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संपादकीय: सम्मान और उपहार

हालांकि खट्टर ने कहा कि जिस सोने-चांदी के उपहार की परंपरा उन्होंने बड़ी मुश्किल से खत्म की थी, उसे फिर से जिंदा करने का कोई प्रयास करेगा तो क्रोध स्वाभाविक है।

Author Published on: September 13, 2019 2:10 AM
खट्टर जन आशीर्वाद यात्रा करते हुए हिसार पहुंचे थे।

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर अपने बयानों को लेकर अक्सर विवादों में रहते आए हैं। इस बार अपनी ही पार्टी के एक नेता को फरसे से गर्दन काटने की धमकी देने की वजह से उनकी आलोचना हो रही है। हुआ यों कि खट्टर जन आशीर्वाद यात्रा करते हुए हिसार पहुंचे थे। उस रैली में किसी समर्थक ने उन्हें उपहार में फरसा भेंट किया। तभी दूसरे कार्यकर्ता ने उन्हें चांदी का मुकुट पहनाने की कोशिश की। इस पर खट्टर ने उसे धमकाते हुए कहा कि फरसे से तुम्हारी गर्दन काट दूंगा। उसके बाद खट्टर की इस हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर घूमने लगा।

हालांकि खट्टर ने कहा कि जिस सोने-चांदी के उपहार की परंपरा उन्होंने बड़ी मुश्किल से खत्म की थी, उसे फिर से जिंदा करने का कोई प्रयास करेगा तो क्रोध स्वाभाविक है। धमकी वाला यह वीडियो वायरल करने के पीछे उन्होंने कांग्रेस के नेताओं का हाथ बताया है। उनका कहना है कि कांग्रेस के नेता उन्हें इस तरह बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। बेशक खट्टर की मंशा साफ रही हो या उन्होंने मजाहिया अंदाज में वह धमकी दी हो, पर यह सवाल तो बना ही रहेगा कि सार्वजनिक मंचों से कुछ बोलते हुए वे सावधानी क्यों नहीं बरतते!

हालांकि खट्टर की इस धमकी को भले असंयमित व्यवहार के तौर पर देखा जा रहा हो, पर उन्होंने राजनीति में उपहारों के लेन-देन की जिस संस्कृति की ओर इशारा किया है, उसे भी गंभीरता से लेने की जरूरत है। छिपी बात नहीं है कि राजनीति में बड़े पदों का निर्वाह करने वाले नेताओं को पार्टी के समर्थक, छोटे नेता, व्यापारी, सामाजिक संस्थाएं आदि सम्मानित करने के लिए या फिर किसी अवसर पर महंगे उपहार देते हैं। उनमें सोने-चांदी से बनी वस्तुएं, गाड़ी वगैरह भी शामिल होती हैं। यह प्रवृत्ति देशव्यापी और हर पार्टी में है। इस प्रवृत्ति पर लंबे समय से अंगुलियां उठती रही हैं।

कई बड़े नेता उपहार में मिली अपनी वस्तुओं की नीलामी करके या उन्हें बेच कर उनसे मिली धन राशि को किसी सामाजिक कार्य में लगाते रहे हैं। हाल में प्रधानमंत्री ने भी ऐसा किया था। मगर महंगे उपहार लेने से गुरेज करते किसी नेता को कम ही देखा गया है। ऐसे में अगर खट्टर ने सोने-चांदी से बने उपहार लेने की परंपरा को व्यक्तिगत तौर पर रोकने का प्रयास किया है, तो उसकी सराहना होनी चाहिए। हालांकि यह देखने की बात है कि वास्तव में वे उसे व्यावहारिक तौर पर कितना अपनाते हैं।

पार्टियों के अध्यक्ष अपने नेताओं को सादगीपूर्ण जीवन जीने, आम लोगों के सामने अच्छा उदाहरण पेश करने की नसीहत अनेक मौकों पर देते देखे गए हैं, पर हकीकत यही है कि राजनेता आडंबरपूर्ण जीवन जीने की इच्छा का त्याग नहीं कर पाते। कई नेता अपने जन्मदिन या दूसरे मौकों पर महंगे उपहार इकट्ठा करने में गर्व महसूस करते हैं। सामान्य उपहार मिलने पर वे नाक-भौं सिकोड़ते भी देखे जाते हैं। फिर महंगे उपहार देकर बड़े नेताओं को रिझाने और उनसे अपने स्वार्थ साधने की परिपाटी भी राजनीति में बहुत पुरानी है। कई नेता किसी काम के बदले महंगे उपहार की मांग खुद भी करते हैं। खट्टर को जिस नेता ने चांदी का मुकुट पहना कर सम्मानित करने का प्रयास किया, बताते हैं कि वह हरियाणा विधानसभा चुनाव में टिकट पाना चाहता है। इस प्रवृत्ति पर अंकुश तभी लगेगा, जब बड़े नेता उपहारों का मोह खुद छोड़ दें।

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