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संपादकीय: संकट में राहत

बैंकों का कारोबार पहले से ही धीमा है, लोगों के वाहन, आवास आदि के लिए कर्ज लेने की गति मंद हुई है, बाजार में मंदी के चलते पूंजी का प्रवाह बाधित है, ऐसे में किस्तों के भुगतान में ढील देने से उन पर बोझ और बढ़ेगा। इसलिए रिजर्व बैंक ने लघु बचत योजनाओं में किए गए निवेश पर ब्याज दरों में कटौती की है। अब तीन साल तक की मियादी जमा राशि पर ब्याज 5.5 की दर से मिलेगा, जो पहले 6.9 फीसद था। इसी तरह लोक भविष्य निधि यानी पीपीएफ, राष्ट्रीय बचत पत्र पर ब्याज दरों में क्रमश: 0.8 और 1.1 फीसद की कटौती की गई है।

Author Published on: April 2, 2020 2:38 AM
(फाइल फोटो)

इस वक्त जिस तरह पूरी दुनिया कोरोना विषाणु से फैली महामारी के चलते बंदी और मंदी के दौर से गुजर रही है, रोजगार और कारोबार पर संकट गहरा गया है, उसमें लोगों को वित्तीय राहत देने की कोशिशें भी तेजी से हो रही हैं। भारतीय रिजर्व बैंक का आवास, वाहन, खेती-किसानी आदि के लिए लिए गए मियादी कर्ज की किस्त वसूली अगले तीन महीनों तक रोक देने या उसमें ढील देने संबंधी आदेश भी इसी की एक कड़ी है। रिजर्व बैंक के आदेश का पालन करते हुए तमाम सरकारी बैंकों ने अपने ग्राहकों को यह सुविधा देने की घोषणा भी कर दी है। जो लोग इस दौरान अपने कर्ज की किस्तें नहीं चुका पाएंगे, उन पर सख्ती नहीं की जाएगी। पूर्ण बंदी के चलते तमाम कल-कारखाने बंद कर दिए गए हैं, बाजार में कारोबार ठप्प हैं, दूसरे देशों से वाणिज्य और व्यवसाय संबंधी गतिविधियां रुक गई हैं, होटल, पर्यटन आदि उद्योग बंद हैं। ऐसे में तमाम लोगों के रोजगार पर बुरा असर पड़ा है।

हालांकि सरकारों ने अपील की है कि कंपनियां अपने कर्मचारियों का वेतन न काटें, पर हकीकत यही है कि धंधे में घाटा होने की स्थिति में अनेक उद्यमियों के सामने अपने कर्मचारियों का वेतन समय पर देने और पूरा भुगतान करने में बाधा खड़ी होगी। ऐसे में बहुत सारे लोगों के लिए अपने कर्ज पर मासिक किस्तें चुकाने में परेशानी पैदा होगी। इस दृष्टि से बैंकों का यह कदम निस्संदेह उनके लिए राहत भरा साबित होगा।

मगर बैंकों का कारोबार पहले से ही धीमा है, लोगों के वाहन, आवास आदि के लिए कर्ज लेने की गति मंद हुई है, बाजार में मंदी के चलते पूंजी का प्रवाह बाधित है, ऐसे में किस्तों के भुगतान में ढील देने से उन पर बोझ और बढ़ेगा। इसलिए रिजर्व बैंक ने लघु बचत योजनाओं में किए गए निवेश पर ब्याज दरों में कटौती की है। अब तीन साल तक की मियादी जमा राशि पर ब्याज 5.5 की दर से मिलेगा, जो पहले 6.9 फीसद था। इसी तरह लोक भविष्य निधि यानी पीपीएफ, राष्ट्रीय बचत पत्र पर ब्याज दरों में क्रमश: 0.8 और 1.1 फीसद की कटौती की गई है। इस कटौती से बैंकों को जो बचत होगी, वह किस्तें जमा करने के मामले में ढील देने से हुए नुकसान की कुछ भरपाई हो सकेगी।

हालांकि जिन लोगों ने अपने भविष्य की वित्तीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लघु बचत योजनाओं में निवेश किया था, उन्हें थोड़ी निराशा हाथ लगेगी। पर यह फैसला केवल अगले तीन महीनों के लिए लागू होगा, इसलिए अगली तिमाही में अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने की दशा में इस फैसले के पलटने की उम्मीद बनी हुई है।

रिजर्व बैंक का यह फैसला सख्त नहीं कहा जा सकता। पहले भी जब-जब देश मंदी के दौर से गुजरा है, तब इस तरह की कटौतियां करनी पड़ी हैं। इसे अगर इस तरह देखें कि कुछ मामलों में ब्याज दरें कम हुई हैं, तो कर्जों की किस्तें चुकाने के मामले में दी जा रही ढील के जरिए बड़ी राहत पहुंचाने की भी कोशिश की गई है। अभी देश एक तरफ महामारी से पार पाने का प्रयास कर रहा है, तो दूसरी तरफ आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। पूरी दुनिया में भयंकर मंदी का दौर आने वाला है, जिसमें सारी चीजें प्रभावित होने वाली हैं। बैंकों की वित्तीय स्थिति ठीक रखना भी बड़ी चुनौती है। इसलिए ब्याज दरों में ताजा कटौती कोई बड़ी मार नहीं कही जा सकती।

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