महाराजा की घरवापसी

एयर इंडिया का सौ फीसद स्वामित्व हासिल कर स्वाभाविक ही टाटा समूह उत्साहित है।

Air India
68 साल बाद टाटा को फिर से एयर इंडिया मिल गई है। (फोटो सोर्स- फाइल फोटो)

एयर इंडिया का सौ फीसद स्वामित्व हासिल कर स्वाभाविक ही टाटा समूह उत्साहित है। करीब नब्बे साल पहले टाटा समूह ने ही एयर इंडिया का परिचालन शुरू किया था, पर बाद में निजी विमानन कंपनियों का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया, जिससे इस कंपनी का स्वामित्व छिन गया। एयर इंडिया की साख दुनिया भर में रही है। उसका पहचान चिह्न महाराजा विमानन सेवा का प्रतीक बन गया था। मगर करीब सोलह-सत्रह साल पहले यह कंपनी विपन्न होने लगी। इस पर कर्ज का बोझ बढ़ना शुरू हो गया।

हालांकि इसे उबारने के लिए सरकारों ने कई प्रयास किए, मगर कर्ज का बोझ कम न हो सका। पहले घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए दो कंपनियां हुआ करती थीं- इंडियन एयरलाइंस और एयर इंडिया। कर्ज के बोझ से बचने के लिए चौदह साल पहले सरकार ने दोनों का विलय कर दिया था। तब से एक ही कंपनी चल रही थी- एयर इंडिया। फिर भी एयर इंडिया की सेहत में सुधार नहीं हुआ। कई बार लगा कि अब इसकी सेवाएं बंद हो जाएंगी। तब सरकार ने इसे भारी राहत पैकेज दिए। अब तक इसमें करीब तीस हजार करोड़ की इक्विटी डाली जा चुकी है। मगर स्थिति में सुधार नहीं हुआ और इस कंपनी का कर्ज बढ़ कर साढ़े इकसठ करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच गया। अंतत: सरकार ने इसे बेचने का फैसला किया।

एयर इंडिया के लिए सबसे अधिक बोली लगा कर आखिरकार टाटा समूह ने फिर से इसे हासिल कर लिया है। इस उपलब्धि पर स्वाभाविक ही टाटा समूह के प्रमुख रतन टाटा कुछ भावुक भी नजर आए। दरअसल, इस कंपनी के राष्ट्रीयकरण के बाद भी टाटा समूह का भावनात्मक लगाव इससे बना हुआ था। अब इसे पाकर न सिर्फ उसे भावनात्मक तोष मिला है, बल्कि टाटा समूह ने संकल्प दोहराया है कि वह फिर से इसकी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा लौटाएगा। टाटा समूह पहले से दो विमान सेवाएं चला रहा है- विस्तारा और एयर एशिया। दोनों का परिचालन सराहनीय है।

एयर इंडिया का स्वामित्व मिल जाने के बाद अब टाटा समूह घरेलू विमान सेवा क्षेत्र में सत्ताईस फीसद हिस्सेदारी के साथ दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी। अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर वह सबसे बड़ी कंपनी होगी। टाटा समूह ने पहले ही एयर इंडिया के परिचालन का खाका तैयार कर रखा है। वह अपनी पहले से चल रही दोनों विमान सेवाओं को एयर इंडिया के साथ विलय करके नए ढंग से इसका परिचालन करेगी।

हालांकि एयर इंडिया को बेहतर स्थिति में लाना आसान काम नहीं है, क्योंकि लंबे समय से इसके परिचालन का ढांचा चरमराया हुआ है। न तो इसके पास अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला सूचना और परिचालन तंत्र है और न रखरखाव के मामले में संतोषजनक व्यवस्था है। मगर टाटा के लिए बड़ी उपलब्धि की बात यह है कि एयर इंडिया के पास सबसे अधिक उड़ान अवधि की मंजूरी है। उसका लाभ वह अपने पहले से चल रही दो सेवाओं को जोड़ कर उठाएगी और इस तरह एयर इंडिया की स्थिति को सुधारने में उसे अधिक समय नहीं लगेगा। एयर इंडिया का स्वामित्व हासिल करने के बाद टाटा समूह ने जिस तरह इसके परिचालन का खाका पेश किया है, उससे एक बार फिर स्पष्ट हो गया है कि न सिर्फ हवाई सेवाओं, बल्कि इस तरह की दूसरी सेवाओं का संचालन-परिचालन भी सरकार उस तरह नहीं कर सकती, जैसे टाटा जैसी निजी कंपनी कर सकती है। इस तरह यह सौदा सरकार के लिए भी मुनाफे का ही रहा।

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