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जापान के साथ

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की भारत यात्रा नरेंद्र मोदी सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हुई है। इसमें दोनों देशों के बीच करीब सोलह विषयों पर समझौते हुए।

Author Published on: December 13, 2015 11:33 PM

जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की भारत यात्रा नरेंद्र मोदी सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हुई है। इसमें दोनों देशों के बीच करीब सोलह विषयों पर समझौते हुए। उनमें असैन्य परमाणु समझौता और मुंबई-अमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन और मेक इन इंडिया योजना के लिए अलग-अलग आर्थिक मदद मुहैया कराने संबंधी करार खास हैं। इनमें असैन्य परमाणु करार ज्यादा अहम है। जिस तरह भारत की ऊर्जा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं, उनमें परमाणु बिजली घरों के लिए परमाणु समझौते लंबे समय से लटके हुए थे। यूपीए सरकार के समय तकनीकी सुरक्षा और मुआवजे संबंधी चिंताओं के चलते कई महत्त्वपूर्ण परमाणु करार अटक गए थे। अमेरिका के साथ परमाणु करार खटाई में पड़ने से भारत की जरूरतें पूरी होना असंभव-सा लगने लगा था।

इसमें एक अड़चन यह भी आ रही थी कि चूंकि भारत ने संयुक्त राष्ट्र के परमाणु अप्रसार समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, इसलिए परमाणु तकनीक संबंधी मदद मुहैया कराने में कई देशों को मुश्किल पेश आ रही थी। जापान ने भारत पर भरोसा करते हुए इस क्षेत्र में मदद मुहैया कराने का फैसला किया। हालांकि उसने भी चेतावनी दी है कि अगर भारत ने परमाणु अस्त्रों का परीक्षण किया तो वह अपना परमाणु करार पलटने पर विचार करने को बाध्य होगा। फिलहाल भारत की जरूरत परमाणु अस्त्र से कहीं ज्यादा स्वच्छ और जरूरत भर की सस्ती बिजली पैदा करना है। लगातार बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए भी कोयले से पैदा होने वाली बिजली के बजाय परमाणु बिजली पैदा करना उसकी प्राथमिकता है। ऐसे में जापान के साथ हुआ यह करार काफी हद तक उसकी जरूरतें पूरी कर सकता है।

इसके अलावा जापान के साथ हुए समझौतों से नरेंद्र मोदी सरकार की एशिया प्रशांत के देशों के साथ रिश्ते मजबूत करने की नीति को भी काफी बल मिलेगा। हालांकि जापान के साथ भारत के व्यापारिक रिश्ते पुराने हैं, पर इस समझौते से उसमें काफी बढ़ोतरी होने वाली है। जापान ने अगले पांच सालों में भारत में करीब पैंतीस अरब डॉलर निवेश करने का फैसला किया है। इसमें करीब बारह अरब डॉलर मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत जापानी उद्यमियों को भारत में उद्योग स्थापित करने के लिए मदद के रूप में दिया जाएगा। बारह अरब डॉलर मुंबई-अमदाबाद बुलेट ट्रेन चलाने के लिए दिए जाएंगे। इसके साथ ही निर्यात में बढ़ोतरी के प्रयास होंगे। अभी भारत में जापान का निर्यात करीब पौने दो फीसद है, इस समझौते के बाद उसमें वृद्धि होगी। फिर आतंकवाद से निपटने के लिए हुए करार भी काफी अहम हैं।

हालांकि भारत के साथ जापान के इन समझौतों के पीछे जापान का यह डर भी हो सकता है कि चीन के भारत के साथ व्यावसायिक संबंध और प्रगाढ़ न हों। फिलहाल भारत में चीन का निर्यात जापान से कहीं ज्यादा है। फिर यह भी कि परमाणु के मामले में जापान के कई परमाणु बिजलीघर बंद पड़े हैं, जबकि चीन लगातार इस दिशा में उन्नति कर रहा है, इसलिए अगर भारत के साथ चीन ने परमाणु समझौते को आगे बढ़ाया तो जापान का रास्ता लगभग बंद हो सकता है। हालांकि परमाणु मामले में भारत के लिए जापान अमेरिका का विकल्प नहीं हो सकता, पर उसके साथ हुए इस करार पर भारत में वैसी अड़चनें आने की संभावना नहीं है, जैसी अमेरिका के साथ पैदा होती रही हैं। इससे मोदी सरकार के विकास कार्यक्रमों को कुछ गति अवश्य मिलेगी।

 

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