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संपादकीय: किसान की सुध

निश्चित रूप से लघु और सीमांत किसानों के निजी जीवन को खुशहाल और सम्मानजनक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार का यह एक बड़ा कदम है।

Author Updated: September 13, 2019 2:24 AM
सांकेतिक तस्वीर।

खेती-किसानी का सवाल पिछले काफी समय से देश की मुख्य समस्याओं में शुमार है। मगर खेती के लगातार घाटे का सौदा होते जाने और किसानों के निजी जीवन में खड़ी चुनौतियों का कोई ठोस हल नहीं निकाला जा सका है। अलबत्ता अमूमन सभी सरकारों ने हर मौके पर आश्वासनों और वादों की झड़ी जरूर लगाई, लेकिन किसानों की समस्याएं गहराती ही गईं। फसलों के समर्थन मूल्य के बरक्स खुले बाजार में उनकी कीमतों ने व्यापारियों का लाभ तो सुनिश्चित किया, लेकिन किसानों के हक में कुछ खास नहीं आया। यही वजह है कि किसानों के सामने कई बार गुजारे तक का सवाल एक बड़ी चुनौती बन गया। ऐसे में उनके लिए जो न्यूनतम मदद हो सकती थी, उस पर भी शायद कभी विचार नहीं किया गया। बल्कि खेती-किसानी को बढ़ावा और संरक्षण देने का दावा करने वाली सरकारों की प्राथमिकता में भी इस समस्या को जगह नहीं मिल सकी। नतीजतन, किसानों की मुश्किलें दिनोंदिन बढ़ती गर्इं। कृषि ऋण, फसलों की बर्बादी या खेती में घाटे से उपजे तनाव और दबाव की वजह से लाखों किसानों ने आत्महत्या तक कर ली।

सवाल है कि देश की अर्थव्यवस्था और आम जीवन को गति देने वाले कृषि क्षेत्र के जीवनदाताओं के प्रति सरकारों की अनदेखी की आखिर क्या वजह रही! खेती, फसलें, समर्थन मूल्य, उनकी खरीद आदि से अलग क्या निजी स्तर पर किसानों की मदद के लिए सामाजिक सुरक्षा की कोई योजना नहीं बनाई जा सकती थी, जो वृद्धावस्था या संकट के दौरान उनका सहारा साबित होती? इस लिहाज से मौजूदा केंद्र सरकार ने जिस किसान मानधन योजना की शुरुआत की गई है, वह अपने मूल स्वरूप में अमल में आ सकी तो किसानों को बड़ी राहत मिल सकेगी।

यों इसकी घोषणा पहले हो चुकी थी, लेकिन गुरुवार को रांची में कई अन्य योजनाओं के साथ-साथ किसान मानधन योजना की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि किसानों को बुढ़ापे में मुसीबत में न जीना पड़े, यह पेंशन योजना उसकी गारंटी देगी। गौरतलब है कि किसानों को सामाजिक सुरक्षा का कवच देने वाली इस योजना के तहत साठ साल की उम्र के बाद लघु और सीमांत किसानों को तीन हजार रुपए पेंशन देने का प्रावधान है। इस योजना का लाभ लेने के लिए उम्र के मुताबिक हर महीने एक निर्धारित रकम जमा करानी होगी। हालांकि कुछ खास सुविधाप्राप्त वर्ग के लोगों को इस योजना का लाभ नहीं मिल सकेगा।

यह किसी से छिपा नहीं है कि साठ साल की उम्र के बाद कोई भी व्यक्ति सामाजिक रूप से किस अवस्था में रहता है और बहुत सारे लोगों के लिए परिवार पर निर्भरता कैसी स्थिति पैदा करती है। ऐसे में अगर हर महीने उन्हें एक निर्धारित रकम मिलती है, तो यह सेहत संबंधी और दूसरी जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ उनके मान-सम्मान को बनाए रखने में भी मददगार हो सकती है। निश्चित रूप से लघु और सीमांत किसानों के निजी जीवन को खुशहाल और सम्मानजनक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार का यह एक बड़ा कदम है। पर कर्ज सहित खेती की आम मुश्किलों के अलावा फसलों के मारे जाने या उनकी न्यूनतम लागत भी वसूल न हो पाने के बाद किसानों के सामने कैसी समस्या खड़ी होती है, यह एक जगजाहिर सवाल रहा है। इसलिए किसानों को सामाजिक सुरक्षा कवच मुहैया कराने के साथ-साथ कृषि क्षेत्र के सामने खड़ी अन्य बड़ी चुनौतियों को दूर करने के लिए भी मजबूत इच्छाशक्ति के साथ ठोस पहलकदमी की जरूरत है।

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