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पिछले कुछ समय से उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया अपने मसलों को हल करने के लिए एक सहज हालात बनाने की कोशिश में हैं। ऐसे में दक्षिण कोरिया को भी इस बात का एहसास होगा कि युद्ध और तनाव के माहौल में किस ओर बढ़ा जा सकेगा।

Author March 5, 2019 3:42 AM
किम जोंग उन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फोटो सोर्स : Reuters)

रविवार को दक्षिण कोरिया और अमेरिका के वार्षिक संयुक्त युद्धाभ्यास को बंद करने की घोषणा को मौजूदा विश्व की स्थिति के मद्देनजर एक अहम घटनाक्रम के रूप में देखा जा सकता है। यह सही है कि किसी एक छोटी घटना या मामले की वजह से शांति या फिर किसी भी यथास्थिति में अक्सर तेजी से बदलाव आता दिखता है और कई बार सब कुछ ठीक होने के बाद उस पर पानी फिर जाता है। मगर दक्षिण कोरिया और अमेरिका के ताजा फैसले की पृष्ठभूमि में चूंकि उत्तर कोरिया के साथ संबंधों और संभावित हालात का भी खयाल है, इसलिए उम्मीद की जानी चाहिए कि समूचे कोरियाई प्रायद्वीप की शांति की दिशा में यह एक अहम पहलकदमी साबित होगी। आमतौर पर साल के इन्हीं महीनों के दौरान किया जाने वाला ‘फोल ईगल’ अभ्यास अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाला एक बड़ा संयुक्त सैन्य अभ्यास है। ऐसे मौके पहले भी आए हैं जब उत्तर कोरिया ने इस युद्धाभ्यास को क्षेत्रीय समस्या पैदा करने वाला एक मुख्य कारक बताया है और अपनी स्पष्ट नाराजगी जाहिर की है। बल्कि इस आयोजन को वह घुसपैठ की कोशिश भी बताता रहा है। अब फिलहाल युद्धाभ्यास को स्थगित करने के फैसले के बाद देखना है कि इसे अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सेना की तैयारियों को लेकर क्या आकलन सामने आते हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई बातचीत एक तरह से बेनतीजा रही। उत्तर कोरिया ने साफ तौर पर यह जता दिया कि जब तक उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों को नहीं हटाया जाता है, तब तक परमाणु हथियारों को कम करने या निरस्त्रीकरण को लेकर उससे बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं की जानी चाहिए। हालांकि उत्तर कोरिया का कहना है कि उसने प्रतिबंधों में आंशिक राहत देने की ही मांग की थी। लेकिन अमेरिका का रुख इसके प्रति सकारात्मक नहीं दिख रहा है। जाहिर है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो इस क्षेत्र में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच सहयोग और खासतौर पर युद्धाभ्यास के मसले पर उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया का अंदाजा लगाया जा सकता है। यह प्रतिक्रिया प्रत्यक्ष और सैन्य न भी हो तो शायद शांति की स्थितियों के लिए सकारात्मक नहीं होगी।

इसलिए अगर युद्धाभ्यास की प्रक्रिया को कुछ समय के लिए टाला जाता है तो इसे तनाव बढ़ने की चिंता से निपटने की कोशिश के तौर पर देखा जाएगा। इससे दोनों पक्षों के बीच सैन्य कार्रवाई की तीव्रता को कम करने में मदद मिलेगी। दरअसल, पिछले कुछ समय से उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया अपने मसलों को हल करने के लिए एक सहज हालात बनाने की कोशिश में हैं। ऐसे में दक्षिण कोरिया को भी इस बात का एहसास होगा कि युद्ध और तनाव के माहौल में किस ओर बढ़ा जा सकेगा। शायद इसी पृष्ठभूमि में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच इस बात पर सहमति बनी कि फिलहाल वार्षिक संयुक्त युद्धाभ्यास को रोक दिया जाए, ताकि शांति की ओर बढ़ते कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव या टकराव की किसी नई स्थिति से बचा जा सके। बल्कि कहा जा सकता है कि इस पहलकदमी का एक मुख्य मकसद उत्तर कोरिया से जुड़े संकट को खत्म करने की कोशिश है, जो इसे आक्रमण की मंशा से किए जा रहे अभ्यासों के तौर पर देखता है। यों भी, किसी भी युद्ध के नतीजे का अंदाजा लगाना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं होता। इसलिए युद्ध की स्थिति पैदा होने से पहले ही अगर उसे खत्म करने की कोशिश होती है तो यह एक शांतिपूर्ण विश्व के हित में होगी।

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