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संपादकीय: कानून के हाथ

जहां तक स्वामी चिन्मयानंद से जुड़े मामले का सवाल है तो पीड़ित लड़की ने जिस तरह की धमकी मिलने की बात कही है, उसे नजरअंदाज करना उसके जीवन को जोखिम में डालने से कम नहीं होगा।

Author Published on: September 21, 2019 1:45 AM
सांकेतिक तस्वीर।

भारतीय राजनीति में रसूखदार नेताओं का रुतबा किस कदर हावी रहता है, यह अनेक मौकों पर अलग-अलग तरह के मामलों में साबित होता रहा है। बलात्कार के आरोपों के बाद स्वामी चिन्मयानंद की गिरफ्तारी से पहले समूचे जांच दल, प्रशासन और पुलिस तंत्र का ऊहापोह से गुजरना भी यही दर्शाता है कि ऊंचे पद-कद वाली शख्सियतों के मामले में कैसे नरम और भिन्न रुख अख्तियार किया जाता है। गौरतलब है कि करीब एक महीने पहले उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में लॉ कॉलेज की एक छात्रा ने वीडियो सार्वजनिक करते हुए स्वामी चिन्मयानंद पर उसके समेत कई अन्य लड़कियों का शोषण करने और धमकाने का आरोप लगाया था।

कई दिनों तक लगातार शिकायत के बावजूद जब पुलिस ने टालमटोल का रवैया बनाए रखा तब लड़की के पिता ने यह आरोप लगाया था कि स्थानीय प्रशासन और सरकार के दबाव में स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ बलात्कार का मुकदमा दर्ज नहीं किया जा रहा है। जिस तरह के मामले में सरकार को तुरंत सक्रिय और संवेदनशील होकर कार्रवाई करनी चाहिए थी, शोषण और धमकी से संबंधित कई वीडियो वायरल होने के बावजूद उसने चुप्पी लगाए रखी। जबकि कुछ वकीलों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का संज्ञान लिया और उत्तर प्रदेश सरकार को जांच के लिए एसआइटी बनाने का भी निर्देश दिया।

इस प्रकरण में चर्चा में आए वीडियो सहित जिस तरह के आरोप थे, उसमें कार्रवाई को लेकर पुलिस का रवैया टालमटोल वाला और हैरानी भरा रहा। हालत यह थी कि कुछ दिन पहले जब लड़की ने सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि क्या पुलिस तब सक्रिय होगी जब वह आग लगा कर आत्महत्या कर लेगी, तब जाकर अब आरोपी की गिरफ्तारी हो सकी।

पीड़ित लड़की के आरोप कितनी मजबूत बुनियाद पर खड़े थे, इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि गिरफ्तारी के बाद स्वामी चिन्मयानंद ने अपने ऊपर लगे लगभग सभी आरोपों को स्वीकार कर लिया। सवाल है कि करीब महीने भर पहले आए आरोपों के बावजूद पुलिस का तंत्र आखिर किन वजहों से कार्रवाई से हिचक रहा था? लगभग आठ साल पहले भी स्वामी चिन्मयानंद के ही आश्रम में एक महिला ने यौन शोषण और उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज कराया था। लेकिन राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद सरकार ने उस मुकदमे को वापस ले लिया था। फिलहाल उस मामले में हाईकोर्ट का स्थगनादेश मिला हुआ है।

आमतौर पर बलात्कार या फिर यौन शोषण के मामलों में आरोप सामने आने और मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी करती है और कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ाती है। लेकिन ऐसे आरोप आम हैं कि ऊंचे कद-पद वाले नेताओं के खिलाफ जब कोई शिकायत करता है तब सरकार अपनी सुविधा के मुताबिक उसे संरक्षण देती है या उसके खिलाफ कार्रवाई करती है। जहां तक स्वामी चिन्मयानंद से जुड़े मामले का सवाल है तो पीड़ित लड़की ने जिस तरह की धमकी मिलने की बात कही है, उसे नजरअंदाज करना उसके जीवन को जोखिम में डालने से कम नहीं होगा।

उत्तर प्रदेश के ही उन्नाव में एक भाजपा नेता पर बलात्कार का आरोप लगाने वाली पीड़िता और उसके परिवार को किस तरह की त्रासदी से गुजरना पड़ा, यह सब जानते हैं। यहां तक कि कुछ समय पहले एक ट्रक से हादसे के बहाने उसकी हत्या तक करने की कोशिश की गई। ऐसे में भारतीय राजनीति में स्वामी चिन्मयानंद के पद-कद और रसूख को देखते हुए सरकार को इस मामले में पहले पीड़िता और उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। इसके साथ ही आरोपी के खिलाफ समुचित न्यायिक प्रक्रिया के तहत सजा दिलाना सरकार की निष्पक्षता और न्यायप्रियता की कसौटी होगी।

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