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संपादकीय: सख्त चेतावनी

करीब ढाई महीने तक जब घाटी में कर्फ्यू था और संचार सेवाएं बंद थीं, तब उसकी हरकतें भी बंद थीं।

Author Published on: October 21, 2019 1:41 AM
आर्टिलरी गन का इस्तेमाल करते हुए भारतीय सेना ने यह हमला किया।

भारतीय सेना ने पाकिस्तान को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में कम से कम चार ऐसे ठिकानों को नष्ट कर दिया गया है, जहां से आतंकियों को भारतीय सीमा में घुसपैठ कराया जाता था। आर्टिलरी गन का इस्तेमाल करते हुए भारतीय सेना ने यह हमला किया। इसमें पाकिस्तान के चार से पांच सैनिकों के भी मारे जाने की खबर है। गौरतलब है कि पाकिस्तानी सेना लगातार संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रही थी। उड़ी, बारामूला और तंगधार आदि इलाकों में वह लगातार गोलीबारी कर रही थी। इस तरह उसकी इन हरकतों के चलते पिछले हफ्ते भारतीय सेना के दो जवान और एक नागरिक मारे गए थे। इसकी जवाबी कार्रवाई में भारतीय सेना ने यह हमला किया।

भारतीय सेना लगातार चेतावनी देती रही है कि पाकिस्तानी सेना उसे उकसाने का प्रयास न करे। उसकी हरकतों का सख्त जवाब दिया जाएगा, मगर वह इसे समझने को तैयार नहीं। पिछले एक साल में पाकिस्तानी सेना ने जितनी बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया, उतना शायद ही कभी हुआ होगा। इसके बावजूद पाकिस्तानी हुकूमत दुनिया भर में यही साबित करने का प्रयास करती रही है कि भारत ही उसे परेशान कर रहा है।

मगर अब पाकिस्तान की इन दलीलों का अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कोई असर नहीं होता। जबसे कश्मीर में अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटाया गया है, पाकिस्तान की खीज लगातार बढ़ती गई है। वह अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में घूम-घूम कर बताता रहा है कि भारत ने कश्मीरी लोगों के साथ अन्याय किया है। मगर हर जगह से उसे मुंह की खानी पड़ी है। कोई भी देश उसके समर्थन में खुल कर सामने नहीं आया है। जो दबी जुबान उसका साथ देते दिख रहे हैं, वे भी उसे कोई बल प्रदान करने वाले नहीं हैं। इससे पाकिस्तान की खीज और बढ़ गई है। इसी का नतीजा है कि वह कश्मीर में अस्थिरता बनाए रख कर भारतीय सुरक्षा-व्यवस्था को चुनौती देने का प्रयास कर रहा है।

करीब ढाई महीने तक जब घाटी में कर्फ्यू था और संचार सेवाएं बंद थीं, तब उसकी हरकतें भी बंद थीं। पर अब जनजीवन सामान्य बनाने के इरादे से जब कर्फ्यू हटा लिया गया है, संचार सेवाएं आंशिक रूप से खोल दी गई हैं, उसने चरमपंथी संगठनों को सक्रिय कर दिया है। छिपी बात नहीं है कि पाकिस्तानी सेना संघर्षविराम का उल्लंघन या बिना उकसावे के गोलीबारी इसलिए करती है कि सीमा पार पनाह पाए आतंकियों की भारतीय सीमा में घुसपैठ करा सके।

पाकिस्तान की समस्या यह है कि वहां कोई एक निजाम नहीं है। वहां की सरकार अपने ढंग से काम करना चाहती है, मगर उस पर सेना और खुफिया एजंसी आइएसआइ का शिकंजा रहता है। सेना अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए भारतीय सीमा पर अस्थिरता बनाए रखना चाहती है। वह युद्ध की धमकी देती तो रहती है, लेकिन उसे यह हकीकत भी अच्छी तरह पता है कि भारतीय सेना के सामने वह टिक नहीं सकती।

सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट में हमले करके जिस तरह भारतीय सेना ने आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया, उससे पहले ही उसे अंदाजा हो गया था। अब तंगधार के उस पार वाले इलाके में आर्टिलरी गन से निशाना बना कर भारतीय सेना ने एक नई रणनीति का परिचय दिया है। पर पाकिस्तान इससे भी कितना सबक सीखेगा, कहना मुश्किल है। संघर्ष विराम और आतंकी घुसपैठ आदि के जरिए वह अपना ही ओछापन जाहिर करता है।

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