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संपादकीय: सुरक्षा का सफर

आए दिन होने वाले हादसों में कई लोग अपने सामने देखते हैं कि हेलमेट नहीं होने की वजह से ही पीड़ित व्यक्ति को गंभीर चोट लगी और उसकी मौत हो गई।

Author May 16, 2019 1:27 AM
यह नियम समूचे नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लागू होगा

सड़क पर दुपहिया वाहन चलाने वाले ऐसे तमाम लोग दिख जाते हैं जो हेलमेट पहनना जरूरी नहीं समझते। ऐसे लोगों को न सिर्फ इस बात की फिक्र नहीं ही होती कि वे गैरकानूनी तरीके से वाहन चला कर कोई अपराध कर रहे हैं, बल्कि यह भी याद रखना जरूरी नहीं लगता कि इस तरह की लापरवाही बरत कर वे अपनी जान को जोखिम में डाल रहे हैं। देश भर में अलग-अलग राज्यों में लोगों की इस आदत पर लगाम के लिए अभियान चलाए जाते हैं, कानूनन जुर्माना भी लगाया जाता है, मगर यह समझना मुश्किल है कि अपनी ही सुरक्षा को लेकर ऐसी लापरवाही के पीछे किस तरह का शौक है जो सुरक्षित सफर और हादसे की स्थिति में जिंदा बचने की जरूरत पर हावी हो जाता है। एक ताजा पहलकदमी के तहत उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में एक जून से वैसे दुपहिया वाहन के चालकों को पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल नहीं दिया जाएगा, जिन्होंने हेलमेट नहीं पहना होगा। यह नियम समूचे नोएडा और ग्रेटर नोएडा में लागू होगा। जाहिर है, यह किसी राज्य के एक खास इलाके के प्रशासन की ओर से की गई पहल है, जिसमें बिना हेलमेट पहने दुपहिया वाहन चलाने वालों को संदेश देने की कोशिश की जाएगी कि अगर वे अपनी जान और हिफाजत को लेकर सावधानी नहीं बरतेंगे तो उसके बदले उन्हें न सिर्फ जुर्माना देना पड़ सकता है, बल्कि पेट्रोल नहीं मिलने जैसी असुविधा भी उठानी पड़ सकती है।

यह एक जगजाहिर तथ्य है कि सड़क हादसों में दुपहिया चलाने वाले जितने लोगों की जान गई है, उनमें से ज्यादातर की जान सिर्फ हेलमेट पहनना सुनिश्चित करके बचाई जा सकती थी। आए दिन होने वाले हादसों में कई लोग अपने सामने देखते हैं कि हेलमेट नहीं होने की वजह से ही पीड़ित व्यक्ति को गंभीर चोट लगी और उसकी मौत हो गई। इसके बावजूद लोग महज अपने आराम या शौक के लिए तो कभी धार्मिक पहचान के नाम पर हेलमेट पहनने से बचने या इनकार करने की कोशिश करते हैं। दिल्ली में महिलाओं के लिए हेलमेट पहनना अनिवार्य करने के सवाल पर काफी जद्दोजहद देखी गई थी। जबकि दुपहिया वाहन के हादसे की स्थिति में चोट किसी को भी बराबर ही लगेगी। आज भी सड़कों पर ऐसे दृश्य आम हैं जिनमें दुपहिया चालक और उस पर बैठे लोग बिना हेलमेट के होते हैं।

कई लोग अपने दुपहिया वाहन में हेलमेट लटका कर रखते हैं और यातायात पुलिस के जुर्माने से बचने के लिए कभी-कभार लगा लेते हैं। हेलमेट पहन कर वाहन चलाना कोई ऐसा काम नहीं है, जिससे किसी तरह की असुविधा होती हो। लेकिन कई बार लोग अपने हेलमेट को पहनना जरूरी नहीं समझते और इस बात को लेकर बेफिक्र रहते हैं कि कुछ नहीं होगा। सच यह है कि हादसे अचानक ही होते हैं, जिसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं होता। मामूली-सी कोताही की वजह से चालक हादसे की चपेट में आ जाता है। ऐसी स्थिति में अगर उसके सिर पर हेलमेट होता है तो गंभीर चोट लगने की गुंजाइश कम हो जाती है। कायदे से होना यह चाहिए कि दुपहिया चलाने और उस पर पीछे बैठ कर सफर करने वालों को खुद ही अपनी सुरक्षा को लेकर जागरूक होना चाहिए और हर हाल में हेलमेट पहनना चाहिए। हेलमेट चालक की ही सुरक्षा के लिए है, जिसके लिए सरकार को कानून बना कर लागू करना पड़ा। लेकिन क्या यह किसी व्यक्ति की अपनी जिम्मेदारी नहीं होनी चाहिए कि वह अपने साथ-साथ वाहन पर बैठे अन्य साथी के सुरक्षित सफर को लेकर सजग रहे?

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