ताज़ा खबर
 

संपादकीय: पाक को झटका

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही कूटनीतिक नाकामी से पाकिस्तान का तिलमिलाना स्वाभाविक है।

Author Published on: September 4, 2019 1:06 AM
कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण कर पाकिस्तान ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है।

दुनिया का शायद ही कोई ऐसा मंच हो, जहां कश्मीर मसले पर पाकिस्तान को मुंह की न खानी पड़ी हो। जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निष्क्रिय करने के भारत सरकार के फैसले से बौखलाया पाकिस्तान पिछले एक महीने में संयुक्त राष्ट्र से लेकर अमेरिका सहित कई देशों की शरण में जा चुका है और कश्मीर मुद्दे पर समर्थन हासिल करने की कोशिशें करता रहा है। मगर उसे सब जगह से निराशा ही हाथ लगी है। हाल में मालदीव जैसे छोटे-से देश में भी पाकिस्तान को ऐसा ही झटका लगा। मालदीव में दक्षिण एशियाई देशों के स्पीकरों के शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने कश्मीर का मसला उठाया, लेकिन उसे कोई तवज्जो नहीं मिली, बल्कि सम्मेलन के बाद जारी माले घोषणापत्र में भी कश्मीर पर पाकिस्तान के सारे दावों को खारिज कर दिया गया। पाकिस्तान के लिए यह एक और बड़ी कूटनीतिक हार है। यह इस बात का प्रमाण है कि कश्मीर मसले पर अब दुनिया के राष्ट्र भारत के रुख का समर्थन कर रहे हैं।

पहली बात तो यह कि माले के शिखर सम्मेलन में कश्मीर मुद्दा उठाने का कोई औचित्य ही नहीं था। यह सम्मेलन दक्षिण एशियाई देशों की संसद के सदनों के अध्यक्षों का था और इसका मूल विषय सतत विकास था। लेकिन पाकिस्तान के प्रतिनिधि यहां भी बाज नहीं आए और विकास के मूल विषय से हटते हुए कश्मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश की। इस पर भारत ने कड़ा प्रतिकार किया और संबंधित देशों के प्रतिनिधियों ने भी इस पर कड़ी आपत्ति की। सदस्यों का कहना था कि इस मंच से कश्मीर का मसला इस मंच से नहीं उठाया जा सकता। मालदीव की संसद के अध्यक्ष ने तो साफ कहा कि इस फोरम पर किसी देश के अंदरूनी मामले को नहीं उठाया जा सकता। इसीलिए कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तानी प्रतिनिधियों के बीच जो संवाद हुआ है उसे कार्यवाही से निकाल दिया गया और इसी वजह से घोषणापत्र में भी कश्मीर मसले पर कुछ नहीं कहा गया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही कूटनीतिक नाकामी से पाकिस्तान का तिलमिलाना स्वाभाविक है। कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण कर पाकिस्तान ने अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है। कश्मीर मुद्दे का अंतरराष्ट्रीयकरण और भारत के खिलाफ झूठा प्रचार पाकिस्तान सरकार की रणनीति का हिस्सा अभिन्न हिस्सा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान खुद कह चुके हैं कि उनके विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी दुनिया के तमाम मुल्कों में जा-जाकर उनके राष्ट्र प्रमुखों से मिलेंगे और बताएंगे कि कश्मीर में भारत क्या कर रहा है।

इसी रणनीति के तहत पिछले एक महीने में पाकिस्तान ने इस्लामी देशों सहित कई देशों से कश्मीर पर समर्थन मांगा। लेकिन उन्हें हाथ कुछ नहीं लगा। यहां तक कि इस्लामी देशों के संगठन तक से कोई भरोसा या मदद के संकेत नहीं मिले। किसी देश ने अनुच्छेद 370 को खत्म करने के भारत के फैसले को गलत नहीं बताया बल्कि साफ कहा कि यह भारत का अंदरूनी मामला है। सवाल है कि ऐसे में पाकिस्तान करे तो क्या करे। शाह महमूद कुरैशी तो पाक अधिकृत कश्मीर में एक जनसभा में इस हकीकत को स्वीकार कर चुके हैं कि कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान को दुनिया के मुल्कों का समर्थन मिलना आसान नहीं है। लेकिन पाकिस्तान की हुकूमत इस सच्चाई से मुंह मोड़ रही है और अपनी अवाम की आंखों में धूल झोंक रही है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 संपादकीय: जाधव का हक
2 संपादकीय: संकट और चुनौती
3 राजनीति: बांध ही बचाएंगे बाढ़ से