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संपादकीय: ट्रंप की मुश्किल

अमेरिका में संविधान के किसी भी तरह के उल्लंघन को बहुत गंभीरता से लिया जाता है। इसलिए उस मामले पर भी ट्रंप के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया था। ट्रंप प्रशासन ने उन आरोपों को सिरे से खारिज किया था, जैसा कि ताजा मामले में कर रहा है।

Author Published on: November 1, 2019 1:24 AM
DONALD TRUMP, AMERICAअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति एक बार फिर मुश्किलों में फंसते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में बहुमत वाली डेमोक्रेटिक पार्टी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर महाभियोग का प्रस्ताव पेश कर दिया है। ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी बाइडेन और उनके बेटे के खिलाफ जांच के लिए यूक्रेन सरकार पर दबाव बनाया था। इन दोनों लोगों पर यूक्रेन की एक गैस कंपनी में भ्रष्टाचार का आरोप था। जाहिर है, ट्रंप ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए यूक्रेन सरकार पर यह दबाव इसलिए बनाया कि वे अपने प्रतिद्वंद्वी पर कानूनी शिकंजा कस सकें। अमेरिका में चुनाव होने वाले हैं और ट्रंप किसी भी तरह दुबारा राष्ट्रपति बनना चाहते हैं, इसलिए भी उन्होंने यह हथकंडा अपनाया। मगर उनका यह व्यवहार अमेरिकी संविधान के विरुद्ध है, इसलिए उन पर महाभियोग चलाया जा सकता है। डेमोक्रेटिक पार्टी के महाभियोग संबंधी प्रस्ताव पर विचार करने के बाद वहां की खुफिया एजंसी के मुखिया, न्यायिक समिति के अध्यक्ष, विदेश मामलों की समिति के अध्यक्ष और प्रबंधन एवं सुधार समिति के अध्यक्ष ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। उस बयान में कहा गया है कि हमने पहले ही ऐसे सबूत एकत्र कर लिए हैं, जो साबित करते हैं कि राष्ट्रपति ने अपनी ताकत का दुरुपयोग सरकार के विभिन्न स्तरों पर दूसरे देशों पर दबाव बनाने और अगले साल होने वाले चुनाव में हस्तक्षेप करने के इरादे से किया।

यह पहला मौका नहीं है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने इस तरह अपने पद का दुरुपयोग किया और उनके खिलाफ उनकी प्रतिद्वंद्वी पार्टी हमलावर हुई। ट्रंप पर एक गंभीर आरोप यह भी है कि वे राष्ट्रपति बनने के बाद भी अपनी कंपनियों के मुखिया के पद पर बने रहे। अमेरिकी संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति बनने के बाद अपने निजी उपक्रमों के संचालन से जुड़ा नहीं रह सकता। मगर ट्रंप ने उसकी अवहेलना की। इस तरह माना जा सकता है कि वे राष्ट्रपति पद पर रहते हुए अपनी कंपनियों को लाभ पहुंचाते रहे। अमेरिका में संविधान के किसी भी तरह के उल्लंघन को बहुत गंभीरता से लिया जाता है। इसलिए उस मामले पर भी ट्रंप के खिलाफ प्रस्ताव पेश किया गया था। ट्रंप प्रशासन ने उन आरोपों को सिरे से खारिज किया था, जैसा कि ताजा मामले में कर रहा है। अपनी कंपनियों के मुखिया पद पर बने रहने के मामले में विपक्षी पार्टी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था और अदालत ने उस प्रस्ताव को गंभीर प्रकृति का माना था। उस मामले में भी ट्रंप के खिलाफ महाभियोग चलाने का प्रस्ताव है।

दरअसल, ट्रंप ने अपने कार्यकाल में अनेक ऐसे काम किए हैं, जो अमेरिकी परंपराओं के विरुद्ध माने जाते हैं। उनके फैसलों से कई ऐसे देशों के साथ अमेरिका के संबंध भी खराब हुए हैं, जो पहले उसके मित्र राष्ट्र थे या जिनके विरुद्ध अमेरिका कठोर फैसले करने से बचता रहा था। ट्रंप के निजी जीवन से जुड़े कई आरोप भी हैं। राष्ट्रपति चुनाव के समय वोटों में गड़बड़ी करने के भी उन पर आरोप रहे हैं। मगर ट्रंप उन तमाम आरोपों की परवाह किए बगैर अपनी मर्जी से कई फैसले करते रहे हैं। इसका नतीजा यह भी हुआ है कि कुछ मौकों पर अदालत ने हस्तक्षेप करके उनके फैसले को पलटा। ट्रंप अगले चुनाव में अपना पलड़ा भारी रखने के लिए बेशक प्रयास कर रहे हैं, पर महाभियोग संबंधी प्रस्ताव का उनके राजनीतिक जीवन पर बुरा प्रभाव पड़ेगा ही।

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