ताज़ा खबर
 

संपादकीय: घोटाले का घुन

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस सुरक्षा संबंधी अनेक कार्यों में होमगार्डों की मदद लेती है।

Author Published on: November 16, 2019 2:27 AM
गौतम बुद्ध नगर जिले में फर्जी तैनाती दिखा कर राजकोष से पैसा निकाला जाता रहा।

घूस और अन्य गैरकानूनी तरीके से धन कमाने को लेकर पुलिस महकमा सबसे अधिक बदनाम रहा है। मगर अपने ही कर्मियों के वेतन में घोटाला करने की उसकी नई करतूत सामने आई है। गौतम बुद्ध नगर जिले में मिली शिकायत पर जांच की गई तो पता चला कि यहां के थानों में पुलिस अधिकारी फर्जी तरीके से हस्ताक्षर करके होमगार्डों की तैनाती दिखाते और उनके हिस्से का वेतन अपनी जेब के हवाले करते रहे। वे होमगार्डों की तैनाती कागज पर तो दिखाते थे, पर वास्तव में उनकी तैनाती नहीं की जाती थी।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में पुलिस सुरक्षा संबंधी अनेक कार्यों में होमगार्डों की मदद लेती है। उन्हें तैनाती के आधार पर वेतन का भुगतान किया जाता है। यानी जितने दिन उनकी तैनाती होती है, उतने ही दिन का वेतन मिलता है। उनकी तैनाती संबंधित थानाध्यक्ष करते हैं। गौतम बुद्ध नगर जिले में फर्जी तैनाती दिखा कर राजकोष से पैसा निकाला जाता रहा। फिलहाल होमगार्ड महानिदेशक ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति गठित कर दी है। देखना है, राज्य के दूसरे जिलों में भी ऐसी अनियमितताओं का पर्दाफाश हो पाता है या नहीं।

कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश सरकार के पच्चीस हजार होमगार्डों की छंटनी के फैसले को लेकर काफी विरोध हुआ था। बहुत सारे युवा, जिन्हें कहीं और रोजगार नहीं मिल पाता, होमगार्ड की नौकरी मिलने से गुजारे भर की कमाई का सहारा पा जाते हैं। इसलिए उनकी छंटनी पर विरोध स्वाभाविक था। मगर लोभी पुलिस अधिकारी इस तरह उनके हिस्से का धन हड़पते रहे, यह कम अमानवीय व्यवहार नहीं है। दरअसल, घोटालेबाजी एक प्रवृत्ति है। ऐसे लोगों को सिर्फ अपना मुनाफा दिखता है, किसी की मजबूरी या किसी तरह की नैतिकता उनके लिए कोई मायने नहीं रखती।

इसी तरह का घोटाला कुछ साल पहले दिल्ली नगर निगम में भी उजागर हुआ था, जिसमें निगम के अधिकारी सफाई कर्मियों की फर्जी तैनाती दिखा कर उनके हिस्से का पैसा हड़पते रहे। वहां फर्जी तौर पर बहुत सारे नियमित कर्मी भर्ती कर लिए गए थे, जो कागजों में तो दर्ज थे, मगर वास्तव में काम पर तैनात नहीं थे। उनका वेतन अधिकारियों की जेब में जाता था। इस प्रवृत्ति पर काबू पाया गया। जिन महकमों या योजनाओं में इस तरह दिहाड़ी पर या अनियमित रूप से कर्मी नियुक्त किए जाते हैं, वहां ऐसे घोटालों की गुंजाइश अधिक होती है। उत्तर प्रदेश में ऐसे घोटालों की फेहरिस्त कुछ लंबी है। कुछ साल पहले स्वास्थ्य बीमा में व्यापक घोटाला और हाल में बिजली विभाग के कर्मचारियों की भविष्य निधि में घोटाला भी कुछ ऐसे ही उदाहरण हैं।

सरकारी धन की लूट में अक्सर कड़ियां बहुत दूर तक जुड़ी होती हैं। इसलिए यह मामला केवल गौतम बुद्ध नगर जिले तक सीमित होगा, कहना मुश्किल है। अगर निष्पक्ष जांच हो तो इसकी कड़ियां दूसरे जिलों से भी जुड़ी मिल सकती हैं। इसमें वास्तव में कितनी रकम घोटाले की भेंट चढ़ी है, उसका भी पता लग सकेगा। कुछ अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज तो की गई है, पर इसमें कहां तक न्याय हो पाएगा, यह भी जांच की निष्पक्षता पर निर्भर करता है। मगर उत्तर प्रदेश में जिस तरह अनियमितताओं और उन पर परदा डालने की लंबी परंपरा रही है, उसे देखते हुए किसी सकारात्मक नतीजे की उम्मीद धुंधली ही बनी हुई है। जब तक सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने का तंत्र विकसित नहीं होगा, तब तक ऐसे घोटालों पर रोक लगाना संभव नहीं है।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 संपादकीय: आतंक के विरुद्ध
2 संपादकीय: बेकाबू महंगाई
3 संपादकीय: रफाल की गुत्थी
जस्‍ट नाउ
X