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संपादकीय: आतंक के विरुद्ध

भारत जब भी अपने यहां हुई आतंकी घटनाओं से जुड़े दस्तावेज पाकिस्तान को सौंपता रहा है, तो वह उन्हें सीधा खारिज कर देता है। वहां की अदालतें उन्हें नकार देती रही हैं।

Author Published on: September 6, 2019 1:52 AM
जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर, लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज मुहम्मद सईद, मुंबई आतंकी हमले के आरोपी जकी-उर-रहमान-लखवी और भगोड़े माफिया सरगना दाऊद इब्राहिम आतंकवादी घोषित

आतंकवादी गतिविधियों पर नकेल कसने के मकसद से सरकार ने एक कदम और आगे बढ़ा दिया है। हाल ही में बने आतंकरोधी कानून के तहत भारत ने पाकिस्तान में पनाह पाए जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर, लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक हाफिज मुहम्मद सईद, मुंबई हमले के आरोपी जकी-उर-रहमान लखवी और भगोड़े माफिया दाउद इब्राहिम को आतंकवादी घोषित कर दिया है। कुछ दिनों पहले ही सरकार ने गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून 1967 में एक महत्त्वपूर्ण संशोधन किया था। इस कानून के तहत पहली बार इन चारों को आतंकी घोषित किया गया है। पहले ऐसा कानून न होने की वजह से भारत सरकार इन्हें आतंकी का दर्जा नहीं दे पा रही थी। भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इन चारों के खिलाफ अपनी बात रखता रहा है, पर अब वह दावे के साथ कह सकता है कि उसने इन्हें आतंकी घोषित कर रखा है। इस तरह वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इनके प्रत्यर्पण के लिए भी मांग उठा सकता है। अभी तक इनके प्रत्यर्पण की उसकी मांग प्रभावी नहीं हो पा रही थी। हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने भी मसूद अजहर और हाफिज सईद को वैश्विक आतंकी घोषित कर रखा है, पर भारत के कानून के मुताबिक इन्हें आतंकी घोषित किए जाने के बाद इन दोनों पर नकेल कुछ अधिक सख्ती से कसी जाने की गुंजाइश बनी है, क्योंकि इन्होंने अपनी ज्यादातर आतंकी गतिविधियों को भारत की जमीन पर अंजाम दिया है।

मसूद अजहर पर जम्मू-कश्मीर विधानसभा परिसर, भारतीय संसद, पठानकोट वायुसेना अड््डे, श्रीनगर के बीएसएफ शिविर और पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हमला करने और भारत में आतंकी गतिविधियों को संचालित करने का आरोप है। हाफिज सईद पर लालकिला, रामपुर में सीआरपीएफ शिविर और मुंबई हमले में शामिल होने का आरोप है। जकी-उर-रहमान लखवी भी इन हमलों में शाामिल रहा है। दाउद इब्राहिम पर भारत सहित अनेक देशों में बेनामी जमीन-जायदाद का कारोबार चलाने, धार्मिक कट्टरवाद और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक मदद पहुंचाने के आरोप हैं। वह तस्करी, जाली नोट के कारोबार, हथियारों की तस्करी, धनशोधन, जबरन वसूली जैसी गतिविधियों में भी शामिल रहा है। 1993 में उसने अपने सहयोगियों की मदद से मुंबई में सिलसिलेवार बम विस्फोटों को अंजाम दिया था, जिसमें ढाई सौ से ऊपर लोगों की मौत हो गई थी। अब वह भगोड़ा है। इन सभी के खिलाफ भारत के पास पुख्ता सबूत हैं, जिन्हें वह पाकिस्तान को सौंप चुका है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी वे सबूत साझा हैं।

भारत जब भी अपने यहां हुई आतंकी घटनाओं से जुड़े दस्तावेज पाकिस्तान को सौंपता रहा है, तो वह उन्हें सीधा खारिज कर देता है। वहां की अदालतें उन्हें नकार देती रही हैं। पाकिस्तान की दलील रही है कि मसूद अजहर, हाफिज सईद और लखवी आतंकी नहीं, समाजसेवक हैं। इस तरह इन आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती थी। अब गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम कानून के तहत इन्हें आतंकी घोषित किए जाने के बाद भारत अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद से इनके प्रत्यर्पण की मांग मजबूती से कर सकता है। तब पाकिस्तान के लिए इन सबूतों की अनदेखी करना संभव नहीं होगा। वह पहले ही कुलभूषण जाधव के मामले में अंतरराष्ट्रीय अदालत में मुंह की खा चुका है। उसके झूठे दावे और दलीलें खारिज हो चुकी हैं। इसी तरह ताजा घोषित आतंकियों की हकीकत पर परदा डालना उसके लिए आसान नहीं होगा। आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहे देशों का भी इसमें भरपूर समर्थन प्राप्त होगा।

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