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संपादकीय: पर्यावरण की खातिर

पर्यावरण के नुकसानों से लेकर प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए पेड़ों को सबसे अहम अंग माना गया है और कम कागज का प्रयोग करके हम पेड़ बचाने में अपने स्तर से भी सहयोग कर सकते हैं।

Author Updated: November 1, 2019 1:24 AM
तेजी से कटते पेड़ पर्यावरण के संकट को और बढ़ा रहे हैं।

दुनिया भर में पर्यावरण के संरक्षण को लेकर बढ़ती चिंता के बीच जंगल और पेड़ों को बचाने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जाता है। खासतौर पर विकास के नाम पर पेड़ों को व्यापक पैमाने पर काटने पर न केवल तीखे सवाल उठे हैं, बल्कि इस मसले पर आंदोलन भी खड़े हो रहे हैं। लेकिन पेड़ों को बचाने की चिंता के बीच शायद ही इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि इन्हें काटे जाने का एक बड़ा कारण कागजों का बेजा इस्तेमाल भी है। गौरतलब है कि कागज तैयार करने के काम में आने वाले पेड़ों की कटाई आज एक बड़ी समस्या हो चुकी है और तेजी से कटते पेड़ पर्यावरण के संकट को और बढ़ा रहे हैं। फिर ऐसी स्थिति में अगर कहीं कागज के बेजा इस्तेमाल को हतोत्साहित करने का प्रयास होता है तो यह स्वागतयोग्य है। रेलवे महकमे में यों तो कामकाज में तेजी लाने के मकसद से अट्ठावन बड़े दफ्तरों में कागज पर कामकाज पूरी तरह बंद कर दिया गया है, लेकिन इसका सीधा असर कागज की भारी पैमाने पर बचत के रूप में होगा। और कागज बचाने को जिस तरह पेड़ बचाने के रूप देखा जाता है, उससे साफ है कि इस तरह की कोई भी कोशिश पर्यावरण की फिक्र के रूप में देखी जाएगी।

ताजा कवायद के रूप में रेलवे के दफ्तरों के जरिए करीब पचास हजार रेल कर्मचारी आॅनलाइन सेवाओं से जोड़ दिए गए हैं। निश्चित रूप से नई व्यवस्था की मदद से केंद्रीय स्तर पर फाइलों की निगरानी की जा सकेगी और काम की रफ्तार में बढ़ोतरी होगी। मगर इसके साथ-साथ कागज का प्रयोग खत्म होने का फायदा कार्बन फुट-प्रिंट में कमी लाने में भी मिलेगा। इससे पहले भी देश भर में कागज को बचाने या इसका इस्तेमाल खत्म करने के लिए अलग-अलग स्तर पर पहलकदमी हुई है। मसलन, करीब डेढ़ महीने पहले झारखंड में नवनिर्मित विधानसभा को पहली कागजरहित विधानसभा का दर्जा मिला है। इसके अलावा खनन और नागर विमानन मंत्रालय इसी साल फरवरी में उन नौ सरकारी संगठनों में शामिल था, जिन्हें कागजरहित कार्य को बढ़ावा देने के लिए पुरस्कृत किया गया था। खुद प्रधानमंत्री ने लगभग ढाई साल पहले ही कहा था कि किसी संस्थान के भीतर प्रौद्योगिकी को सामूहिक तौर पर अपनाया जा सकता है; इस तरह कागज रहित पहल से पर्यावरण की सुरक्षा होगी और इसलिए यह भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक अच्छी सेवा है।

जाहिर है, ज्यादातर काम आधुनिक तकनीकी पर निर्भर होते जाने के डिजिटल दौर में कागज के कम से कम प्रयोग के जरिए पर्यावरण को बहुस्तरीय फायदा पहुंचाया जा सकता है। इसलिए लगभग सभी पर्यावरणविद पेड़ लगाने या मौजूदा पेड़ बचाने के साथ-साथ कागज के बेलगाम प्रयोग को बंद करने या कम करने की सलाह देते रहे हैं। विडंबना यह है कि जहां हम कागज का कम इस्तेमाल कर सकते हैं या बिना कागज के भी काम चला सकते हैं, वहां भी कागजों पर हमारी बेमानी निर्भरता दिखती है। कई बार तो सादे कागज के एक तरफ लिखने को नियम की तरह देखा जाता है। जबकि इस तरह दोगुने कागज की खपत होती है। यह ध्यान रखने की जरूरत है कि दुनिया भर में करीब चालीस फीसद वृक्ष केवल कागज बनाने के लिए काट डाले जाते हैं। जबकि पर्यावरण के नुकसानों से लेकर प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए पेड़ों को सबसे अहम अंग माना गया है और कम कागज का प्रयोग करके हम पेड़ बचाने में अपने स्तर से भी सहयोग कर सकते हैं। पेड़ों का बचना पर्यावरण का बचना है और यह समूचे मानव जीवन के लिए कितना अहम है, इसे अलग से बताने की जरूरत नहीं है।

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