ताज़ा खबर
 

संपादकीय: घेरे में पाकिस्तान

खुद पाकिस्तान में लोग अब कश्मीर को लेकर इमरान खान सरकार के खिलाफ बोलना शुरू कर चुके हैं।

Author Published on: September 12, 2019 1:44 AM
सांकेतिक तस्वीर।

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटाए जाने के बाद पाकिस्तान किसी भी तरह भारत को घेरने की कोशिशों में लगा हुआ है। मगर उसका हर प्रयास विफल साबित हो रहा है। अब तो वह अपने घर में ही घिरता जा रहा है। कश्मीर की स्थिति पर उसने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में गुहार लगाई थी। उसने कहा था कि इस मामले की अंतरराष्ट्रीय जांच होनी चाहिए। मगर भारत ने उसकी दलीलों को खारिज करते हुए दो-टूक जवाब दिया कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद तीन सौ सत्तर हटाना भारत का संप्रभु निर्णय है, उस पर किसी दूसरे का हस्तक्षेप नहीं हो सकता। जहां तक घाटी में मानवाधिकार हनन की बात है, उस पर भारत काफी सतर्क है और वह जरूरी कदम उठा रहा है। इस तरह पाकिस्तान को मानवाधिकार परिषद में भी मुंह की खानी पड़ी।

दरअसल, पाकिस्तान एक ऐसे मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने पेश कर रहा है, जिस पर भारत को निर्णय करने का पूरा हक है। कश्मीर को लेकर वह शुरू से ही बेवजह अपनी ऊर्जा खर्च करता रहा है। अमेरिका सहित अनेक देश स्वीकार कर चुके हैं कि कश्मीर भारत का आंतरिक मामला है। मगर पाकिस्तान अपने यहां की स्थिति पर ध्यान देने के बजाय उसी में उलझा हुआ है।

खुद पाकिस्तान में लोग अब कश्मीर को लेकर इमरान खान सरकार के खिलाफ बोलना शुरू कर चुके हैं। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के नागरिकों ने अपनी स्वतंत्रता की मांग को लेकर आंदोलन छेड़ रखा है। पाकिस्तान के एक पूर्व विधायक बलदेव कुमार, जो खैबर पख्तूनख्वा के प्रतिनिधि रह चुके हैं, इन दिनों भारत में हैं और वे यहां शरण मांग रहे हैं। उनका आरोप है कि इमरान खान सरकार में अल्पसंख्यकों पर ज्यादतियां बढ़ी हैं। पहले ही वहां विभाजन के बाद भारत से गए मुसलमान यानी मुहाजिर लोग पाकिस्तान में अपने साथ हो रहे भेदभाव को लेकर आंदोलन करते रहे हैं।

मुहाजिरों का मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट वहां लंबे समय चल रहा है। वे लोग अपनी बराबरी के अधिकारों की मांग करते रहे हैं। इसी तरह बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान से अलग होने की मांग पर अंदोलन करते रहे हैं। बलोच लोगों ने पाकिस्तान के लिए खासी चुनौती पेश कर रखी है। ऐसे में अगर पाक अधिकृत कश्मीर के लोग कश्मीर की मुख्यधारा में मिलने के लिए बेताब हो उठे हैं, तो आसानी से समझा जा सकता है कि पाकिस्तान अपने ही घर में किस कदर घिर चुका है।

मगर विचित्र है कि पाकिस्तान कश्मीरी लोगों की फिक्र में दुबला हुआ जा रहा है। दरअसल, इमरान खान सरकार पर वहां के कट््टरपंथी संगठनों, सेना और चरमपंथी संगठनों के समर्थक मंत्रियों का खासा दबाव है, इसलिए भी वह कश्मीर को लेकर परेशान है। दरअसल, कश्मीर मसले के जरिए भारत से दुश्मनी जाहिर कर पाकिस्तान अपनी शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार जैसी असल समस्याओं पर पर्दा डालने में कामयाब होता रहा है।

अगर वह आसानी से भारत के फैसले को मान लेगा तो उसके पास पड़ोसी मुल्क से दुश्मनी को भुनाने का मौका खत्म हो जाएगा। इसीलिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भागा-भागा फिर रहा है। मगर चीन के अलावा उसे कहीं से सहारा नहीं मिल पा रहा। सब जानते हैं कि इस मसले पर चीन उसके साथ इसलिए खड़ा है कि उसे पाकिस्तान में अपने कारोबारी हित साधने हैं। फिर भारत से लगी अपनी सीमा पर दबदबा कायम करना है। मगर इन दोनों देशों की यह मंशा पूरी होती नहीं दिखती।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 संपादकीय: बंजर होती धरती
2 संपादकीय: संकट का उद्योग
3 संपादकीय: प्लास्टिक की मुसीबत