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संपादकीय: खतरे की घंटी

13 से 15 मार्च तक तबलीगी मरकज में करीब आठ हजार लोग जुटे थे। इनमें से बड़ी संख्या में विदेशी और भारत के सभी प्रांतों से आए लोग थे। पुलिस ने पिछले तीन दिन में मरकज में जमा अठारह सौ से ज्यादा लोगों को पकड़ा है, जिनमें दो सौ इक्यासी विदेशी नागरिक शामिल हैं। यह भी सामने आया है कि आयोजन के बाद लौटे कई लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी और इलाज के दौरान कुछ की मौत भी हो गई।

Author Published on: April 1, 2020 3:07 AM
Coronavirus in India LIVE updates: तबलीगी जमात में शामिल लोग। (PTI Photo)

कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए जब देश में पूर्ण बंदी है और हर राज्य सख्ती से इसे लागू करवा रहा है, ऐसे में राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में तबलीगी जमात के मरकज (केंद्र) से बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमित मरीजों और संदिग्धों का मिलना गंभीर मामला है। सबसे चिंताजनक तो यह है कि यहां से चौबीस लोग कोरोना संक्रमित और साढ़े तीन सौ लोग कोरोना संदिग्ध मिले हैं, जिन्हें अलग-अलग अस्पतालों में भेजा गया है और जांच करवाई गई है।

दिल्ली में दो दिन में एक ही जगह से इतनी बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमितों के मिलने का यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। मरकज में जिस तादाद में लोग जमा थे, उसे देखते हुए यह संख्या तेजी से बढ़ने की आशंका है। यह घटना बता रही है कि पूर्ण बंदी को धता बताते हुए धार्मिक समुदाय के आयोजन कैसे महामारी फैलाने का बड़ा कारण बन रहे हैं और लोगों की जान जोखिम में डाल रहे हैं। सवाल है कि राजधानी में इतनी सतर्कता और सुरक्षा के बावजूद मरकज में हजारों लोग कैसे जमा होते रहे और पुलिस को भनक तक नहीं लगी! जबकि पिछले एक हफ्ते से पूर्ण बंदी लागू है, लेकिन निजामुद्दीन के मरकज में सब कुछ गुपचुप तरीके से चलता रहा और इस जमावड़े ने कोरोना के खतरे को कई गुना बढ़ा दिया।

बताया जा रहा है कि 13 से 15 मार्च तक तबलीगी मरकज में करीब आठ हजार लोग जुटे थे। इनमें से बड़ी संख्या में विदेशी और भारत के सभी प्रांतों से आए लोग थे। पुलिस ने पिछले तीन दिन में मरकज में जमा अठारह सौ से ज्यादा लोगों को पकड़ा है, जिनमें दो सौ इक्यासी विदेशी नागरिक शामिल हैं। यह भी सामने आया है कि मरकज के इस आयोजन के बाद अपने ठिकानों को लौटे कई लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई थी और इलाज के दौरान कुछ लोगों की मौत भी हो गई। इनमें तेलंगाना में कोरोना से मरे छह लोग भी हैं। एक कोरोना पीड़ित की मौत सोपोर में हुई। जाहिर है, मरकज से लौटे लोग कोरोना के वाहक बने और जिस-जिस के संपर्क में आए होंगे, उनको कोरोना वायरस से संक्रमित किया होगा। इसका पता लगा पाना अब सरकारी तंत्र के लिए भी आसान नहीं होगा।

हालांकि निजामुद्दीन स्थित इस तबलीगी मरकज में आने वाले प्रतिनिधि आमतौर पर अपने आगमन की सूचना सरकार को देते हैं। लेकिन इस बार ऐसा क्या हुआ कि इतने दिनों तक दो हजार से ज्यादा लोगों का जमावड़ा यहां लगा रहा और गृह मंत्रालय को कोई खबर नहीं मिली। जबकि कोरोना संकट के चलते इन दिनों दूसरे देशों से आने वाले भारतीय और विदेशी नागरिकों के भारत में प्रवेश पर कड़ी नजर रखी गई। इसके बावजूद कैसे इतनी बड़ी संख्या में विदेशी मरकज में पहुंच गए और यहां जमे रहे?
तबलीगी मरकज के इस आयोजन ने दिल्ली सहित पूरे देश को गंभीर खतरे में डाल दिया है। सवाल है कि आखिर इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया जाए? मरकज के पदाधिकारियों को, केंद्र और दिल्ली सरकार को, दिल्ली पुलिस को या फिर खुफिया तंत्र को? तबलीगी मरकज ने जिस तरह की लापरवाही बरती और यहां आए लोग कोरोना संक्रमण फैलने का कारण बने, उसे देखते हुए सरकार को ऐसी संस्थाओं के खिलाफ इतनी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, जो मिसाल के रूप में देखी जाए।

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