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संपादकीय: फिर बढ़ता खतरा

गुरुवार की खबर के मुताबिक पिछले चौबीस घंटों में कोरोना संक्रमितों की तादाद आठ हजार पांच सौ तिरानबे पहुंच गई और पचासी लोगों की जान चली गई। संक्रमितों की यह संख्या अब तक एक दिन में सबसे ज्यादा है। गनीमत है कि इलाज के स्तर पर बरती जाने वाली सावधानी की वजह से कई मरीजों की जान बचाई जा सकी।

अस्‍पताल में कोविड-19 के मरीजों की जांच करते स्‍वास्‍थ्‍यकर्मी। फाइल फोटो।

कोरोना के संक्रमण को रोकने के लिए लागू पूर्णबंदी, जांच, संक्रमितों की पहचान, इलाज और दूसरे सहायक उपायों की बदौलत हालात में तेजी से सुधार आ रहा था। लेकिन दूसरी ओर अर्थव्यवस्था की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही थी, बढ़ती बेरोजगारी की वजह से लोगों की माली हालत बिगड़ रही थी। इसके मद्देनजर सरकार कई स्तरों पर समांतर उपाय करने में लगी थी।

जब संक्रमण की स्थिति नियंत्रण में दिखने लगी, तब पूर्णबंदी में चरणबद्ध तरीके से राहत दी गई, मगर साथ ही कोरोना से बचाव के दिशा-निर्देशों का ध्यान रखने की सलाह दी गई। विडंबना है कि बहुत सारे लोगों ने सख्ती में राहत की अहमियत नहीं समझी और लापरवाही बरतने लगे। यही वजह है कि आज एक बार फिर दिल्ली में कोरोना के संक्रमण की रफ्तार में काफी तेजी आ चुकी है।

गुरुवार की खबर के मुताबिक पिछले चौबीस घंटों में कोरोना संक्रमितों की तादाद आठ हजार पांच सौ तिरानबे पहुंच गई और पचासी लोगों की जान चली गई। संक्रमितों की यह संख्या अब तक एक दिन में सबसे ज्यादा है। गनीमत है कि इलाज के स्तर पर बरती जाने वाली सावधानी की वजह से कई मरीजों की जान बचाई जा सकी।

जाहिर है, संक्रमण के ताजा आंकड़े राजधानी की स्थिति के लगातार बिगड़ते जाने के ही संकेत देते हैं। सवाल है कि शुरुआती दौर में संकट पर काबू पाने में अपनी भूमिका निभाने के बाद दिल्लीवासियों के बीच परसती लापरवाही की क्या वजह हैं! आखिर लोग क्यों अपनी ही सेहत और जान की परवाह करने में कोताही बरतने लगे हैं? सही है कि रोजमर्रा की जिंदगी को चलाने के लिए आर्थिक गतिविधियां भी सामान्य होना जरूरी है।

लेकिन क्या यह भी जरूरी नहीं है कि इसके साथ-साथ लोग सामान्य सावधानियां बरतें और रोजगार या जीविकोपार्जन करते हुए बचाव के उपायों का पूरी तरह खयाल रखें? यह किसी से छिपा नहीं है कि अभी तक कोविड-19 के इलाज के लिए कोई कारगर दवा या टीके का ईजाद नहीं हो सका है।

फिलहाल उससे बचाव के लिए सार्वजनिक जगहों पर मास्क लगाने और बार-बार हाथ धोना ही मुख्य उपाय है। लेकिन इतनी मामूली और साधारण बातों को लेकर भी लोग लापरवाही बरतते हैं। बहुत सारे लोग घर से बाहर निकलने पर मास्क पहनना जरूरी नहीं समझते या फिर गलत तरीके से पहनते हैं।

जबकि मास्क पहनने में मामूली चूक भी वायरस के नाक या मुंह के जरिए शरीर में प्रवेश का कारण बन सकती है।
यह बेवजह नहीं है कि अकेले दिल्ली में कोरोना संक्रमितों की संख्या लगभग चार लाख साठ हजार तक पहुंच चुकी है और यह सबको चिंता में डालने के लिए काफी है।

हालांकि इसके समांतर यह भी सच है कि चार लाख दस हजार से ज्यादा मरीज ठीक भी हो चुके हैं। कहा जा सकता है कि संक्रमितों के ठीक होने की दर भी संतोषजनक है। लेकिन क्या बीमारी की जद में आने से ज्यादा बेहतर यह नहीं है कि उससे बचा जाए? इससे संक्रमित हो जाने के बाद के खतरे से सभी वाकिफ हैं कि अगर समय रहते एकांतवास, कुछ निर्धारित दवाइयां और दिशा-निर्देशों का ध्यान नहीं रखा जाए तो मरीज की जान भी जा सकती है।

बढ़ते संक्रमण के मुद्दे पर दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी की सरकार को फटकार भी लगाई है। इसके मद्देनजर दिल्ली सरकार ने दीपावली और छठ पर्व को नियंत्रित तरीके से मनाने की बात कही है। लेकिन अंतिम तौर पर अपनी ओर से बरती जाने वाली सावधानी और बचाव के लिए जरूरी दिशानिर्देशों का पालन ही लोगों को इस महामारी की मार से बचाएगा।

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