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संपादकीय: चीन की चाल

भारत के प्रति चीन का अब तक जो रवैया रहा है, वह दुखद और संदिग्ध ही है। ऐसे में अगर आज चीन ने अचानक से पलटी मारते हुए मुंबई हमले को सबसे कुख्यात बताने की कोशिश की है तो इसके पीछे उसकी कोई चाल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

Author March 20, 2019 3:29 AM
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग। (AP Photo)

पहली बार ऐसा हुआ है जब चीन ने मुंबई में नवंबर 2008 में हुए आतंकी हमले को दुनिया के सबसे भीषण और कुख्यात हमलों में से एक करार दिया है। चीन की ऐसी प्रतिक्रिया उस वक्त भी नहीं आई थी जब मुंबई आतंकी हमले से कराह रही थी। संसद पर या अन्य आतंकी हमलों के बाद भी चीन ने इतने कड़े शब्दों में कभी कुछ नहीं कहा जो आतंकवाद से जूझ रहे भारत के प्रति उसकी चिंता को जाहिर करते या लगता कि आतंकवाद से लड़ने में वह भारत की मदद करेगा। इसलिए चीन के इस रुख के बाद भारत ही नहीं, दुनिया के तमाम देश यह सोच कर हैरान हो रहे होंगे कि जो चीन कल तक मौलाना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने के भारत के प्रयासों में निरंतर बाधा पैदा करता रहा, वह आज मुंबई हमले को लेकर इतनी चिंता कैसे जताने लगा। हालांकि इसके पीछे फौरी तर्क यह दिया जा सकता है कि मसूद अजहर के मुद्दे पर चीन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बन रहा है, उससे कहीं न कहीं चीन झुकने को मजबूर हुआ है। वह अब अपनी छवि को और ऐसा नहीं बनने देना चाहता जिससे लगे कि वह आतंकवाद और उसे बढ़ावा देने वाले मुल्कों के साथ खड़ा है।
सवाल है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि अब चीन की आंखें खुल गर्इं।

भारत के प्रति चीन का अब तक जो रवैया रहा है, वह दुखद और संदिग्ध ही है। ऐसे में अगर आज चीन ने अचानक से पलटी मारते हुए मुंबई हमले को सबसे कुख्यात बताने की कोशिश की है तो इसके पीछे उसकी कोई चाल होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। इन दिनों पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं। इस अवसर को भुनाते हुए चीन ने शिनजियांग प्रांत में आतंकवाद के खिलाफ जारी लड़ाई के बारे में एक श्वेतपत्र जारी किया है। चीन में आतंकवाद के नाम पर दस हजार से ज्यादा लोगों को जेल में डाल दिया गया है। ये उइगर मुसलमान हैं जिन्हें चीन अपने यहां आतंकवाद की जड़ करार देता रहा है। इसी वजह से चीन पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगते रहे हैं। श्वेतपत्र के माध्यम से चीन अब यह दिखाने में लगा है कि वह खुद उस आतंकवाद से पीड़ित है जो वैश्विक शांति के लिए बड़ा खतरा बन गया है। इस श्वेतपत्र के जरिए वह पाकिस्तान सहित पूरे वैश्विक मुसलिम समुदाय को यह संदेश देना चाहता है कि उसके यहां मुसलमानों पर कोई अत्याचार नहीं हो रहे हैं।

बहरहाल, मुंबई के आतंकी हमले को लेकर चीन ने जो कुछ कहा है, उससे उसका दोमुंहापन ही सामने आया है। इस बार भी उसने सुरक्षा परिषद में मौलाना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने से रुकवा दिया, यह जानते हुए भी कि वह भारत में कई आतंकी हमलों को अंजाम दे चुका है। भारत ने समय-समय पर सारे हमलों के सबूत पेश किए हैं। इसके बावजूद चीन ने पाकिस्तान पर ऐसा कोई दबाव नहीं बनाया, जिससे भारत को राहत मिली हो। हालांकि भारत चीन के लिए बड़ा बाजार है, यहां चीनी कंपनियों का भारी निवेश है, फिर भी वह भारत विरोधी रुख से बाज नहीं आ रहा। अगर चीन को वाकई लगता है कि भारत आतंकवाद की पीड़ा झेल रहा है तो उसे सबसे पहले मसूद अजहर के मुद्दे पर अपना रुख बदलना चाहिए। साथ ही, उसे पाकिस्तान पर इस बात के लिए दबाव बनाना होगा कि वह सभी वांछित आतंकी सरगनाओं को भारत को सौंपे। वरना मुंबई हमले को लेकर चीन की स्वीकारोक्ति महज एक चाल से ज्यादा कुछ नहीं मानी जाएगी।

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