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संपादकीय: दबाव में पाकिस्तान

पाकिस्तान में इस वक्त जो आतंकी संगठन हैं उनमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्करे-तैयबा और जमात-उद-दावा (जेयूडी) का दबदबा ज्यादा है। भारत में आतंकी हमलों में इन्हीं का हाथ रहा है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान, फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस

पुलवामा में सुरक्षाबलों पर आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जो कड़ी कार्रवाई की और कूटनीतिक कदम उठाए हैं, उनका असर दिखने लगा है। पाकिस्तान ने पुलवामा आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाले जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर पर शिकंजा कसते हुए उसके बेटे और दो भाइयों को गिरफ्तार कर लिया है। इनके अलावा और भी कई आतंकवादी संगठनों के आतंकी पकड़े गए हैं। स्पष्ट है कि भारत के रुख से पाकिस्तान सकते में है और भारी दबाव में भी। इसलिए उसे आतंकी संगठनों पर पाबंदी और आतंकियों की गिरफ्तारी जैसे कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा है। हो सकता है पहले की तरह पाकिस्तान यह कार्रवाई दिखावे के तौर पर कर रहा हो। भारत की संसद पर हमले के बाद भी 2001 में उसने जैश पर पाबंदी लगाई थी, लेकिन वह आंखों में धूल झोंकने से ज्यादा कुछ नहीं था। हाफिज सईद को तीन बार नजरबंद किया, पठानकोट हमले के बाद मसूद अजहर को भी नजरबंद किया, लेकिन यह सब पाकिस्तान का ढोंग ही था।

पर आज हालात पहले से अलग हैं। पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने जिस तरह से पाकिस्तानी सीमा में घुस कर जैश के ठिकानों को नष्ट किया, वह कड़ा संदेश है। पाकिस्तान अब यह बात अच्छी तरह से समझ गया है कि अगर उसने अभी भी अपने यहां पल रहे आतंकी संगठनों पर लगाम नहीं कसी तो उसे भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है। पाकिस्तान में इस वक्त जो आतंकी संगठन हैं उनमें जैश-ए-मोहम्मद, लश्करे-तैयबा और जमात-उद-दावा (जेयूडी) का दबदबा ज्यादा है। भारत में आतंकी हमलों में इन्हीं का हाथ रहा है। फिलहाल पाकिस्तान सरकार ने जैश, जेयूडी और फलाह-ए-इंसानियत फाउंडेशन पर नकेल कसी है। इन पर प्रतिबंध लगाने के बाद इनकी संपत्तियों और इनसे जुड़े मदरसों को सरकार ने अपने कब्जे में ले लिया है। जमात-उद-दावा को अब तक धर्मार्थ कार्य चलाने वाला संगठन बताया जाता रहा है। जबकि हकीकत यह है कि इस संगठन की आड़ में वह भारत के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले आतंकी तैयार करता है। यह वक्त पाकिस्तान के लिए परीक्षा की घड़ी है, जब उसे साबित करना होगा कि वह अपने यहां से आतंकियों का नेटवर्क खत्म करने के लिए कृतसंकल्प है।

बेहतर होता कि पाकिस्तान सरकार आतंकियों के खिलाफ जो कदम उठाने को अब मजबूर हुई है, वह कई साल पहले ही उठाती। भारत ने संसद पर हमले, मुंबई हमले, फिर पठानकोट, उड़ी और नगरोटा में आतंकी हमलों के सारे विस्तृत और अकाट्य सबूत पाकिस्तान को दिए थे, लेकिन वह इन्हें खारिज करता रहा। पुलवामा हमले के बाद जो डॉजियर उसे दिया गया, उसमें भी मसूद के भाइयों के नाम थे। इस बार पाकिस्तान ने मसूद के भाई को पकड़ा है। इससे यह तो साबित हुआ है कि सारे वांछित आतंकी पाकिस्तान में हैं और सरकार, सेना, आइएसआइ सबको सारी जानकारी है। लेकिन इन्हें अब तक बचाया जा रहा था। पाकिस्तान के आतंरिक राज्यमंत्री शहरयार खान अफरीदी ने कुछ समय पहले कहा था कि जब तक उनकी पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ सत्ता में है, कोई भी जेहादियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं सकता। जाहिर है, कौन आतंकियों को बना और बचा रहा है! पर अब पाकिस्तान बुरी तरह से घिर चुका है और अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, रूस और उसके अपने मित्र चीन तक का दबाव है कि आतंकियों को खत्म करो। भारत लंबे समय से आतंकी हमलों के गुनहगारों को सौंपने की मांग करता रहा है। अब पाकिस्तान को चाहिए कि वह वांछित आतंकियों को भारत को सौंपे और अपने यहां चल रहे आतंकी ठिकानों को नष्ट कर दुनिया के सामने इसके सबूत रखे।

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