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राहत का फैसला

काम-धंधे की तलाश में छोटे शहरों और गांवों से लोग जिस तेजी से महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं, उससे बड़े शहरों में मकानों की मांग बढ़ी है। बड़े शहर में घर सबका सपना होता है। लेकिन अभी तक खरीदारों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यही थी कि मकान काफी महंगे थे।

Author February 26, 2019 4:23 AM
नोटबंदी के बाद सबसे बड़ा झटका रियल एस्टेट बाजार को ही लगा था।

घर खरीदने वालों को जीएसटी परिषद ने जो कर राहत दी है, वह एक महत्त्वपूर्ण कदम है। इसका पहला फायदा तो यही होगा कि लंबे समय से ठप पड़े रियल एस्टेट बाजार में फिर से जान आएगी और लोगों को वाजिब दामों पर मकान मिल सकेंगे। नवंबर 2016 में नोटबंदी के बाद सबसे बड़ा झटका रियल एस्टेट बाजार को ही लगा था और मकानों की खरीद में बड़े पैमाने पर होने वाले नगदी के चलन पर अंकुश लगा था। इसका पहला असर यह देखने को मिला कि लंबे समय से रियल एस्टेट कारोबार में बनी कृत्रिम तेजी खत्म हो गई और मकानों के दाम तेजी से गिरने लगे। तब से इस क्षेत्र में मंदी जैसी हालत चल रही है। लेकिन अब खरीदारों को राहत मिलने से रियल एस्टेट बाजार तो उठेगा ही, सीमेंट, इस्पात जैसे क्षेत्रों में भी मांग निकलेगी, मकान के लिए बैंक कर्ज लेने वालों की भी मांग बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था को इससे बल मिल सकता है।

जब से जीएसटी लागू किया गया है तब से इसकी कर-दरों को आसान बनाने पर लगातार काम चल रहा है। कुछ महीने पहले कर की दरों में बड़ा बदलाव करते हुए ज्यादातर वस्तुओं को कम दर वाली श्रेणी में लाया गया था, लेकिन रियल एस्टेट क्षेत्र लंबे समय से ऐसी राहत की प्रतीक्षा कर रहा था। जीएसटी परिषद ने दिल्ली सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और सभी महानगरों में साठ वर्ग मीटर और छोटे शहरों में नब्बे वर्गमीटर कारपेट एरिया और पैंतालीस लाख रुपए तक की कीमत वाले ऐसे फ्लैटों पर जो निर्माणाधीन हैं, जीएसटी की दर घटा कर अब एक फीसद कर दी है। पहले यह आठ फीसद थी। अगर फ्लैट का क्षेत्रफल इससे ज्यादा होगा या कीमत ज्यादा होगी तो जीएसटी पांच फीसद लगेगा, जो अभी तक बारह फीसद देना पड़ता है। जाहिर है, खरीदारों के लिए यह बड़ी राहत है। इसका सीधा असर यह होगा कि सामान्य वर्ग के खरीदारों को घर अब दो से तीन लाख रुपए सस्ता पड़ेगा। जो लोग बीस से तीस लाख रुपए (किफायती वर्ग में) के बीच मकान खरीदना चाहेंगे उन्हें डेढ़ से दो लाख तक की बचत होगी। इसके अलावा खरीदार को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत दो लाख साठ हजार रुपए का अतिरिक्त अनुदान ब्याज के रूप में मिलेगा। इस रियायत का सबसे ज्यादा लाभ मध्यम वर्ग को मिलेगा।

काम-धंधे की तलाश में छोटे शहरों और गांवों से लोग जिस तेजी से महानगरों की ओर पलायन कर रहे हैं, उससे बड़े शहरों में मकानों की मांग बढ़ी है। बड़े शहर में घर सबका सपना होता है। लेकिन अभी तक खरीदारों के सामने सबसे बड़ी मुश्किल यही थी कि मकान काफी महंगे थे। ज्यादातर बिल्डर तो नियम-कानूनों को मानते भी नहीं थे और मनमाने दामों पर ही मकान बेचते थे। लेकिन पिछले कुछ सालों में बिल्डरों पर शिकंजा कसा है और मनमानी कम हुई है। जीएसटी परिषद का यह फैसला अच्छा तो है, लेकिन बेहतर होता कि इसे तत्काल लागू किया जाता। ये दरें एक अप्रैल से लागू होंगी। नई दरों को तत्काल लागू करना खरीदारों और बिल्डरों दोनों के लिए ही लाभकारी होता। हालांकि बिल्डरों को इस फैसले से थोड़ी परेशानी जरूर हुई है, क्योंकि सीमेंट अभी भी जीएसटी की अट्ठाईस फीसद वाली कर-श्रेणी में ही है। इसके अलावा बिल्डरों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का भी लाभ परिषद ने नहीं दिया है। इससे कहीं न कहीं बिल्डरों के मुनाफे पर असर पड़ेगा। इसके बावजूद जीएसटी परिषद का यह कदम लोगों के घर के सपने को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।

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