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संपादकीय: हौसले की उड़ान

जाहिर है, यह कदम बढ़ाने का हौसला है और यह बना रहा तो इसमें कोई शक नहीं कि कुछ सालों बाद हम अंतरिक्ष में स्टेशन कायम करने वाले विकसित देशों के बराबर खड़े होंगे।

Author June 15, 2019 1:17 AM
भारत के पास 2022 तक मानव को अंतरिक्ष में भेजने की क्षमता होगी।

यों भारत में विज्ञान की दुनिया में काम कर रहे हमारे वैज्ञानिकों की कामयाबियों की एक लंबी शृंखला है और वे लगातार इस क्षेत्र में नए और चुनौतीपूर्ण काम को पूरा करके अपनी क्षमताएं साबित करते रहे हैं। मगर अंतरिक्ष में अपने अभियानों को नई उड़ान देने की जो ताजा घोषणा हुई है, वह जमीन पर उतरने के बाद आने वाले वक्त में भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों में नया और शानदार अध्याय जोड़ेगी। दरअसल, गुरुवार को इसरो के प्रमुख के. सिवन ने इस योजना के बारे में बताया कि अगले पांच-सात सालों में भारत अंतरिक्ष में अपना एक स्टेशन बना लेगा। आजादी के बाद से अब तक चांद पर अपना यात्री भेजने से लेकर मंगलयान और चंद्रयान जैसे तमाम अभियानों में निश्चित रूप से भारत ने यह साबित किया है कि अंतरिक्ष में उसके प्रयोग और कौशल की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों के समांतर खड़ी है। लेकिन अब इससे आगे अंतरिक्ष में अपना स्टेशन बनाने की ओर कदम बढ़ा कर उसने यह भी संकेत दे दिया है कि इस क्षेत्र में भारत अब अमेरिका, रूस और चीन जैसी महाशक्ति के समकक्ष होने के लिए तैयार है।

फिलहाल अंतरिक्ष में कुल दो स्टेशन काम कर रहे हैं, जिसमें एक अमेरिका, रूस, यूरोपीय संघ और जापान के आपसी सहयोग के साथ चल रहा आइएसएस यानी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन है और दूसरा है तिआनगोंग-2, जो अकेले चीन का है। हालांकि चीन का तिआनगोंग-2 आइएसएस से काफी छोटा है, लेकिन इससे इतना तो साफ है ही कि छोटे से शुरुआत करके बड़ी कामयाबी हासिल की जा सकती है। अपनी इसी क्षमता के बूते चीन यह कह सकने की स्थिति में है कि अंतरिक्ष में उसका अपना स्टेशन है। इसी तर्ज पर इसरो प्रमुख के. सिवन ने कहा कि हम भी अभी एक छोटे मॉड्यूल का ही प्रक्षेपण करेंगे, लेकिन हमारी यह महत्त्वाकांक्षा है कि हमारा अपना एक अंतरिक्ष स्टेशन हो; कोई भी छोटे से शुरू करके ही बाद में उसे विस्तार देता है। आकार और क्षमता में भारत का स्टेशन जो भी होगा, मगर वह भारत का अपना होगा और वह आइएसएस का हिस्सा नहीं होगा। एक तरह से गगनयान अभियान का ही विस्तार होगा, जिसके तहत भारत अंतरिक्ष में मानवयुक्त मिशन भेजने की योजना पर काम कर रहा है। इस बड़ी और महत्त्वाकांक्षी योजना के मूर्त रूप लेने के बाद देश अब ज्यादा संख्या में मानव मिशन अंतरिक्ष में भेज सकेगा।

जाहिर है, यह कदम बढ़ाने का हौसला है और यह बना रहा तो इसमें कोई शक नहीं कि कुछ सालों बाद हम अंतरिक्ष में स्टेशन कायम करने वाले विकसित देशों के बराबर खड़े होंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होने वाला है कि भारत भी अपने स्टेशन के जरिए न केवल अंतरिक्ष में होने वाले प्रयोग, अध्ययन और निष्कर्षों के बूते अपने भविष्य की कार्य-योजना बनाएगा, बल्कि पृथ्वी पर नजर रखने के क्रम में दुश्मन देशों की गतिविधियों की निगरानी भी कर सकेगा। हालांकि अंतरिक्ष में बाकी गतिविधियों और प्रयोग के स्तर पर इसरो ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों पर खुद को खरा साबित किया है और अलग-अलग स्वरूप और जरूरत वाले यानों के कामयाब प्रक्षेपण से अपनी वैज्ञानिक क्षमताओं को साबित किया है। हाल के वर्षों में इसरो की व्यावसायिक शाखा ने ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान के जरिए कई देशों के दर्जनों उपग्रह प्रक्षेपित किए हैं और इस क्षेत्र में दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। इसलिए अंतरिक्ष में अपने स्टेशन की महत्त्वाकांक्षा की ओर बढ़ते कदम को वैज्ञानिक कामयाबियों के उसी सफर के अगले पड़ाव के रूप में देखा जा सकता है।

 

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