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विद्वेष की लकीर

जब से केंद्र में भाजपा की सरकार बनी है, अल्पसंख्यक समुदायों के उपासना घरों पर हमले बढ़े हैं। इसी की एक कड़ी वसंत कुंज इलाके में गिरजाघर में हुई तोड़फोड़ है। पिछले दो महीनों में दिल्ली के पांच गिरजाघरों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं। वसंत कुंज की घटना को लेकर गृहमंत्रालय […]

जब से केंद्र में भाजपा की सरकार बनी है, अल्पसंख्यक समुदायों के उपासना घरों पर हमले बढ़े हैं। इसी की एक कड़ी वसंत कुंज इलाके में गिरजाघर में हुई तोड़फोड़ है। पिछले दो महीनों में दिल्ली के पांच गिरजाघरों में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं। वसंत कुंज की घटना को लेकर गृहमंत्रालय ने तुरंत जांच के आदेश दिए हैं। मगर हैरानी है कि पुलिस इसे चोरी की घटना मान कर छानबीन कर रही है। जबकि सब जानते हैं कि गिरजाघरों में ऐसा कीमती सामान नहीं होता, जिसे कोई चुराना चाहे। फर्नीचर और कुछ प्रतीकों के अलावा वहां कुछ नहीं होता। अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि पुलिस की इस जांच के क्या नतीजे निकलेंगे।

केंद्र सरकार इस हकीकत से मुंह नहीं चुरा सकती कि पिछले कुछ समय से जिस तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल आदि पूरे देश में धर्मांतरण और घर वापसी जैसे कार्यक्रम चला रहे हैं, ये घटनाएं उसी का हिस्सा हैं। जब भी धर्मांतरण रोकने की बात उठती है, सरकार उस पर परदा डालने की कोशिश करती है, मानो देश में ऐसा कुछ कहीं हो ही नहीं रहा। राज्यसभा में पिछले सत्र के दौरान इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण के लिए बुलाए जाने पर प्रधानमंत्री अंत तक वहां नहीं गए। अब विधिमंत्री डीवी सदानंद गौड़ा का कहना है कि धर्मांतरण और घर वापसी कार्यक्रमों पर रोक लगाना राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है। मगर इस तरह केंद्र सरकार और भाजपा अपनी जिम्मेदारियों से कब तक भागती रह सकती हैं!

गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि बन कर आए अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा जाते-जाते धार्मिक कट््टरता की तरफ इशारा करते हुए कह गए कि इससे भारत की विकास संबंधी योजनाओं को गति देना मुश्किल बना रहेगा। इसके चलते एक दिन पहले तक जो मोदी सरकार अमेरिका के साथ बेहतर हुए संबंधों का प्रचार कर इतरा रही थी, उसमें सन्नाटा छा गया। अब उसने चुप्पी तोड़ी है। गृहमंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि ओबामा का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत सरकार धार्मिक आधार पर समाज को बांटने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करने वाली। मगर इस प्रकरण पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर ओबामा का बयान सैद्धांतिक है, उन्हें इस बारे में भारत की स्थिति का सही ज्ञान नहीं है। यानी भारत में धर्म को लेकर जो कुछ चल रहा है, उसके चलते रहने में अमित शाह को कोई बुराई नजर नहीं आती।

जाहिर है, जब प्रधानमंत्री मौन साधे हुए हैं, गृहमंत्री को देश में लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता पर कोई चोट पड़ती नहीं दिख रही और पार्टी अध्यक्ष एक तरह से धर्मांतरण को गलत नहीं मान रहे तो भाजपा और उसके आनुषंगिक संगठनों के धर्म को लेकर उपद्रवों पर अंकुश लगाना आसान नहीं है। आए दिन जगह-जगह घर वापसी के कार्यक्रम आयोजित हो रहे हैं, विद्वेष फैलाने वाले बयानों पर रोक नहीं लग पा रही। अब तो विश्व हिंदू परिषद के मंचों से चार से अधिक बच्चे पैदा करने वाले हिंदुओं को सम्मानित भी किया जाने लगा है। जिन भाजपा अध्यक्ष को कुछ महीने पहले संघ परिवार की तरफ से शुरू किए गए धर्मांतरण और घर वापसी कार्यक्रमों से मोदी सरकार की विकास संबंधी नीतियों में बाधा पहुंचने का भय सता रहा था, अब वही ओबामा के बयान से इत्तिफाक नहीं रखते, तो इसका क्या अर्थ हो सकता है! यही कि भाजपा के लिए हिंदुत्व का एजेंडा सर्वोपरि है। ऐसे में दूसरे धर्मों के लोगों की भावनाओं और उनके उपासना स्थलों के प्रति सम्मान कहां तक सुरक्षित रहेगा!

 

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