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संपादकीय: प्रतिभा का मैदान

शेफाली के इस प्रदर्शन के बाद स्वाभाविक ही उनकी तुलना सचिन तेंदुलकर जैसी प्रतिभा के साथ की गई है।

Author Published on: November 12, 2019 2:43 AM
महज सोलह साल से भी कम उम्र की शेफाली ने अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैच में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलते हुए ताबड़तोड़ उनचास गेंदों में तिहत्तर रन बना लिए।

यह एक आम हकीकत है कि अगर अवसर का अभाव न हो तो प्रतिभाओं को खोजना बहुत मुश्किल नहीं होता। खासतौर पर खेल के मैदानों में यह अक्सर साबित होता रहा है कि किसी गुमनाम खिलाड़ी ने बहुत कम उम्र में ही अपने प्रदर्शन से दुनिया को चौंका दिया। पिछले दो दिनों में दो बार शेफाली वर्मा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जिस तरह का प्रदर्शन किया है, उसने न केवल सबका ध्यान खींचा है, बल्कि यह भारतीय क्रिकेट में भविष्य के लिए एक उम्मीद भी है। महज सोलह साल से भी कम उम्र की शेफाली ने अंतरराष्ट्रीय टी-20 मैच में वेस्टइंडीज के खिलाफ खेलते हुए ताबड़तोड़ उनचास गेंदों में तिहत्तर रन बना लिए और फिर अगले ही दिन पैंतीस गेंदों पर उनहत्तर रनों की नाबाद पारी खेल कर भारत को जीत दिलाई।

उनका यह प्रदर्शन इस लिहाज से ऐतिहासिक है कि इससे उनके हिस्से एक बड़ा रेकॉर्ड आया जो अब से तीस साल पहले क्रिकेट के एक मजबूत स्तंभ रहे सचिन तेंदुलकर ने बनाया था और अब तक उसे कोई तोड़ नहीं सका था। यानी इससे पहले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक जड़ने वाले सचिन सबसे युवा खिलाड़ी थे, जिन्होंने अपना पहला टेस्ट अर्धशतक सोलह साल और दो सौ चौदह दिन की उम्र में बनाया था। जबकि शेफाली ने यह उपलब्धि पंद्रह साल, दो सौ पचासी दिन की उम्र में हासिल की।

शेफाली के इस प्रदर्शन के बाद स्वाभाविक ही उनकी तुलना सचिन तेंदुलकर जैसी प्रतिभा के साथ की गई है, क्योंकि वेस्टइंडीज जैसी आक्रामक क्रिकेट टीम के सामने उन्होंने जिस तरह ताबड़तोड़ रन बनाए और मैदान में टिकी भी रहीं, वह उनके प्रदर्शन को सामान्य से अलग ले जाकर खास बनाता है। निश्चित रूप से इस शानदार प्रदर्शन के बाद उनके नाम यह महत्त्वपूर्ण रेकार्ड आया है, लेकिन इससे ज्यादा अहम बात यह है कि क्रिकेट को जिस तरह एक कलात्मक खेल भी माना जाता है, उसमें उन्होंने अपनी क्षमता साबित की।

गौरतलब है कि शेफाली हरियाणा के रोहतक इलाके की रहने वाली हैं। महिलाओं को लेकर एक जड़ धारणा वाले समाज से निकल कर शेफाली ने क्रिकेट की दुनिया में अपनी जो जगह बनाई है, उसके लिए उनकी तुलना सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग से की जाती है। पिछले महीने ही सूरत में दक्षिण अफ्रीका की टीम के खिलाफ अपने दूसरे ही टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में उन्होंने छियालीस रनों की शानदार पारी खेली थी। इसके अलावा, उन्हें अभी से मैदान में टिक कर खेलने और शानदार साझेदारी के लिए भी जाना जाने लगा है।

साफ है कि अगर उन्हें लगातार मौके मिलें तो आने वाले दिनों में वे भारतीय महिला क्रिकेट टीम की एक मजबूत स्तंभ के रूप में सामने आ सकती हैं, क्योंकि अवसर की निरंतरता ही किसी खिलाड़ी की प्रतिभा को निखारती है। यों भी अपने देश में महिला क्रिकेट की बड़ी उपलब्धियों को भी उस पैमाने की तवज्जो नहीं मिल पाती है, जितनी पुरुष टीमों की आम कामयाबियों को भी मिलती है।

हालांकि यह एक तथ्य है कि प्रतिभाएं मौके की मोहताज होती हैं और उनकी पहचान कर अगर सही समय पर उन्हें मौका मुहैया कराया जाए तो ऐसे तमाम बच्चे-किशोर उभर कर सामने आ सकते हैं, जिनकी काबिलियत अवसर के अभाव में गुमनाम ही दम तोड़ देती है। जरूरत इस बात की है कि खेल संगठनों से लेकर संबंधित सरकारी महकमे तक सचेतन प्रयास करके दूरदराज के इलाकों में छिपी प्रतिभाओं की खोज करें, उन्हें सामने लाएं और हर स्तर पर जरूरी प्रशिक्षण और सुविधाएं देकर उन्हें निखारें।

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