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संपादकीय: बेलगाम अपराध

महिलाओं की सुरक्षा के मसले पर जताई जाने वाली फिक्र से लेकर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ तक के नारे के बीच महिलाओं के खिलाफ अपराध की जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं, वे या तो बेहद निराशा पैदा करती हैं या फिर क्षोभ।

Author May 10, 2019 1:24 AM
राजस्थान की घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया। प्रतीकात्मक तस्वीर।

राजस्थान में अलवर के थानागाजी इलाके में एक महिला से सामूहिक बलात्कार की जैसी घटना सामने आई है, उसने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर किया है कि आखिर हमारे समाज में ऐसी विकृति की क्या वजहें हैं। हमारी सरकारें ऐसे अपराधों को रोकने के प्रति इस कदर विफल क्यों हैं! इस घटना पर इसलिए भी ज्यादा शर्म और क्षोभ पैदा होना चाहिए कि एक ओर जहां अपराधियों ने पति-पत्नी को रोका, पति को बांध कर यातनाएं दीं, पत्नी का सामूहिक बलात्कार किया, वीडियो बनाया, वायरल किया, वहीं पुलिस की भूमिका बेहद अफसोसनाक रही। छब्बीस अप्रैल को हुई घटना और इस पर चुप रहने की धमकी के बाद सदमे में जा चुके पीड़ित जब पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुंचे तो चुनाव का तर्क देकर उस पर तुरंत कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा गया। रास्ते में घेर कर सामूहिक बलात्कार की घटना को अंजाम देना अपराधियों की प्रवृत्ति हो सकती है, लेकिन पुलिस क्या इसी तरह की प्रतिक्रिया देने के लिए नियुक्त की गई है। किसी तरह जब इस घटना ने तूल पकड़ा तब जाकर सरकार ने नाम के लिए इसके जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की है। लेकिन क्या यह सच नहीं है कि पीड़ित के कमजोर तबके से होने की वजह से पुलिस को ऐसी टालमटोल करने की हिम्मत हुई?

इस जघन्य वारदात से जुड़े पहलू सबको चिंता में डालने वाले हैं। सवाल है कि बीस से पच्चीस साल के युवकों के भीतर रास्ते से गुजर रहे पति-पत्नी को रोकने, उनके साथ अधिकतम बर्बरता करने और उसका वीडियो बना कर वायरल कर देने की हिम्मत कहां से आई? अगर सरकार और प्रशासन ने अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से निभाई होती और कानून-व्यवस्था चौकस होती तो क्या अपराधी इतनी आसानी से सामूहिक बलात्कार की घटना को अंजाम दे पाते? आरोपों के मुताबिक यहां तो हालत यह रही कि पुलिस को तब तक शिकायत पर गौर करना जरूरी नहीं लगा, जब तक मामले पर आम लोगों के बीच रोष नहीं फैलने लगा। सवाल है कि राजस्थान की मौजूदा सरकार के पास इसका क्या जवाब है, जिसने जनता को पुरानी सरकार की कमियों का हवाला देकर सब कुछ दुरुस्त करने का भरोसा दिया था? क्या समाज में महिलाओं के खिलाफ दिनोंदिन बढ़ते अपराधों और पुलिस के ऐसे ही रवैये के साथ वह लोगों को नई संस्कृति देने का सपना देख रही है?

इससे बड़ी विडंबना और क्या होगी कि एक ओर हमारे देश में विकास के दावे के साथ सब कुछ अच्छा होने का भरोसा दिलाया जा रहा है और दूसरी ओर समाज में अपराध बढ़ रहे हैं। महिलाओं की सुरक्षा के मसले पर जताई जाने वाली फिक्र से लेकर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ तक के नारे के बीच महिलाओं के खिलाफ अपराध की जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं, वे या तो बेहद निराशा पैदा करती हैं या फिर क्षोभ। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और खासतौर पर बलात्कार के मसले पर अक्सर हमारा समाज उद्वेलित होता है, सड़क पर उतरता है, सरकारें कड़ी कार्रवाई का आश्वासन देती हैं। मगर इस मसले पर समाज से लेकर सरकार तक लगातार नाकाम हैं तो इसकी क्या वजहें हैं? विकास की प्रचलित परिभाषा में समाज कहां और क्यों छूट गया है कि जिन युवाओं की ऊर्जा सकारात्मक कामों में लगनी चाहिए थी, उसमें से बहुत सारे आधुनिक तकनीकी से लैस मोबाइल के सहारे अपराध की दुनिया का हिस्सा बन रहे हैं!

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