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संपादकीयः भ्रष्टाचार के खिलाफ

नए भ्रष्टाचार निरोधक कानून को और सख्त बनाने की दिशा में सरकार ने जो कदम उठाए हैं, उससे उम्मीद की जानी चाहिए कि भ्रष्टाचारियों पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी।

नए भ्रष्टाचार निरोधक कानून को और सख्त बनाने की दिशा में सरकार ने जो कदम उठाए हैं, उससे उम्मीद की जानी चाहिए कि भ्रष्टाचारियों पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी। इस कानून को सख्त बनाना इसलिए भी जरूरी हो गया था कि भ्रष्टाचार को अंजाम देने वाले लोग नए विकल्प और रास्ते खोज लेते हैं और कमजोर कानून का फायदा उठाते हैं। इससे यह समस्या और गंभीर होती जा रही है। ऐसा नहीं है कि घूस के एवज में सिर्फ रुपयों की ही मांग की जाती हो। किसी काम को गैरकानूनी रूप से कराने के बदले तमाम तरह के अनुचित लाभ लेना और देना भी भ्रष्टाचार का बड़ा जरिया बना हुआ है। भ्रष्टाचार निरोधक (संशोधन) अधिनियम 2018 में साफ कहा गया है कि यौन तुष्टि की मांग करने और स्वीकार करने को भी अब घूस लेना माना जाएगा। इस नए प्रवाधान के तहत अगर कोई कर्मचारी या अधिकारी इस मामले में दोषी पाया जाता है तो उसे सात साल तक की कैद की सजा हो सकती है। ऐसे अनेक मामले सामने आते रहे हैं जिनमें बतौर रिश्वत यौन तुष्टि की मांग की गई थी। लेकिन कानून में कोई प्रावधान नहीं होने की वजह से ऐसा करने वाले बेहिचक ऐसे अपराध को अंजाम देते रहे और आरोपियों का कुछ नहीं बिगड़ता था।

दरअसल, भ्रष्टाचार निरोधक कानून में पहले दिक्कत यह थी कि इसमें ‘अनुचित’ लाभ या वित्तीय लाभ की परिभाषा स्पष्ट नहीं थी। लेकिन फरवरी 2015 में विधि आयोग ने इस बारे में अपना सुझाव देते हुए ‘अनुचित’ लाभ की जो व्याख्या की, उससे भ्रष्टाचारियों पर शिकंजा और कसा है। संशोधित भ्रष्टाचार निरोधक कानून इसी साल जुलाई में अपने नए और सख्त रूप में अमल में आया है। इसमें अनुचित लाभ लेने और देने को भी घूस के दायरे में लाया गया है। ऐसी ढेरों शिकायतें आती रही हैं कि घूस के बदले अधिकारी और कर्मचारी रुपयों के बजाय दूसरे लाभ की मांग करते हैं। इनमें यौन तुष्टि की मांग के अलावा विदेश यात्रा का बंदोबस्त, हवाई टिकट और होटलों का इंतजाम, महंगे उपहारों की मांग के अलावा किसी तीसरे पक्ष के जरिए चल-अचल संपत्ति खरीदने में नगदी का भुगतान, महंगे क्लब की सदस्यता हासिल करना, अपने परिवार के किसी सदस्य, रिश्तेदार या दोस्त के लिए या फिर इनकी आड़ में कुछ लाभ प्राप्त करना भी है। नए कानून में यह सब अब भ्रष्टाचार के दायरे में है। अब जो नया कानून है उसके तहत अगर कोई भी अधिकारी या कर्मचारी ऐसे अनुचित लाभों को हासिल करने का दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

भारत में भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या बना हुआ है। आज जनता के बीच आम धारणा यही है कि सरकारी महकमों में कोई भी काम बिना पैसे नहीं होता, चाहे काम छोटा हो या बड़ा। यह सर्वविदित है कि आम लोगों के लिए सरकारी दफ्तरों में जायज काम कराना भी आसान नहीं है। इतना ही नहीं, नौकरी, इंटरव्यू, स्कूल-कॉलेजों में दाखिले, अस्पताल में इलाज, गरीबों के लिए चलने वाली योजनाएं तक भ्रष्टाचार की मार से त्रस्त हैं। न्याय के ठिकाने थानों और अदालतों तक से भ्रष्टाचार की खबरें आती रहती हैं। आज जिस तेजी से इस तरह के मामले बढ़े हैं, उनसे निपटने में तीन दशक पुराना भ्रष्टाचार निरोधक कानून बेअसर साबित हो रहा था। संशोधित कानून में मुख्य बात यह भी है कि अब घूस लेने वाले ही नहीं, बल्कि देने वाले को भी इसकी जद में लाया गया है। सख्त कानून वक्त की जरूरत है। लेकिन इससे ज्यादा जरूरी है उस पर कारगर तरीके से अमल करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति, जो कि ज्यादातर मामलों में देखने में नहीं आती है।

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