजंसियां आखिर उन लोगों तक क्यों नहीं पहुंच पाती हैं, जो इतने बड़े पैमाने पर समुद्री मार्ग से नशीले पदार्थों की तस्करी करते हैं और उसे देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाते हैं।
गौरतलब है कि गुजरात के मुंद्रा तट पर यह पहली बार नहीं है, जब समुद्र के रास्ते लाई गई नशीले पदार्थों की बड़ी खेप पकड़ी गई है। वर्ष 2021 में तो इक्कीस हजार करोड़ रुपए के तीन हजार किलो नशीले पदार्थ यहां जब्त किए गए थे। उस समय यह सबसे बड़ी बरामदगी बताई गई थी। उसके बाद ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इतनी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थों की खेप मंगाता कौन है? इसकी व्यापक रूप से जांच किए जाने की जरूरत है, ताकि दोषियों को न्याय के कठघरे में लाया जा सके।
गुजरात के लिए सबसे बड़ी चुनौती उसकी लंबी तटरेखा है और बड़ी संख्या में पंजीकृत छोटे जहाजों और नावों की निगरानी करने के लिए माकूल व्यवस्था का होना बेहद जरूरी है। व्यापार और सुरक्षा के लिहाज से यह तटरेखा संवेदनशील है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि उन संगठित गिरोहों पर शिकंजा कसा जाए, जो विदेश से तस्करी के जरिए देश में नशे का जाल फैला रहे हैं।
