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संपादकीय: नए रिश्तों का दौर

धानमंत्री का ह्यूस्टन दौरा भारतीयों से मुलाकात और कारोबारी रिश्तों को बढ़ाने के मकसद से ज्यादा महत्त्वपूर्ण रहा है। अमेरिकी तेल कंपनियों के प्रमुखों के साथ प्रधानमंत्री की बैठक भारत के ऊर्जा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने पर केंद्रित रही और कई बड़े फैसले हुए।

Author नई दिल्ली | September 24, 2019 1:09 AM
PM Modi, howdy modi, howdy Modi event, modi apologises, Senator John Cornyn, houston, इंटरनेशनल न्यूज़, मोदी, हाउडी मोदी, jansatta news‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (AP Photo)

अमेरिका के शहर ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत-सम्मान में आयोजित भव्य समारोह ‘हाउडी मोदी’ का संदेश साफ है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते में अब नए युग की शुरुआत हैं। इस आयोजन की अहमियत सिर्फ इसलिए नहीं मानी जानी चाहिए कि यह भारतीयों और अमेरिकियों की ओर से मोदी का सम्मान भर था, बल्कि यह समारोह इस वजह से ज्यादा महत्त्वपूर्ण रहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद इसमें मौजूद रहे, मंच से हर मामले में मोदी की तारीफ की। आतंकवाद से निपटने से लेकर कारोबारी रिश्तों तक को मजबूत करने में अमेरिका भारत के साथ एकजुट दिखा। क्या कोई सोच सकता है कि आयात शुल्क जैसे मुद्दे पर कभी भारत को धमकाने वाले ट्रंप इस तरह दिल खोल कर भारतीय प्रधानमंत्री की आवभगत करेंगे! यह कोई मामूली बात नहीं है कि भारत के प्रधानमंत्री के लिए अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य, टेक्सास के गवर्नर सहित तमाम बड़ी हस्तियां और कारोबारियों के साथ पचास हजार लोग स्टेडियम में मौजूद रहे। मोदी के इस सम्मान से वैश्विक पटल पर एक बार फिर भारत का डंका बजा है। हालांकि पहले भी ऐसे अवसर आए हैं जब प्रधानमंत्री मोदी ने इस तरह के आयोजनों में प्रवासी नागरिकों का दिल जीता है। 24 सितंबर 2014 को भी न्यूयॉर्क के मेडिसन स्क्वायर पर मोदी ने बीस हजार भारतीयों को संबोधित किया था।

ह्यूस्टन का समारोह जहां अमेरिका के साथ रिश्तों के नए आयाम गढ़ने वाला रहा है, वहीं इस मंच से ट्रंप और मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने का जो संकल्प व्यक्त किया है, वह पड़ोसी देश पाकिस्तान के लिए स्पष्ट और कड़ा संदेश है। दोनों नेताओं ने अपने भाषण में आतंकवाद को लेकर जो कुछ कहा, उसका सार यही था कि इस्लामी आतंकवाद दुनिया की शांति के लिए बड़ा खतरा है और इससे मिल कर निपटना होगा। इसके मायने पाकिस्तान को समझने चाहिए। आतंकवाद के मुद्दे पर अमेरिका ने पिछले कुछ समय में जिस तरह से भारत का साथ दिया है, उससे भी पाकिस्तान सकते में है। राष्ट्र हितों को लेकर ट्रंप और मोदी के बीच वैचारिक साम्यता की एक और झलक हाउडी मोदी में देखने को मिली। जहां भारत में घुसपैठियों को खदेड़ने के खिलाफ सरकार ने ठान रखी है, वहीं मैक्सिको से आने वाले लोगों के लिए ट्रंप का रुख भी दुनिया के सामने है। अवैध नागरिकों का मुद्दा भी इस समारोह से दूर नहीं रह पाया। स्टेडियम में भारतीय समुदाय के लोग ‘जयश्री राम’ और ‘राम लला हम आएंगे .. मंदिर वहीं बनाएंगे’ जैसे नारे लगा रहे थे। जाहिर है, भविष्य के भारत को लेकर मोदी की नीतियों और उनके काम को लेकर अमेरिका में रह रहे भारतीयों को भी उनसे उम्मीदें काफी हैं।

प्रधानमंत्री का ह्यूस्टन दौरा भारतीयों से मुलाकात और कारोबारी रिश्तों को बढ़ाने के मकसद से ज्यादा महत्त्वपूर्ण रहा है। अमेरिकी तेल कंपनियों के प्रमुखों के साथ प्रधानमंत्री की बैठक भारत के ऊर्जा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने पर केंद्रित रही और कई बड़े फैसले हुए। इससे अब भारत के ऊर्जा बाजार में निवेश बढ़ाने के लिए अमेरिकी कंपनियों को और आसानी होगी। भारत की तात्कालिक चिंता कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर है, क्योंकि सऊदी अरब के तेल संयंत्रों पर हमले के बाद से तेल उत्पादन पर भारी असर पड़ा है। ऐसे में अब अमेरिका भारत को कच्चा तेल देगा। रक्षा क्षेत्र में भी दोनों देशों ने सहयोग बढ़ाने के लिए हाथ मिलाया है। कारोबारी लिहाज से अमेरिका अब भारत की अहमियत अच्छी तरह समझ चुका है। भारत के लिए यह कम बड़ी उपलब्धि नहीं है।

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