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संपादकीय: खतरे का संकेत

दावा किया जा रहा है कि इस घटना में हमलावर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गोरों का दबदबा कायम करने वाले प्रतीक के रूप में देखा और इसी से प्रेरित होकर इस नृशंस हत्याकांड को अंजाम दे डाला।

Author March 16, 2019 2:45 AM
न्यूजीलैंड में हमले के बाद तैनात सुरक्षाकर्मी (फोटो सोर्स – एपी)

शुक्रवार को छोटे-से देश न्यूजीलैंड के खूबसूरत और क्रिकेट प्रेमियों के शहर क्राइस्ट चर्च की दो मस्जिदों पर हुए आतंकी हमले ने दुनिया को स्तब्ध कर दिया है। इस हमले में पचास लोग मारे गए और कई घायल हो गए। न्यूजीलैंड में ऐसा आतंकी हमला पहली बार हुआ है। माना जा रहा है कि यह हमला बांग्लादेशी टीम को निशाना बना कर किया गया था। जिस वक्त हमला हुआ, बांग्लादेशी क्रिकेट टीम के खिलाड़ी नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद में पहुंचे थे। इस हमले का सबसे भयावह पहलू यह है कि हमलावर ने इस पूरी वारदात को कैमरे में भी कैद किया और फेसबुक पर लाइव दिखाया। हालांकि हमले को लेकर अभी चीजें काफी उलझी हुई हैं। जिन दोनों मस्जिदों पर हमला हुआ, उनमें पांच किलोमीटर का फासला है। इसलिए अभी हमलावरों की संख्या के बारे में पुख्ता जानकारी नहीं है। शुरुआती जांच में ये संकेत उभरे हैं कि आने वाले दिनों में शायद आस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड भी ऐसे हमलों की जद में होंगे। इन देशों में नस्लीय हिंसा और चरमपंथ एक खतरनाक रूप ले रहा है।

न्यूजीलैंड में हुआ ताजा आतंकी हमला बता रहा है कि इस शांत देश में अब सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है। यहां भी अंदर ही अंदर न सिर्फ मुसलिम समुदाय को लेकर, बल्कि गैर-श्वेतों के प्रति नफरत फैल चुकी है। मुसलमानों को यहां घुसपैठिया माना जाने लगा है। इस हमले को अंजाम देने वाले ने कहा भी है कि उसका मकसद बाहरी लोगों को देश से बाहर करना है। जिस तरह से यह हमला किया गया और हमलावर ने इसे फेसबुक पर दिखाया, उससे साफ है कि यह एक सुनियोजित हमला था और इसे अंजाम देने की योजना काफी पहले बन चुकी थी। ताज्जुब इस बात का है कि न्यूजीलैंड की सबसे चौकस पुलिस और खुफिया तंत्र को ऐसी साजिश की भनक तक नहीं लग पाई! हालांकि इसकी एक वजह यह भी है कि इस देश में अब तक कभी ऐसी कोई नस्लीय समस्या देखने-सुनने में नहीं आई थी।

आस्ट्रेलिया में पिछले कुछ सालों में नस्लीय हमलों की घटनाएं सामने आई हैं। इसके अलावा पूरे विश्व में आतंकवाद की वजह से मुसलिम समुदाय को लेकर जो धारणा बन गई है, वह भी कहीं न कहीं इस हमले के कारणों में निहित है। जैसा कि दावा किया जा रहा है कि इस घटना में हमलावर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को गोरों का दबदबा कायम करने वाले प्रतीक के रूप में देखा और इसी से प्रेरित होकर इस नृशंस हत्याकांड को अंजाम दे डाला। न्यूजीलैंड और आस्ट्रेलिया में ऐसे हालात बन गए हैं जैसे पगड़ी और दाढ़ी वाले व्यक्ति को अमेरिका सहित तमाम पश्चिमी देशों में आतंकवादी मान कर उस पर हमला कर देने की घटनाएं देखने को मिलीं। इस हमले के बाद अब न्यूजीलैंड सरकार के सामने बड़ी चुनौती तो यह है कि मुसलिम समुदाय और गैर-श्वेत समाज के भीतर जो असुरक्षा का भाव पैदा हुआ होगा, उसे कैसे दूर किया जाए। इस मसले पर जिन वर्गों में असंतोष पैदा हो रहा है, उसे कैसे रोका जाए। गौरतलब है कि आस्टेÑलिया और न्यूजीलैंड जैसे देश शिक्षा और रोजगार के नए ठिकानों के रूप में भी सामने आए हैं। बड़ी संख्या में विदेशी इन देशों में पढ़ाई और काम कर रहे हैं। ऐसे में इन देशों की सरकारों के सामने अलग-अलग वर्गों की अपेक्षाओं से निपटने की बड़ी चुनौती है। अगर नस्लीय अलगाव बढ़ा तो आने वाले दिनों में संकट गहरा सकता है। आतंकवाद चाहे नस्लीय-जातीय मुद्दे को लेकर हो या धार्मिक कट्टरपन को लेकर, उसे किसी भी रूप में जायज नहीं ठहराया जा सकता।

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