ताज़ा खबर
 

जेल में सुरंग

सुरक्षा के मामले में काफी चाक-चौबंद मानी जाने वाली तिहाड़ जेल से दो कैदियों के भाग निकलने की घटना पर स्वाभाविक ही प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। हालांकि उनमें से एक कैदी को पकड़ लिया गया और उसके जरिए इस वारदात के बारे में काफी कुछ जानकारी मिल गई है, पर इससे जेल की […]
Author July 1, 2015 17:23 pm

सुरक्षा के मामले में काफी चाक-चौबंद मानी जाने वाली तिहाड़ जेल से दो कैदियों के भाग निकलने की घटना पर स्वाभाविक ही प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। हालांकि उनमें से एक कैदी को पकड़ लिया गया और उसके जरिए इस वारदात के बारे में काफी कुछ जानकारी मिल गई है, पर इससे जेल की सुरक्षा-व्यवस्था की पोल एक बार फिर खुली है। यह कुख्यात ठग चार्ल्स शोभराज और फूलन देवी के हत्यारे शेरसिंह राणा के चकमा देकर फरार हो जाने की घटना से बिल्कुल अलग है। दोनों युवक जिस जेल की दीवार फांद कर भागे, वहां लोक निर्माण विभाग ने खुदाई के बाद मलबे का ढेर लगा रखा था।

जेल प्रशासन इसी को आधार बना कर सारा दोष लोक निर्माण विभाग के कर्मचारियों के सिर मढ़ने की कोशिश कर रहा है। जबकि हकीकत यह है कि दोनों ने अपनी जेल की दीवार फांदने के बाद दूसरी जेल की दीवार में सेंध लगाई और फिर बाहर निकल कर आखिरी दीवार फलांगने में कामयाब हो गए। यह सब आनन-फानन में नहीं हुआ होगा। इन जेलों की सुरक्षा गश्ती में हर वक्त जेल के सुरक्षाकर्मियों के अलावा भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, तमिलनाडु की विशेष पुलिस और औद्योगिक सुरक्षा बल के जवान तैनात रहते हैं। कुछ-कुछ दूरी पर बने सुरक्षा टावरों पर निगरानी दस्ते मुस्तैद रहते हैं। जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। फिर भी दो कैदी जेल में सुरंग बना कर फरार हो गए, तो इसे जेल प्रशासन की ढिलाई के अलावा क्या कहा जा सकता है! यह हालत उस जेल की है जहां कई शातिर अपराधी कैद हैं। कई कुख्यात आतंकवादियों को भी यहां रखा गया है।

इस तरह तिहाड़ से कैदियों के भागने में कामयाब होने के पीछे एक दलील यह दी जाती रही है कि यहां क्षमता से बहुत अधिक कैदियों को रखा गया है। इनमें विचाराधीन कैदियों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है, जिसके चलते जेल प्रशासन पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के अलावा निगरानी में मुस्तैदी बरतने का दबाव बढ़ता गया है। वहां जेल कर्मचारियों के एक हजार पद स्वीकृत हैं, पर इस समय महज पांच सौ कर्मचारी तैनात हैं। इसी तरह वहां आठ सौ से एक हजार सीसीटीवी कैमरों की जरूरत है, मगर फिलहाल साढ़े तीन सौ कैमरे ही लगे हुए हैं। कई बार यह सुझाव दिया गया कि जेलों पर विचाराधीन कैदियों का बोझ कम करने के लिए अदालतों को त्वरित निपटारे की प्रक्रिया अपनानी चाहिए। ऐसा नहीं हो पा रहा। मगर इस आधार पर तिहाड़ जेल प्रशासन अपनी जवाबदेही से पल्ला नहीं झाड़ सकता।

अक्सर ऐसी बातें सामने आती रही हैं कि बाहरी लोग कैदियों तक नशीले पदार्थ, मोबाइल फोन और दूसरे संचार उपकरण आदि पहुंचाने में कामयाब होते हैं। जेलों के भीतर हत्याओं और संदिग्ध स्थितियों में मौत को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं। जेल प्रशासन का दावा है कि वहां हर व्यक्ति और हर गतिविधि पर नजर रखने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। फिर क्या वजह है कि दो कैदीजेल की एक दीवार तोड़ने और दो दीवारों को फांदने में कामयाब हो गए और वहां तैनात सुरक्षा दस्ते को भनक तक नहीं लगी। जेल की दीवार तोड़ने के लिए औजार उन्हें कहां से हाथ लगे। कंटीली बाड़ वाली दीवारें लांघते समय भी सुरक्षा टावरों पर तैनात पहरेदारों को कुछ पता क्यों नहीं चला। तिहाड़ की सुरक्षा-व्यवस्था में सेंध एक गंभीर चेतावनी है, जो अनसुनी नहीं की जानी चाहिए।

फेसबुक पेज को लाइक करने के लिए क्लिक करें- https://www.facebook.com/Jansatta

ट्विटर पेज पर फॉलो करने के लिए क्लिक करें- https://twitter.com/Jansatta

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.