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माल्या पर शिकंजा

हजारों करोड़ का बैंक कर्ज लेकर लंदन में मौज कर रहे भारतीय कारोबारी विजय माल्या पर अब शिकंजा और कस गया है। प्रत्यर्पण की कार्रवाई से इतर मुंबई की धनशोधन निरोधक कानून अदालत ने माल्या को भगोड़ा घोषित कर दिया है।

Author January 8, 2019 4:04 AM
शराब कारोबारी विजय माल्या पर भारत के विभिन्न बैंकों का हजारों करोड़ रुपए का कर्ज बकाया है। (फोटोः रॉयटर्स)

हजारों करोड़ का बैंक कर्ज लेकर लंदन में मौज कर रहे भारतीय कारोबारी विजय माल्या पर अब शिकंजा और कस गया है। प्रत्यर्पण की कार्रवाई से इतर मुंबई की धनशोधन निरोधक कानून अदालत ने माल्या को भगोड़ा घोषित कर दिया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत से भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून के तहत माल्या को भगोड़ा घोषित करने की गुहार लगाई थी। माल्या देश का पहला कारोबारी है जिसे कुछ महीने पहले बने इस कानून के तहत भगोड़ा घोषित किया गया है। अदालत के इस फैसले से सरकार को भारत और दूसरे देशों में माल्या की संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार मिल जाएगा। माल्या ने देश के सत्रह बैंकों से नौ हजार करोड़ रुपए से ज्यादा कर्ज ले रखा है और मार्च 2016 से वह देश से फरार है। हालांकि माल्या को भारत लाने के लिए कोशिशें जारी हैं, लेकिन कानूनी दांवपेचों की वजह से अब तक उसके प्रत्यर्पण में सरकार सफल नहीं हो पाई है। अब लंबी प्रक्रिया के बाद अगर माल्या को भगोड़ा घोषित किया गया है तो यह उम्मीद बंधी है कि एक न एक दिन उसे भारत ला पाने में भी कामयाबी मिलेगी। माल्या के खिलाफ प्रवर्तन एजेंसियों की यह मुहिम नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे घोटालेबाजों के लिए भी संदेश है।

भारत में पिछले कुछ सालों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनमें कारोबारियों ने बैंकों से मोटे कर्ज लिए और लौटाने में हाथ खड़े कर दिए। कुछ लोग कर्ज का पैसा लेकर दूसरे देशों की शरण में चले गए, ताकि वहां सुरक्षित रहें और भारत सरकार उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न कर सके। भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून के तहत सौ करोड़ या इससे ज्यादा के आर्थिक अपराधी जो पैसा लेकर फरार हो जाते हैं, इस कानून के दायरे में आते हैं। यह किसी से छिपा नहीं है कि ऐसे कर्जखोर बैंक कर्ज का इस्तेमाल कारोबार के बजाय निजी व अन्य मदों में करते हैं। माल्या पर बैंकों का कर्ज डकारने के अलावा कर चोरी, कर्ज की रकम को दूसरी मदों में फूंक डालने, धनशोधन जैसे मामले भी चल रहे हैं। नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने घोटालों के जरिए पंजाब नेशनल बैंक से तेरह हजार करोड़ की रकम दूसरे देशों में चल रहे अपने कारोबार में लगा डाली। यह कर्जखोर कारोबारियों की वह जमात है जो अपने राजनीतिक रसूख के अलावा बैंकिंग व्यवस्था की खामियों का, सरकार के कमजोर और पुराने पड़ चुके कानूनों का, लचर न्याय व्यवस्था का भरपूर फायदा उठाती है।

माल्या प्रकरण में सरकार और उसकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने अब जो कदम उठाए हैं उनसे यह संदेश तो गया है कि सरकार आर्थिक अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। लेकिन सवाल है कि माल्या जैसे कर्जदार और नीरव मोदी जैसे घोटालेबाजों को हमारा तंत्र रोक क्यों नहीं पाता। आखिर क्या कारण हैं कि इनके हाथ कानून के हाथों से भी लंबे हो जाते हैं? कैसे ये बैंकिंग व्यवस्था को अपने कब्जे में किए रहते हैं? बैंक कैसे आंखें मूंद कर हजारों करोड़ के कर्ज देते रहे, जिनके लौट पाने की जरा संभावना नहीं थी? ये ऐसे सवाल हैं जो पूरे तंत्र को शक के दायरे में खड़ा करते हैं। बैंकों, खुफिया तंत्र और सुरक्षा एजेंसियों को अगर चकमा देकर आर्थिक अपराधी भाग निकलने में कामयाब हो जाते हैं तो यह हमारे तंत्र की नाकामी और खोखलेपन को उजागर करता है। सबसे शर्मनाक तो यह कि हाल में सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री ने माल्या के प्रति हमदर्दी जताते हुए यहां तक कह डाला था कि ‘माल्या जी चोर नहीं हैं, वे तो संकट में हैं।’ लेकिन अब माल्या घोषित रूप से भगोड़ा है!

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