करतारपुर की बाधा

खालिस्तान की मांग को लेकर पंजाब में लंबे समय तक हिंसा का दौर चला था। यह दंश भी पाकिस्तान की ही देन था। लेकिन भारतीय सेना और पंजाब पुलिस ने पंजाब से आतंकवाद का खात्मा कर बड़ी कामयाबी हासिल की थी।

पाकिस्तान में स्थित गुरुद्वारा करतारपुर साहिब। (एक्सप्रेस फोटो)

चार महीने पहले जब गुरुद्वारा करतारपुर साहिब तक जाने के लिए गलियारा बनाने को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच सहमति बनी थी तब लगा था कि अब जल्द ही सिख श्रद्धालु इस पवित्र स्थान पर आ-जा सकेंगे। पाकिस्तान स्थित इस गुरुद्वारे तक पहुंचने के लिए गलियारे के निर्माण को लेकर दोनों देशों ने अपने-अपने यहां उद्घाटन कार्यक्रम करके इसकी पहल भी की। लेकिन हाल में जिस तरह के घटनाक्रम हो रहे हैं उनसे लगता नहीं है कि पाकिस्तान इस दिशा में कोई सकारात्मक कदम उठाना चाहता है। हालिया घटनाएं इस बात के संकेत दे रही हैं कि गलियारे के निर्माण का काम खटाई में पड़ सकता है। हाल में हुआ यह कि गलियारा बनाने और गुरुद्वारे में गुरु नानकदेवजी की पांच सौ पचासवीं जयंती के आयोजन के लिए गुरुवार को पाकिस्तान ने जो कमेटी बनाई उसमें चार खालिस्तान समर्थकों को भी शामिल कर लिया। पाकिस्तान की इस हरकत से भारत का नाराज होना स्वाभाविक था। इसलिए भारत ने करतारपुर गलियारे पर दूसरी द्विपक्षीय बैठक को रद करने का फैसला किया।

भारत शुरू से ही पाकिस्तान को कहता रहा है कि वह इस गलियारे से संबंधित बैठकों और गुरुद्वारे से जुड़े मसलों से खालिस्तान समर्थकों को अलग रखे। लेकिन लगता है पाकिस्तान भारत को चिढ़ाने के लिए बार-बार खालिस्तान समर्थकों को ऐसे आयोजनों में शरीक कर रहा है। जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने अपने यहां गलियारे के निर्माण का उद्घाटन किया था तब उस समारोह में भी पाकिस्तानी सेनाध्यक्ष के साथ खालिस्तान समर्थक नेता गोपालसिंह चावला मौजूद थे। तब भी भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जाहिर की थी। इसके बाद पिछली बार गलियारे के मुद्दे पर हुई बैठक में भी भारत ने खालिस्तान समर्थकों को लेकर चेताया था। लेकिन इस बार भी पाकिस्तान अपनी हरकत से बाज नहीं आया और गोपालसिंह चावला, मनिंदरसिंह, बिशनसिंह और कुलजीतसिंह को संबंधित कमेटी में रख लिया। ये चारों वे शख्स हैं जो भारत की संप्रभुता को चुनौती देते आए हैं और भारत सरकार इन्हें पृथकतावादी मानती है। भारत के विरोध के बावजूद अगर पाकिस्तान इन लोगों को कमेटी में रखता है तो इससे उसकी मंशा पर सवाल खड़े तो खड़े होंगे ही।

खालिस्तान की मांग को लेकर पंजाब में लंबे समय तक हिंसा का दौर चला था। यह दंश भी पाकिस्तान की ही देन था। लेकिन भारतीय सेना और पंजाब पुलिस ने पंजाब से आतंकवाद का खात्मा कर बड़ी कामयाबी हासिल की थी। भारत को अस्थिर करने और अलग खालिस्तान राज्य बनवाने के लिए पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने आतंकवादियों का नेटवर्क खड़ा किया था। आज भी पाकिस्तान यही कर रहा है। वह गोपालसिंह चावला जैसे खालिस्तान समर्थकों को पाले हुए है और इनकी आड़ में बार-बार भारत को धमकाने की कोशिश कर रहा है। गोपालसिंह चावला लश्करे तैयबा के सरगना हाफिज सईद का करीबी है। यह पूरी जमात भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने वाली रही है। भारत एक नहीं, अनेक बार इस बारे में पाकिस्तान को सबूत भी दे चुका है। लेकिन पाकिस्तान जानबूझकर इन आतंकियों को भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर रहा है। दरअसल करतारपुर गलियारा सिख श्रद्धालुओं की आस्था कता सबसे बड़ा केंद्र है। अगर इसी तरह के विवाद पाकिस्तान करता रहा तो सवाल है कि यह गलियारा कैसे बन पाएगा और कैसे सिख श्रद्धालु गुरुद्वारे तक जा पाएंगे। पाकिस्तान को इस बारे में सोचना चाहिए और इस पर राजनीति करने से बाज आना चाहिए।

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