ताज़ा खबर
 

संपादकीय: सुरक्षा का सफर

इसके अलावा, नाबालिगों और किशोरों के वाहन चलाने और नियम तोड़ने की स्थिति में अब वाहन के मालिक या फिर अभिभावक को दोषी माना जाएगा और तीन साल की सजा के साथ-साथ पच्चीस हजार रुपए तक का जुर्माना वसूला जाएगा।

traffic rule breaking fine, vehicle premium, ministry, irdai, traffic rule increase vehicle premium, highway road ministryवाहनों की चेकिंग करता हुआ ट्रैफिक पुलिसकर्मी।

सड़कों पर यातायात से संबंधित जितने भी नियम-कानून बनाए गए हैं, उसका मकसद मुसाफिरों या वाहन चालकों की सुरक्षा और सुविधा ही सुनिश्चित करना है। लेकिन यह विचित्र विडंबना है कि बेहद मामूली सुविधा से लेकर महज शान बघारने के लिए कुछ लोग उन नियम-कायदों को धता बताने से नहीं हिचकते। जबकि इससे पैदा जोखिम का शिकार वे भी होते हैं। हालांकि इन नियमों का पालन करने के लिए संबंधित महकमे कई बार सख्ती बरतते हैं और इनका उल्लंघन करने वालों को कानूनी तौर पर कैद या आर्थिक रूप से दंडित भी किया जाता है, लेकिन आज भी सड़क पर नियमों के उल्लंघन को रोक पाना मुश्किल काम है। हैरानी है कि लापरवाही बरतने वाले पकड़ में आते हैं तो कई बार बिना किसी संकोच के निर्धारित आर्थिक दंड चुका देते हैं, मगर नियम तोड़ने पर कोई अफसोस जताना जरूरी नहीं समझते। इसलिए अक्सर ऐसे सुझाव सामने आते रहे हैं कि सड़क यातायात नियमों के उल्लंघन पर तय जुर्माने की रकम को इतना कर दिया जाना चाहिए, ताकि आरोपी के लिए उसे चुकाना भारी पड़े और वह भविष्य में ऐसी गलती करने से बचे।

शायद यही वजह है कि सोमवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मोटर वाहन (संशोधन) विधेयक के जिस मसौदे को मंजूरी दी है, उसके मुताबिक अब यातायात नियमों के उल्लंघन पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान किया है। मसलन, बिना लाइसेंस, शराब के नशे में, निर्धारित सीमा से तेज और तय मानकों से ज्यादा लोगों को बिठा कर खतरनाक तरीके से गाड़ी चलाने जैसे नियमों के उल्लंघन पर कड़े जुर्माने का प्रावधान किया गया है। हालांकि जुर्माने की रकम पहले भी कम नहीं थी, फिर भी नियमों को तोड़ने और आर्थिक दंड चुका कर वही गलती दोहराने की प्रवृत्ति में कोई फर्क नहीं आ रहा था। अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि किसी मरीज को आपात स्थिति में ले जाने वाली एंबुलेंस तक के लिए लोग रास्ता छोड़ने को तैयार नहीं होते। जबकि एंबुलेंस के रास्ते में बहुत कम वक्त के लिए भी बाधा बनना उसमे मौजूद मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। दुनिया के कई देशों में मरीज को ले जाती एंबुलेंस का संकेत भर मिलने पर सड़क पर मौजूद लगभग सभी गाड़ियां रास्ता पूरा खाली कर देती हैं, ताकि एंबुलेंस आसानी से आगे निकल जाए।

इसके अलावा, नाबालिगों और किशोरों के वाहन चलाने और नियम तोड़ने की स्थिति में अब वाहन के मालिक या फिर अभिभावक को दोषी माना जाएगा और तीन साल की सजा के साथ-साथ पच्चीस हजार रुपए तक का जुर्माना वसूला जाएगा। यातायात नियमों का खयाल नहीं रखना बुनियादी रूप से लापरवाही और दिखावे के रोग से जुड़ी समस्या है, जिसका न केवल आर्थिक तौर पर, बल्कि कई बार अपने जीवन को भी भारी नुकसान वाहन चलाने वालों को ही भुगतना पड़ता है। कई बार लगता है कि इस मसले पर व्यापक जन-जागरूकता और ऐसे संदेश प्रसारित करने की जरूरत है कि सड़कों पर नियमों का पालन करना सभ्य और बेहतर इंसान होने का परिचायक है, जबकि उसे तोड़ना असभ्यता के साथ-साथ आपराधिक आचरण भी है। चूंकि समाज के ज्यादातर लोग आपराधिक प्रवृत्ति के नहीं होते हैं, इसलिए शायद ही कोई व्यक्ति अपने लिए असभ्य और आपराधिक पहचान को पसंद कर पाएगा। यह कोई छिपी बात नहीं है कि हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट बांधने, चौराहे की लालबत्ती पर रुकने जैसे तमाम साधारण यातायात नियमों का पालन नहीं करने की वजह से देश भर में रोजाना न जाने कितने हादसे होते हैं और लोगों की जान चली जाती है। इसलिए नई कानूनी व्यवस्था के जरिए अगर इस पर रोक लगाई जा सकी तो यह सबके हित में होगा।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 संपादकीय: संरक्षणवाद के विरुद्ध
2 संपादकीय: अपराध और सवाल
3 संपादकीय: सहिष्णुता का पैमाना