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संपादकीय: जानलेवा सफर

किसी भी स्वचालित तकनीकी का इस्तेमाल करते हुए बरती जाने वाली सावधानी जहां उसकी उपयोगिता को तय करती है, वहीं जरा-सी लापरवाही बड़े हादसे की वजह बन जाती है।

Author March 12, 2019 3:12 AM
अक्षरधाम मंदिर के पास चलती कार में अचानक आग गई थी।

आधुनिक तकनीकी के विकास ने मानव जीवन को बहुत आसान बना दिया है। मगर इन्हीं तकनीकों के इस्तेमाल में मामूली-सी चूक जानलेवा बन जाती है। राजधानी दिल्ली में अक्षरधाम मंदिर के पास चलती कार में अचानक आग गई और उसमें दो बच्चियों सहित एक महिला जिंदा जल गई। इस हादसे की वजह प्रथम दृष्ट्या यही लगती है कि सीएनजी गैस का सिलेंडर लीक कर रहा था या फिर शॉर्ट सर्किट इसके लिए जिम्मेदार है। आग इतनी तेजी से फैली कि कार रोक कर चालक उपेंद्र अपनी एक बेटी को किसी तरह बाहर खींच सकने में तो कामयाब हो गए, लेकिन आग से घिर चुकी कार में से अपनी पत्नी और दो बच्चियों को नहीं निकाल सके। नतीजतन, चारों तरफ खड़ी भीड़ के बीच तीनों जिंदा जल गए। अग्निशमन दस्ते की गाड़ी जब तक पहुंचती, तब तक कार और उसमें फंसे तीनों लोग खाक हो चुके थे। इस हादसे ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि आधुनिक तकनीकी से लैस कारों में क्या कोई ऐसी व्यवस्था नहीं की जा सकती कि अचानक आग लगने की स्थिति में कम से कम उसमें सवार लोग बाहर निकल सकें!

इस तरह की अमूमन सभी घटनाओं में यही मुख्य वजह सामने आई है कि आग लगने के बाद कार का स्वचालित दरवाजा या तो बंद था या फिर तमाम कोशिशों के बावजूद नहीं खुल सका। यानी अगर किसी तरह दरवाजा खुल जाता तो आग की लपटों में घिरी होने के बावजूद कार में बैठे लोगों के बचने की एक सूरत बन सकती थी। लेकिन आजकल की कारों में ऐसे लॉक वाले दरवाजे आने लगे हैं जो एक जगह से बंद होते हैं और ड्राइवर के किसी खास बटन को दबाने के बाद ही खुल पाते हैं। एक कारण शायद यह भी है कि अक्सर लोग अपने वाहनों में पहले से मौजूद व्यवस्था के अलावा बिजलीचालित कई अन्य उपकरण भी लगवा लेते हैं। इसका बोझ बैट्री पर पड़ता है, जिसकी वजह से कम गुणवत्ता वाले तारों में शॉर्ट सर्किट और आग लग जाने की आशंका बनी रहती है। चूंकि इस तरह की तकनीकी इलेक्ट्रिकल होती है, इसलिए आग लग जाने के बाद तारों के जल जाने या शॉर्ट सर्किट के चलते भी दरवाजे खुलने की गुंजाइश खत्म हो जाती है। ऐसे में कार के शीशे तोड़ कर निकलने की कोशिश की जा सकती है। लेकिन तेजी से आग फैलने के क्रम में कोई भी उपाय ध्यान नहीं रह पाता है।

ऐसे में एक ही स्थिति बचती है कि आग लगने की हर स्थिति के प्रति सावधानी बरती जाए और किसी मामूली-सी चूक की गुंजाइश भी खत्म की जाए। अक्षरधाम घटना के दौरान हैरानी की एक बात यह रही कि आसपास बहुत सारे लोग खड़े थे, लेकिन उन्होंने तत्काल कोई मदद करने या मुहैया कराने से ज्यादा लपटों में घिरी कार का वीडियो बनाने में अपनी ऊर्जा खर्च की। संभव है कि आग ज्यादा फैल गई थी और उसमें फंसे लोगों को खींचना एक बड़ा जोखिम था। फिर भी अगर लोग वीडियो बनाने के बजाय बचाव की कोशिश करते तो नाउम्मीदी में से भी कोई उम्मीद बन सकती थी। ऐसी भी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं जिनमें कार के स्वचालित दरवाजे लॉक हो जाने की वजह से उसमें बंद बच्ची का दम घुट गया और उसकी जान चली गई। जाहिर है, किसी भी स्वचालित तकनीकी का इस्तेमाल करते हुए बरती जाने वाली सावधानी जहां उसकी उपयोगिता को तय करती है, वहीं जरा-सी लापरवाही बड़े हादसे की वजह बन जाती है।

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