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संपादकीय: रंजिश में बरजोरी

ईरान पर दबाव बनाने के मकसद से ही अमेरिका ने भारत सहित कई देशों पर दबाव बनाया कि वे ईरान से कच्चे तेल की खरीद न करें। इन देशों ने तेल खरीद बंद भी कर दी है। इस तरह ईरान को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

Author Published on: July 22, 2019 12:49 AM
भारत ने वेनेजुएला से भी कच्चा तेल खरीदना बंद कर रखा है।

ब्रिटिश तेल टैंकर को ईरान ने अपने कब्जे में कर लिया है। इस जलपोत के चालक दल में अठारह भारतीय नागरिक भी हैं। ईरान का कहना है कि यह तेल टैंकर अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन करते हुए उसकी सीमा में घुस आया था, अब उसे कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा। हालांकि ब्रिटिश विदेश मंत्री ईरान के विदेश मंत्री से लगातार बातचीत कर रहे हैं, पर ईरान का रुख अड़ियल ही बना हुआ है। अब फ्रांस और जर्मनी ने कहा है कि ईरान का तेल टैंकर छोड़ दे। इधर भारत को उस पोत के चालक दल में शामिल अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता है। इस तरह ब्रिटिश तेल टैंकर पर ईरान के कब्जे को लेकर अंतरराष्ट्रीय सरगर्मी बढ़ गई है। ब्रिटिश विदेशमंत्री ने कहा है कि ईरान ने बदले की भावना से टैंकर पर कब्जा किया है। इसकी कुछ वजहें साफ हैं। ईरान एक तरफ तो यह कह रहा है कि उस जलपोत ने ईरान की एक मछली पकड़ने वाली नौका को टक्कर मारी, फिर यह भी कह रहा है कि पोत ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन किया। जबकि तेल टैंकर ईरानी सीमा में घुसने से पहले ही चार जहाजों और एक हेलिकॉप्टर से घेर लिया गया था। यानी उसे जबरन ईरान की सीमा में लाया गया।

ईरान की मंशा इससे भी समझ में आती है कि उसने ब्रिटेन के अलावा लाइबेरिया के एक तेल टैंकर को भी कब्जे में लिया था, मगर लाइबेरिया के पोत को उसी दिन रिहा कर दिया गया। इसलिए सवाल है कि अगर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हुआ था, तो दोनों पोतों पर समान रूप से कार्रवाई क्यों नहीं की गई। दरअसल, पिछले कुछ दिनों से ईरान, अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों में काफी खटास आ गई है। जबसे अमेरिका ने ईरान पर परमाणु संधि के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए खुद को अलग कर लिया है और अन्य देशों को भी ईरान से संबंध तोड़ने का दबाव बनाया है, तबसे ईरान नाराज है। बीते अप्रैल में तो उसने चेतावनी भरे शब्दों में अमेरिका को जवाब दिया था। ब्रिटेन ने भी ईरान पर दबाव बनाया है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम रद्द करे। अपने यूरेनियम उपयोग में कटौती कर सिर्फ तीन फीसद पर लाए। मगर ईरान की दलील है कि इससे उसकी ऊर्जा संबंधी जरूरतें पूरी नहीं हो पाएंगी। उसने प्रतिबंध के बाद अपने यूरेनियम संवर्धन में और बढ़ोतरी कर दी। इससे अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस सहित अनेक देश खुश नहीं हैं।

ईरान पर दबाव बनाने के मकसद से ही अमेरिका ने भारत सहित कई देशों पर दबाव बनाया कि वे ईरान से कच्चे तेल की खरीद न करें। इन देशों ने तेल खरीद बंद भी कर दी है। इस तरह ईरान को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी रंजिश के चलते उसने ब्रिटिश तेल टैंकर को कब्जे में लिया। इसमें बदले की भावना की शुरूआत इससे मान सकते हैं कि कुछ दिनों पहले ही अमेरिका ने दावा किया था कि उसने ईरान का एक ड्रोन मार गिराया है। पर ईरान ने यह कह कर उसके दावे को खारिज कर दिया कि उसे अपने किसी ड्रोन के मारे जाने की जानकारी नहीं है। समुद्री सीमा में इस तरह मालवाहक पोतों को कब्जे में करके रंजिश निभाने का तरीका नया नहीं है। मगर जिस तरह ईरान इसे तूल दे रहा है, उससे पोत पर तैनात कर्मियों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक है।

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