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संपादकीय: उम्मीदें और चुनौतियां

कालेधन और भ्रष्टाचार जैसी गंभीर समस्या पर भी राष्ट्रपति ने सरकार के प्रयासों का जिक्र किया। भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने हैं और यह मुश्किलों भरा काम है।

Author June 21, 2019 1:55 AM
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद। (file pic)

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने देश को आश्वस्त कराया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सरकार की पहली प्राथमिकता है और देश की सुरक्षा के लिए सरकार हरसंभव कदम उठाएगी। सत्रहवीं लोकसभा के पहले सत्र के मौके पर संसद के दोनों सदनों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने आंतरिक व बाह्य सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, भ्रष्टाचार, कालेधन, सूखा, जल संकट जैसे मुद्दों पर सरकार के अब तक के प्रयासों और भावी योजनाओं को सामने रखा है। भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार की लगातार दूसरी बार सत्ता में वापसी इस बात का संकेत है कि जनता ने सरकार के काम और उपलब्धियों पर मुहर लगाई है और उसे सरकार से उम्मीदें काफी हैं। जनता की उम्मीदों पर खरा उतरना ही सरकार की सफलता है। साथ ही चुनाव में जो वादे किए गए हैं, उन्हें पूरा करना चुनौती भी है। राष्ट्रपति का अभिभाषण यों एक तरह से रस्म अदायगी ही होता है, लेकिन देश के नागरिकों के लिए इसकी अहमियत इसलिए है कि सरकार की प्राथमिकताओं के बारे में राष्ट्रपति बताते हैं। वे देश के प्रथम नागरिक हैं, लोकतंत्र में सर्वोच्च पद पर ही नहीं, बल्कि उसके संरक्षक भी हैं। इसलिए उनका कहा सरकार को कहीं न कहीं जिम्मेदारियों से बांधता है।

राष्ट्रपति ने अभिभाषण में सबसे ज्यादा जोर देश की सुरक्षा और आर्थिकी से जुड़े पहलुओं पर दिया है। सुरक्षा पर इसलिए कि पिछले कुछ समय में देश को आंतरिक और बाह्य दोनों ही मोर्चों पर गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। इस साल फरवरी में पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले ने देश की सुरक्षा के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने को मजबूर कर दिया था और आतंकियों के ठिकानों पर हवाई हमले जैसी कार्रवाई की गई थी। राष्ट्रपति ने सरकार के कदमों की सराहना करते हुए कहा कि पुलवामा हमले के बाद हवाई हमलों से आतंकियों के ठिकानों को ध्वस्त कर भारत ने अपने इरादों और क्षमताओं को प्रदर्शित किया है। राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि नक्सलवाद और आतंकवाद से निपटने में भी सरकार प्रभावी कदम उठा रही है। घुसपैठ भी एक बड़ी समस्या है और यह देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन गई है। घुसपैठ रोकने के लिए सीमा सुरक्षा को मजबूत बनाया जा रहा है। राष्ट्रपति ने सरकार की विदेश नीति और प्राथमिकताओं को भी गिनाया। इसके अलावा तीन तलाक, हलाला जैसी कुप्रथाओं को खत्म करने और महिला सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। महिला सुरक्षा का मुद्दा काफी संवेदनशील रहा है और आए दिन की घटनाएं बता रही हैं कि सरकारें इस मामले में नाकाम ही साबित हो रही हैं।

कालेधन और भ्रष्टाचार जैसी गंभीर समस्या पर भी राष्ट्रपति ने सरकार के प्रयासों का जिक्र किया। भ्रष्टाचार से निपटने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने हैं और यह मुश्किलों भरा काम है। सरकार का लक्ष्य अगले पांच साल में भारत को पांच अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का है। इसके लिए आर्थिक सुधार, कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने, उद्यमियों को बिना गारंटी के कर्ज देने, जीएसटी को और सरल बनाने जैसे काम किए जाएंगे। राष्ट्रपति ने रोजगार सृजन को सरकार के एजेंडे में ऊपर बताया है। सरकार इन सब लक्ष्यों को हासिल करने के लिए क्या करती है, इसकी झलक आगामी बजट में देखने को मिल सकती है। राष्ट्रपति ने सूखे के खतरे और बढ़ते जल संकट की बात भी की। राजग सरकार के सामने अब बड़ी चुनौती तो यह है कि पिछले कार्यकाल में शुरू किए गए कामों को उसे अब तेजी से बढ़ाना होगा, तभी विकास के अपेक्षित लक्ष्य हासिल हो पाएंगे।

 

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