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संपादकीय: सेहत की फिक्र

दरअसल, पिछले दिनों आई एक खबर में बताया गया कि अमेरिका में कम से कम सात लोगों की मौत के लिए ई-सिगरेट का सेवन जिम्मेदार है।

Author Published on: September 20, 2019 1:49 AM
इसके साथ ही दुनिया के कई देशों में ई-सिगरेट पर भी पाबंदी के लिए आवाजें उठीं।

कुछ साल पहले जब धूम्रपान और खासतौर पर सिगरेट के कश से होने वाले नुकसानों की फिक्र काफी बढ़ गई तब इसके विकल्प और लत से छुटकारे के लिए इलेक्ट्रॉनिक-सिगरेट यानी ई-सिगरेट का चलन बढ़ा। यह माना गया है कि ई-सिगरेट के सेवन से कोई बड़ा नुकसान नहीं होता और यह धूम्रपान की सामान्य आदत से आजादी का एक कारगर जरिया है। यह भी कहा गया कि पारंपरिक सिगरेटों को ई-सिगरेटों से बदल कर धूम्रपान से होने वाली मौतों को कम किया जा सकता है। लेकिन यह स्थिति बहुत दिनों तक नहीं बनी रह सकी।

अब नए अध्ययनों में बताया गया है कि ई-सिगरेट भी सामान्य सिगरेट के सेवन या दूसरे तरीके से धूम्रपान की तरह ही सेहत के लिए नुकसानदेह है। इसके साथ ही दुनिया के कई देशों में ई-सिगरेट पर भी पाबंदी के लिए आवाजें उठीं। इसी के मद्देनजर अब भारत सरकार ने इस संबंध में बुधवार को एक अहम फैसला लिया है, जिसके तहत ई-सिगरेट पर पूर्ण प्रतिबंध लग जाएगा। इस बारे में वित्त मंत्री ने जानकारी दी कि अब ई-सिगरेट के उत्पादन, बिक्री, परिवहन, आयात, निर्यात, जमा करने और यहां तक कि वितरण पर भी पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। इस संबंध में प्रस्तावित अध्यादेश में प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों पर एक लाख रुपए जुर्माने और एक साल तक की सजा का प्रावधान किया गया है।

दरअसल, पिछले दिनों आई एक खबर में बताया गया कि अमेरिका में कम से कम सात लोगों की मौत के लिए ई-सिगरेट का सेवन जिम्मेदार है। दूसरी ओर, अमेरिका में ही हुए एक अध्ययन के मुताबिक वहां दसवीं और बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले स्कूली बच्चों के बीच ई-सिगरेट पीने का चलन करीब अस्सी फीसद बढ़ा है। जबकि उससे निचली कक्षाओं के विद्यार्थियों के आंकड़े में साढ़े अड़तालीस फीसद की बढ़ोतरी हुई है। सवाल है कि जब पारंपरिक सिगरेट से होने वाले नुकसानों के मद्देनजर ई-सिगरेट के सेवन को उपयोगी बताया गया था, तब क्या अलग-अलग पहलुओं से इस पर वैज्ञानिक परीक्षण नहीं किए गए थे?

आज जब यह तथ्य सामने है कि ई-सिगरेट में मौजूद निकोटिन पारंपरिक सिगरेटों की तरह ही नुकसान पहुंचाता है तो क्या पहले इसके दुष्प्रभाव अनजान थे? यों भी, निकोटिन का सेवन व्यक्ति की सेहत पर समान असर करेगा, वह पारंपरिक सिगरेटों के जरिए हो या फिर ई-सिगरेट के। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति पारंपरिक सिगरेट की आदत छोड़ने या धूम्रपान का वैकल्पिक रास्ता अख्तियार करने के लिए ई-सिगरेट का सहारा लेता है तो उसका क्या फायदा है?
जो हो, अब अगर नए अध्ययन इसके खतरे या जोखिम के बारे में संकेत कर रहे हैं तो इससे भी निजात पा लेना ही बेहतर है। कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक यह अनुमान पर्याप्त प्रमाणों की बुनियाद पर नहीं खड़ा है कि ई-सिगरेट पीने वाले लोग पारंपरिक सिगरेट का सेवन छोड़ ही देते हैं।

उलटे ई-सिगरेट पीने वाले लोग अन्य रूप में तंबाकू का सेवन करना जारी रखते हैं। इस संबंध में इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च ने भी ई-सिगरेट पर पूरी तरह पाबंदी लगाने का सुझाव दिया था। इस लिहाज से देखें तो सरकार ने ई-सिगरेट पर पूरी तरह पाबंदी लगा कर धुएं में डूबे लोगों की सेहत की फिक्र की है। लेकिन यह ध्यान रखने की जरूरत है कि पारंपरिक सिगरेटों से छुटकारे की उम्मीद में जिन लोगों ने ई-सिगरेट का सहारा लिया था, वे इसकी अनुपलब्धता की वजह से कहीं फिर से धूम्रपान के पुराने या वैकल्पिक रास्तों की ओर न लौट जाएं। यह भी देखने की बात होगी कि ई-सिगरेट पर पूरी तरह पाबंदी की घोषणा के बाद सरकार पारंपरिक सिगरेट और धूम्रपान से होने वाले व्यापक नुकसानों के मद्देनजर क्या ऐसा ही फैसला लेती है!

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