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संपादकीय: चर्च के भीतर

सवाल है कि लंबे समय से इस नन के साथ जो कुछ होता रहा, उस पर चर्च ने कोई कदम क्यों नहीं उठाया। पीड़ित नन के आरोपों की जांच विशेष जांच दल (एसआइटी) कर रहा है। इस नन ने बताया है कि उसने अपने साथ हो रहे यौन उत्पीड़न के बारे में चर्च के अधिकारियों से एक नहीं, कई बार शिकायत की।

Author September 24, 2018 2:40 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo credit- Indian express)

केरल के कुछ चर्च पिछले कई महीनों से चर्चा और विवाद में हैं। इन चर्चों में यौनाचार-दुराचार की जो घटनाएं सामने आई हैं, वे शर्मसार कर देने वाली हैं। कोई सोच भी नहीं सकता कि ईश्वर की इबादत कराने और उसके प्रतिनिधि के रूप में प्रवचन देने वाले यहां के पादरी यौन शोषण जैसे आरोपों में घिरे होंगे। पिछले कुछ समय में एक-दो नहीं, बल्कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं। इन घटनाओं से लगता है कि चर्च अब प्रभु यीशु की प्रार्थना करने के पवित्र स्थल नहीं रह गए हैं। हाल में जिस मामले ने सबसे ज्यादा तूल पकड़ा है वह केरल के एक चर्च की नन के यौन शोषण का है। इस नन ने यौन शोषण करने वाले पादरी के खिलाफ मोर्चा खोलने की हिम्मत जुटाई और मामले को सार्वजनिक करते हुए अदालत तक ले गई। नन ने आरोप लगाया है कि इस पादरी ने दो साल से ज्यादा तक उसके साथ बलात्कार किया। पादरी अब पुलिस हिरासत में है। इस आरोपी पादरी को वेटिकन के प्रतिनिधि पोप ने धर्म संबंधी चर्च के सारे कामों से मुक्त कर दिया गया है। भारत में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी पादरी को दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।

सवाल है कि लंबे समय से इस नन के साथ जो कुछ होता रहा, उस पर चर्च ने कोई कदम क्यों नहीं उठाया। पीड़ित नन के आरोपों की जांच विशेष जांच दल (एसआइटी) कर रहा है। इस नन ने बताया है कि उसने अपने साथ हो रहे यौन उत्पीड़न के बारे में चर्च के अधिकारियों से एक नहीं, कई बार शिकायत की। लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी और न ही आरोपी पादरी के खिलाफ कोई कदम उठाया। इसका नतीजा यह हुआ कि पादरी का हौसला बढ़ता गया और वह लगातार उत्पीड़न करता रहा। हार कर नन पुलिस के पास पहुंची और शिकायत दर्ज कराई। इससे यह बात साफ होती है कि ऐसे मामलों पर चर्च कोई कार्रवाई करने से बचते हैं, ताकि उनकी प्रतिष्ठा पर कोई आंच न आए। अगर चर्च के अधिकारियों ने समय पर उचित कार्रवाई की तो इसका एक अच्छा संदेश जाता। लेकिन चर्च के अधिकारी तो पादरी को बचाने में जुट गए।

इससे पहले भी केरल के ही एक व्यक्ति ने चर्च के चार पादरियों के खिलाफ अपनी पत्नी के यौन शोषण का मामला दर्ज कराया था। पुलिस को दिए बयान में महिला ने कहा कि चर्च में कन्फेशन यानी पाप की स्वीकारोक्ति की आड़ में पादरियों ने उसका यौन उत्पीड़न किया। ऐसे ही एक अन्य मामले में पुलिस ने पादरी पर लूट और दुष्कर्म का मामला दर्ज किया था। केरल के अलावा पंजाब, बिहार जैसे राज्यों से भी पादरियों के खिलाफ इस तरह के मामले सामने आए हैं। दुनिया के तमाम देशों में पादरियों पर बच्चों और महिलाओं के यौन शोषण के आरोप लगते रहे हैं और कई मामलों में सजा भी हुई है। धार्मिक स्थलों में ऐसे शर्मनाक कृत्यों से सबसे ज्यादा धक्का उनकी पवित्रता को पहुंचता है और जिन्हें लोग ईश्वर का प्रतिनिधि मानते हैं, उनके प्रति आस्था को गहरी चोट पहुंचती है। दुख की बात तो यह है कि इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिशें भी हुर्इं। पीड़ित नन के समर्थन में उतरीं ननों के आंदोलन को राज्य सरकार के खिलाफ राजनीति करार दे दिया गया। ऐसी घटनाएं सरकार और समाज के लिए गंभीर चुनौती हैं, साथ ही उन लोगों को भी कठघरे में खड़ा करती हैं जिन पर इन धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने की जिम्मेदारी है।

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