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संपादकीय: बेमानी रुदन

सवाल है कि करीब नौ हजार करोड़ रुपए कर्ज का बकाया चुकाने के बजाय अगर विजय माल्या इसे डुबोने की मंशा से विदेश भाग गए, तो क्या वे इस बात की उम्मीद करते हैं कि भारत अब उनके आर्थिक अपराधों को भूल जाए?

Author April 26, 2019 1:01 AM
भगोड़ा कारोबारी विजय माल्या। (file pic)

जानबूझ कर गैरकानूनी गतिविधियां चलाने वाला कोई व्यक्ति शायद ही कभी यह कहे कि उसने ऐसी कोई गलती की है, जिसकी उसे सजा मिलनी चाहिए। पर कई बार ऐसे मौके भी सामने आते हैं, जिनमें किसी अपराध को अंजाम देने का स्पष्ट आरोपी अपने लिए सहानुभूति जुटाने के लिए कानून को ही कठघरे में खड़ा करे। देश के सरकारी बैंकों से करीब नौ हजार करोड़ रुपए का कर्ज लेकर विदेश भाग गए विजय माल्या का ताजा रुदन एक ऐसा ही प्रहसन रचता है। भारतीय कानूनों से बचने के लिए सालों पहले ब्रिटेन भाग गए माल्या ने अपने लिए एक तरह से दया की मांग की है कि जिस तरह उसे भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया गया और उसकी संपत्ति कुर्क करने की इजाजत दे दी गई, यह आर्थिक रूप से मृत्युदंड देने जैसा है। यह ठीक ऐसा ही है जैसे किसी अपराध का अभियुक्त यह कहे कि उसने यह गलती की है, लेकिन अगर इसके लिए उसे जिम्मेदार ठहराया जाता है या सजा दी जाती है, तो यह उसके प्रति अन्याय होगा!

इसमें कोई संदेह नहीं कि विजय माल्या के ताजा शिगूफे को भारतीय कानून की कसौटी और न्यायिक प्रक्रिया में कोई महत्त्व नहीं दिया जाएगा और उस पर चल रहे मामलों में कोई फर्क नहीं पड़ेगा। यों माल्या का ऐसा कहना अपने आप में यह साबित करता है कि उसे अपनी आपराधिक गतिविधियों के पकड़े जाने के अंजाम का अंदाजा है और उस पर कसते शिकंजे को लेकर वह फिक्रमंद है। लेकिन अपने लिए किसी रियायत या छूट की अपेक्षा करते हुए शायद विजय माल्या को इस बात का अहसास नहीं है कि ‘किंगफिशर’ की चकाचौंध के पीछे किस तरह सरकारी बैंकों से पैसे लेने की सुविधाओं का बेजा इस्तेमाल किया गया, कितनी तरह की अनियमितताएं की गर्इं, जिसके चलते वह कंपनी डूब चुकी है। क्या माल्या को इस बात का अहसास है कि उसकी कंपनी में किसकी मर्जी से इतने बड़े पैमाने पर कर्ज लेकर चुकाने के मामले में अनियमितताएं बरती गर्इं और आखिरकार हालत यहां तक पहुंची कि उसे बंद कर देना पड़ा? जब किंगफिशर एयरलाइंस बंद हुई तो उसके हजारों कर्मचारी अचानक बेरोजगार हो गए थे। उसके लिए कौन जिम्मेदार है?

सवाल है कि करीब नौ हजार करोड़ रुपए कर्ज का बकाया चुकाने के बजाय अगर विजय माल्या इसे डुबोने की मंशा से विदेश भाग गए, तो क्या वे इस बात की उम्मीद करते हैं कि भारत अब उनके आर्थिक अपराधों को भूल जाए? आखिर बैंकों ने उन्हें इतनी बड़ी रकम कर्ज दी थी तो वे पैसे किसके थे? उनके विदेश भागने के बाद अगर किन्हीं हालात में वह कर्ज वसूल नहीं हो पाता है, तो उसकी भरपाई कैसे होगी? क्या यह सच नहीं है कि आखिरकार उतनी बड़ी रकम की भरपाई अलग-अलग मद में टैक्स या दूसरे रास्तों से देश की आम जनता को ही करनी होगी? ऐसी स्थिति में अगर देश के कानून के तहत विजय माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है और उनकी संपत्ति कुर्क करने जैसी कार्रवाई की जा रही है, तो यह कैसे उनके प्रति अन्याय है? किसी अपराध का दोषी साबित होने पर सजा एक अनिवार्य प्रक्रिया है और विजय माल्या के आर्थिक अपराध भारत के कानूनों से ऊपर नहीं हैं। इसलिए अगर माल्या को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया जाना या संपत्ति कुर्क करना अपने लिए आर्थिक मृत्युदंड जैसा लगता है तो यह उनका बेमानी रुदन ही है।

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