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संपादकीय: बेहतरी का सूचकांक

सरकार बदलने से अर्थव्यवस्था को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगते हैं। फिर यह भी कि नई सरकार अपनी साख बनाने के मकसद से कई लोकलुभावन योजनाएं शुरू करती है, कई पुरानी योजनाओं में बदलाव करती या उन्हें समाप्त करने के कदम भी उठा लेती है।

Author May 22, 2019 1:06 AM
सरकार बदलने से अर्थव्यवस्था को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगते हैं।

मतदान पश्चात के अनुमानों में एक बार फिर एनडीए सरकार बनने के संकेत उभरे, तो लंबे समय से सुस्त पड़ा शेयर बाजार कुलांचें भरने लगा। निफ्टी भी अब तक के अपने नए रिकार्ड स्तर पर पहुंच गया। सितंबर 2013 के बाद सूचकांकों में एक दिन में आई यह सबसे बड़ी तेजी है। यानी यह इस बात का संकेत है कि निवेशकों का मनोबल बढ़ा है। यानी अंतिम नतीजे आने तक शेयर बाजार का रुख इसी तरह ऊपर की ओर बने रहने का अनुमान है। हालांकि यह पहला मौका नहीं है, जब आम चुनाव के मतदान पश्चात नतीजों के बाद शेयर बाजार में ऐसा उत्साह का वातावरण बना है। पिछले अनेक मौकों पर ऐसा देखा गया, जब सरकार बदलने का अनुमान होता है, तो बाजार में नरमी का रुख होता है। इसका उदाहरण पिछले महीने ही देखने को मिला, जब अनुमान लगाया गया था कि अपने सहयोगी दलों के साथ कांग्रेस सरकार बना सकती है, तो सेंसेक्स में छह फीसद की गिरावट आ गई थी। निवेशकों में इस तरह की निराशा या उत्साह की वजहें साफ हैं। जब सरकार बदलती है तो पुरानी आर्थिक नीतियों में बदलाव की संभावना रहती है, जबकि पिछली सरकार के अपना कार्यकाल जारी रखने पर चालू नीतियों के निरंतर आगे बढ़ने की उम्मीद होती है।

सरकार बदलने से अर्थव्यवस्था को लेकर कई तरह के कयास लगाए जाने लगते हैं। फिर यह भी कि नई सरकार अपनी साख बनाने के मकसद से कई लोकलुभावन योजनाएं शुरू करती है, कई पुरानी योजनाओं में बदलाव करती या उन्हें समाप्त करने के कदम भी उठा लेती है। इसलिए जब मतदान पश्चात के ताजा अंकड़े आए, तो निवेशकों को यह भरोसा बना कि अर्थव्यवस्था में झटके नहीं लगेंगे। पहले कार्यकाल में सरकार ने जो योजनाएं या नीतियां लागू की थीं, उनमें निरंतरता बनी रहेगी, इसलिए अर्थव्यवस्था में बेहतरी की उम्मीद बनेगी। जीएसटी जैसे फैसलों के नतीजे अब दिखने शुरू होंगे। पर आर्थिक विशेषज्ञ शेयर बाजार के ताजा रुझान को बहुत उत्साहजनक नहीं मानते। इसकी वजह है कि मतदान पश्चात के आंकड़ों को लेकर अभी संशय बने हुए हैं। इसलिए अंतिम नतीजे आने के बाद सेंसेक्स का रुख ऊपर की तरफ ही बना रहेगा, दावा नहीं किया जा सकता। ऐसा अनेक बार देखा जा चुका है कि मतदान पश्चात नतीजों को देख कर उछला शोयर बाजार अंतिम नतीजों के बाद औंधे मुंह नीचे गिर गया। इसलिए बाजार विशेषज्ञ छोटे निवेशकों को धैर्य और विवेक से काम लेने की सलाह दे रहे हैं।

शेयर बाजार अनिश्चितताओं के खेल का एक ऐसा मैदान है, जहां चतुर खिलाड़ी पल-पल खेल बदल दिया करते हैं। ऐसे खिलाड़ियों को तेजड़िए और मंदड़िए कहा जाता है। ये बाजार में झुंड बना कर आते हैं और पूरे खेल का रुख बदल देते हैं। कई बार वे कृत्रिम उछाल या गिरावट पैदा करते हैं और लाभ कमा कर निकल लेते हैं। उनके इस खेल में कई बार बिकवाली बढ़ जाती है, और छोटे निवेशक खुद को ठगा महसूस करते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही जान पड़ता है। बाजार का रुख कुछ इतनी तेजी से ऊपर को उठा कि आम निवेशक हैरानी से देखते रह गए। वे यह निर्णय नहीं कर पाए कि उन्हें क्या करना चाहिए। लाभ कमाना चाहिए या इंतजार करना चाहिए। ऐसी स्थिति में छोटे निवेश्कों की समझदारी इसी में मानी जाती है कि वे धैर्य रख कर बाजार के वास्तविक रुख को समझें और फिर अगला कदम उठाएं।

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