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संपादकीय: अमीरी का आंकड़ा

मोटे तौर पर अमीर वही है जो हर तरह के आर्थिक संसाधनों से संपन्न है, जिसके पास खासी संपत्ति हो, उद्योग-धंधों, निवेश, विदेश व्यापार जैसी गतिविधियों में उसकी भागीदारी हो।

Author Published on: October 19, 2019 1:41 AM
इनकी चल-अचल संपत्ति का अनुपात साठ-चालीस का है।(सांकेतिक तस्वीर)

भारत में बड़े अमीरों की संपत्ति बढ़ने की रफ्तार में कमी आई है, यह सुन कर गरीबों को थोड़ी देर के लिए सुकून मिल सकता है। लेकिन पिछले कुछ सालों में भारत में अमीर जिस तेजी से और अमीर हुए हैं और गरीबों की गरीबी और ज्यादा बढ़ी है, यह हैरान करने वाला तथ्य है। जाहिर है, असमानता कम होने के बजाय और बढ़ती जा रही है। अमीर-गरीब के बीच खाई और चौड़ी हुई है, यह एक प्रामाणिक सच्चाई है। ऐसे में समतामूलक समाज की कल्पना तो नहीं की जा सकती! देश में गरीब और मध्यम वर्ग का तबका सबसे बड़ा है और यही असल गरीब भी है।

अरबपतियों की तादाद तो सिर्फ कुछ लाख ही है। इसलिए ऐसे में जब अरबपतियों की संख्या बढ़ने-घटने या उनकी संपत्ति में कमी-बेशी होने की खबरें आती हैं, तभी गरीब को इनकी भनक लगती है। हाल में धन प्रबंधन का आकलन करने वाली एक संस्था कार्वी वेल्थ मैनेजमेंट ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि पिछले साल अमीरों की संपत्ति वृद्धि की दर घट कर 9.62 फीसद रह गई है जो पूर्ववर्ती वर्ष (2017) में साढ़े तेरह फीसद थी। अमीरों की संख्या भी घटी है। रिपोर्ट बताती है कि भारत में अरबपतियों की संख्या दो लाख तिरसठ हजार से घट कर दो लाख छप्पन हजार रह गई, यानी सात हजार लोग अरबपति से करोड़पति की श्रेणी में आ गए। इसलिए एक सवाल यह भी उठता ही है कि अमीर के साथ ऐसा क्या हो रहा है कि उसकी संपत्ति में गिरावट आ रही है और अरबपति की श्रेणी से बाहर हो रहा है।

सवाल है कि अमीर या बड़ा अमीर है कौन। मोटे तौर पर अमीर वही है जो हर तरह के आर्थिक संसाधनों से संपन्न है, जिसके पास खासी संपत्ति हो, उद्योग-धंधों, निवेश, विदेश व्यापार जैसी गतिविधियों में उसकी भागीदारी हो। करोड़पति भी अमीर ही हैं, लेकिन इनकी संख्या कुछ करोड़ों में ही होगी। मध्यवर्ग और निम्न वर्ग ही हैं जिन्हें रोजगार की समस्या से सबसे ज्यादा रूबरू होना पड़ रहा है। लोगों के पास काम के अवसर सीमित होते जा रहे हैं और इसलिए इनमें भी एक बड़ा तबका ऐसा बनता जा रहा है जो आज पंद्रह-बीस हजार की नौकरी करने के लिए मजबूर है। जाहिर है, ऐसे में निम्न आय वर्ग का तबका और बड़ा होता जाएगा। पर अमीरों पर कोई असर इसलिए नहीं पड़ने वाला क्योंकि यह वर्ग करोड़पति और अरबपति के बीच ही बना रहेगा।

अगर बड़े अमीरों की तादाद घट रही है तो यह इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं सरकार की आर्थिक नीतियां ऐसी हैं जिनसे अमीरों पर असर पड़ रहा है। पर आमजन तो यही सोचता है कि अगर अमीर के पास से पैसा निकल रहा है तो वह गरीब को क्यों नहीं मिल रहा! संपत्ति के लिहाज से देखें तो भारत के अमीरों के पास मौजूद कुल संपत्तियों में दो सौ बासठ लाख करोड़ रुपए की वित्तीय संपत्ति है।

इनकी चल-अचल संपत्ति का अनुपात साठ-चालीस का है। इस तरह की खबरें हैरान इसलिए करती हैं कि ये अमीरी के आंकड़े और इनकी गाथा उस देश में है जो भुखमरी से निपट पाने के मामले में वैश्विक पैमाने पर पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों से भी नीचे है। जहां आज भी करोड़ों बच्चे कुपोषण के शिकार हैं, आबादी का बड़ा हिस्सा बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित है, बच्चों को शिक्षा के अवसर वैसे नहीं हैं जो मिलने चाहिए। ग्रामीण भारत की हालत तो आज भी चिंताजनक है। ऐसे में भारत पांच लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था बनने का सपना देख रहा है। अमीर अपनी घटती दौलत से परेशान हैं। ऐसे में गरीब की चिंता करने वाला कौन है?

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