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संपादकीय: बेहतरी के कदम

मगर फिलहाल बड़ी समस्या यह है कि लोगों की क्रयशक्तिकाफी घट गई है। इसलिए लोग बहुत सोच-समझ कर बाजार में निवेश कर रहे हैं। इसी का असर है कि आवासीय योजनाओं में निवेश काफी घट गया है।

Author Published on: September 16, 2019 1:31 AM
पीएम मोदी और निर्मला सीतारमण (express file photo)

आर्थिक मंदी से उबरने के दबाव झेल रही सरकार ने दो बड़े क्षेत्रों में बेहतरी के लिए राहत उपायों की घोषणा की है। आवास और निर्यात क्षेत्र को बढ़ावा देने के मकसद से सत्तर हजार करोड़ रुपए से अधिक मदद देने की घोषणा की गई है। इसमें बीस हजार करोड़ रुपए की मदद अधूरी पड़ी आवासीय योजनाओं के लिए और पचास हजार करोड़ रुपए की राशि निर्यात क्षेत्र में प्रोत्साहन के लिए तय की गई है। आवासीय योजनाओं को पूरा कराने के लिए सरकार दस हजार करोड़ रुपए मुहैया कराएगी और दस हजार करोड़ रुपए अन्य स्रोतों से उपलब्ध कराने के उपाय किए जाएंगे। इसमें आवास वित्त कंपनियों को विदेशी स्रोतों से धन जुटाने संबंधी नियमों में ढील दी जाएगी। इसके अलावा भवन निर्माण के लिए कर्ज पर ब्याज दरों में छूट का भी प्रावधान किया गया है। अनुमान है किइससे साढ़े तीन लाख आवास खरीदारों को लाभ मिलेगा। इसी तरह सरकार का दावा है कि निर्यातकों को इतना लाभ दिया जाएगा, जितना अभी सारी योजनाओं को मिला कर नहीं दिया जा रहा है। चालीस से पैंतालीस हजार करोड़ रुपए के करों का रिटर्न अदा किया जाएगा। इससे सरकार पर करीब पचास हजार करोड़ रुपए का बोझ पड़ेगा। इसके अलावा छोटे और मझोले निर्यातकों के ऋण की ब्याज दरों में कटौती की जाएगी। स्वाभाविक ही इस कदम से अर्थव्यवस्था में कुछ गति आने की उम्मीद बनी है।

दरअसल, इस वक्तविकास दर पिछले छह सालों के सबसे निचले स्तर पर है। उसमें निर्यात और रियल एस्टेट का योगदान घट कर चिंताजनक स्तर पर पहुंच चुका है। निर्यात को बढ़ावा देना सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। बाजार न मिल पाने से उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है। इसलिए निर्यातकों को प्रोत्साहित करने के लिए निर्यात संबंधी नियम-कायदों को लचीला बनाने और उन्हें वित्तीय मदद मुहैया कराने के उपायों पर विचार की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इस तरह सरकार के इस कदम से निस्संदेह निर्यातकों में कुछ उत्साह का वातावरण बनेगा। इसी तरह सरकार ने बेनामी संपत्ति जमा करने वालों पर नकेल कसने के मकसद से रियल एस्टेट के क्षेत्र में कुछ नियम-कायदों को कड़ा किया था। फिर भवन निर्माण सामग्री की कीमतों में भी उछाल आया था। इसकी वजह से भी अनेक आवासीय परियोजनाएं सुस्त पड़ गई थीं। अब नए कदम से इस क्षेत्र में कुछ गति आने की उम्मीद जगी है।

मगर फिलहाल बड़ी समस्या यह है कि लोगों की क्रयशक्तिकाफी घट गई है। इसलिए लोग बहुत सोच-समझ कर बाजार में निवेश कर रहे हैं। इसी का असर है कि आवासीय योजनाओं में निवेश काफी घट गया है। स्थिति यह है कि देश में तेरह लाख से ऊपर तैयार मकानों के खरीदार नहीं हैं। अब सरकार रुकी आवासीय परियोजनाओं को पूरा कराएगी तो मकानों की संख्या और बढ़ जाएगी। इसलिए ब्याज दरों में छूट और आवासीय परियोजनाएं चलाने वाली और आवास वित्त कंपनियों को राहत देने से मकानों की बिक्री में कितनी गति आएगी, यह देखने की बात है। इसके अलावा सबसे महत्त्वपूर्ण बात है निर्यात क्षेत्र को शक्तिशाली बनाना। घरेलू बाजार सिकुड़ चुका है। ऐसे में अपने उत्पाद को बाहरी बाजार में खपाने की जरूरत है। पर दुनिया के कई देश आर्थिक मंदी की चपेट में हैं। ऐसे में यह कदम भी कितना प्रभावी होगा, समय बताएगा। सरकार को ऐसे छिटपुट उपायों पर ध्यान देने के बजाय समग्र आर्थिक उपायों पर विचार करना चाहिए।

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