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संपादकीय: हताशा के कदम

पुलवामा के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ कई कारोबारी रिश्ते तोड़ लिए थे। इसी तरह बालाकोट और फिर धारा 370 हटने के बाद पाकिस्तान ने भी कई कारोबारी गतिविधियों पर विराम लगा दिया।

Author नई दिल्ली | August 29, 2019 1:07 AM
imran khanपाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान।

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद पाकिस्तान की झुंझलाहट लगातार बढ़ रही है। हालांकि इस मामले को उसने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने भी रखा और मदद की गुहार लगाई, मगर कोई कामयाबी नहीं मिल पाई। जो अमेरिका पहले मध्यस्थता करने की बात कर रहा था, उसने भी कह दिया कि यह दोनों देशों के बीच का मामला है, वे आपस में बैठ कर इसका समाधान निकालें। इस तरह पाकिस्तान हताश है। इसी हताशा में वह कुछ ऐसे कदम उठाने का प्रयास करता है जिससे भारत को सबक सिखाया जा सके, उसे परेशान किया जा सके। मगर अब तक के उसके सारे कदम बेअसर साबित हो चुके हैं। इसी सिलसिले में वह भारत के साथ अपने सारे हवाई मार्ग बंद करने पर विचार कर रहा है। पाकिस्तान के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री फवाद चौधरी ने ट्वीट कर कहा कि प्रधानमंत्री यह फैसला जल्दी ही करने वाले हैं। इससे संबंधित कानूनी पहलुओं पर विचार चल रहा है। मगर यह समझ से परे है कि ऐसा करके आखिर पाकिस्तान को हासिल क्या होगा! इससे महज उसकी कुछ खुनस ही मिटेगी।

अगर पाकिस्तान भारत आने-जाने वाले विमानों को अपनी सीमा से होकर नहीं गुजरने देने का फैसला करता है तो निस्संदेह विमानन कंपनियों का खर्चा बढ़ेगा। मगर ऐसा नहीं कि इससे सिर्फ भारत को नुकसान होगा, पाकिस्तान को भी राजस्व घाटा उठाना पड़ेगा। फिर यह पहली बार नहीं होगा, जब पाकिस्तान अपने हवाई मार्ग भारत के लिए बंद कर देगा। बालाकोट पर हवाई हमले के बाद भी उसने ऐसा किया था। इसकी वजह से भारत से उड़ान भरने वाले विमानों को कुछ लंबा रास्ता तय करके दूसरे देशों में पहुंचना पड़ता था। मगर फिर उसने हवाई रास्ते खोल दिए। ऐसे फैसलों से विमानों को थोड़ा अधिक समय उड़ान भरनी पड़ती है, उनका खर्च बढ़ जाता है। जाहिर है, इसका असर मुसाफिरों पर भी पड़ता है। मगर ऐसा कभी नहीं हुआ कि बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द करनी पड़ी हों। इसलिए अगर इस बार भी वह ऐसा फैसला करता है, तो भारतीय या दूसरी विमानन कंपनियों के लिए बहुत घबराने की बात नहीं होगी।

जब दो देशों के बीच तनाव बढ़ता है तो इस तरह के फैसले संभावित होते हैं। पुलवामा के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ कई कारोबारी रिश्ते तोड़ लिए थे। इसी तरह बालाकोट और फिर धारा 370 हटने के बाद पाकिस्तान ने भी कई कारोबारी गतिविधियों पर विराम लगा दिया। अब वह पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान के साथ भारत के व्यापार पर भी अंकुश लगाने पर विचार कर रहा है। वह भारत से अफगानिस्तान के लिए जाने वाली सड़कों को भी बंद करने पर विचार कर रहा है। जाहिर है, इससे वाणिज्यिक वाहनों को थोड़ा लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा। पर पाकिस्तान को इसका भी नुकसान उठाना पड़ेगा। पहले ही भारत के साथ उसके व्यापारिक रिश्ते खत्म होने से उसे बड़े पैमाने पर घाटा उठाना पड़ रहा है। वहां की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है, ऐसे में खुनस में उठाए गए कदम उसके ही लिए परेशानी का सबब बनेंगे। इमरान खान जिस तरह खुद को पाकिस्तान की तरक्की के लिए समर्पित बताते रहे हैं, उससे लगता रहा है कि वे भारत के साथ रिश्ते बेहतर बनाने के पक्ष में हैं। पर हवाई रास्ते बंद करने और व्यापार रोक देने जैसे कदमों पर उनके विचार करने से यही जाहिर है कि वे बातचीत के जरिए समाधान के पक्ष में नहीं हैं।

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